-उत्तर प्रदेश भर में नर्सेज का रोजाना दो घंटे का कार्य बहिष्कार जारी


सेहत टाइम्स
लखनऊ। राजकीय नर्सेस संघ उत्तर प्रदेश के नेतृत्व में प्रदेश के सभी जनपदों के चिकित्सालयों एवं राजकीय मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत नर्सिंग संवर्ग द्वारा अपनी 13 सूत्रीय लंबित मांगों को लेकर प्रतिदिन सुबह दो घंटे का कार्य बहिष्कार जारी है। 9 अक्टूबर से लगातार चल रहे आंदोलन के तहत दो घंटे का कार्य बहिष्कार आज 18वें दिन तक पहुंच चुका है। संघ ने फिर स्पष्ट किया है कि उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक एवं अपर मुख्य सचिव अमित घोष के साथ हुई वार्ता में सहमति बनी मांगों के संबंध में शासनादेश जब तक निर्गत नहीं हो जाता, तब तक दो घंटे का कार्य बहिष्कार लगातार जारी रहेगा।
यह जानकारी राजकीय नर्सेस संघ उत्तर प्रदेश संघ के महामंत्री अशोक कुमार ने दी है। उन्होेंने कहा कि एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि सहमति के बावजूद शासनादेश जारी करने में अनावश्यक विलंब किया जाता है, तो अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की घोषणा भी की जा सकती है, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
प्रमुख मांगें
1. गृह जनपद में तैनाती एवं स्थानांतरण की व्यवस्था लागू की जाए।
2. निदेशालय से चिकित्सालय स्तर तक नर्सिंग संवर्ग के सभी रिक्त पदों पर समयबद्ध पदोन्नति सुनिश्चित की जाए।
3. चिकित्सालयों में कार्यरत कर्मचारियों के बच्चों के लिए पालनाघर (क्रेच) की व्यवस्था की जाए।
4. उच्च शिक्षा प्राप्त करने हेतु बी.एससी. नर्सिंग की भाँति नर्सिंग संवर्ग को भी सवेतन अवकाश प्रदान किया जाए।
5. उच्चीकृत जिला चिकित्सालयों को मेडिकल कॉलेज में परिवर्तित किए जाने पर वहां कार्यरत नर्सिंग संवर्ग को उसी संस्थान में समायोजित किया जाए अथवा उनके पदों सहित पूर्व व्यवस्था में वापस किया जाए, ताकि उनके पद एवं सेवा संबंधी हित सुरक्षित रहें।
6. उच्च संस्थानों में देय व्यवस्था के अनुरूप नर्सिंग संवर्ग को समान एवं उचित भत्ते प्रदान किए जाएं।
7. चिकित्सा शिक्षा विभाग में नर्सिंग संवर्ग के रिक्त उच्च पदों, जिनमें नर्सिंग प्रशासन के वरिष्ठ पद भी शामिल हैं, पर तत्काल पदोन्नति की प्रक्रिया पूरी की जाए।
8. चिकित्सा शिक्षा के पात्र कार्मिकों को एसीपी (ACP) का लाभ समयबद्ध तरीके से प्रदान किया जाए तथा किसी भी पात्र नर्सिंग अधिकारी को अनावश्यक रूप से लाभ से वंचित न रखा जाए।
संघ ने स्पष्ट किया है कि केवल आश्वासन नहीं, बल्कि मांगों पर ठोस कार्यवाही और सहमति के अनुरूप शासनादेश जारी होना आवश्यक है। जब तक मांगों का समाधान नहीं होता और संबंधित शासनादेश निर्गत नहीं किए जाते, तब तक प्रदेशव्यापी दो घंटे का कार्य बहिष्कार जारी रहेगा। शासन स्तर पर शीघ्र निर्णय न होने की स्थिति में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

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