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कार्डियक अरेस्ट से हो रही अचानक मौतों का कारण सिर्फ हार्ट अटैक नहीं…

-बड़ों के साथ बच्चों को भी अपनी गिरफ्त में लेते हृदय रोगों पर चर्चा के लिए लखनऊ में दो दिनों तक जुटेंगे विशेषज्ञ

सेहत टाइम्स

लखनऊ। उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा वार्षिक हृदय रोग सम्मेलन CARDICON 2026 दिनांक 13-14 फरवरी 2026 को अटल बिहारी वाजपेयी कन्वेंशन सेंटर, लखनऊ में आयोजित किया जाएगा। सम्मेलन का उद्घाटन उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक द्वारा किया जाएगा।

यह जानकारी 12 फरवरी को केजीएमयू के हृदय रोग विभाग लारी कार्डियोलॉजी में आयोजित पत्रकार वार्ता में दी गयी। इस पत्रकार वार्ता में कार्डिकॉन 2026 के आयोजन अध्यक्ष प्रो ऋषि सेठी, आयोजन सचिव प्रो अक्षय प्रधान, प्रो प्रवेश विश्वकर्मा, डॉ मोनिका भंडारी, डॉ अभिषेक सिंह, डॉ अखिल शर्मा, डॉ गौरव चौधरी और डॉ आयुष शुक्ला ने इस सम्मेलन में होने वाली विभिन्न प्रकार के हृदय रोगों पर चर्चाओं के बारे में संक्षिप्त किंतु प्रभावी तरीके से जानकारियां दीं। वक्ताओं ने बताया कि किस प्रकार से हृदय रोगों का शिकार होने से लोगों को बचा सकता है, साथ ही यह भी बताया कि प्रारम्भिक स्तर पर हृदय रोग की डायग्नोसिस होने से उपचार की बड़ी प्रक्रियाओं से किस प्रकार बचा जा सकता है। एक प्रश्न के उत्तर में महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए बताया गया कि कई बार ऐसा होता है कि व्यक्ति पहचान नहीं पाता है कि उसे होने वाली परेशानी हृदय रोग के कारण है या गैस जैसी अन्य वजहों से, तो इसके लिए सबसे पहले मरीज को किसी फिजीशियन के पास ले जाना चाहिये, फिजीशियन देखकर बता देगा कि समस्या हृदय रोग की है या छाती रोग या किसी अन्य प्रकार के रोग की।

वक्ताओं ने बताया कि हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट दो अलग-अलग प्रकार की स्थितियां हैं। कार्डियक अरेस्ट का अर्थ है कि हृदय जो खून पम्प करता है, उस पम्प करने की प्रक्रिया का अचानक रुक जाना। इस प्रक्रिया के रुकने के कई कारण हो सकते हैं, उनमें से एक कारण हार्ट अटैक भी है। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ समय से अचानक होने वाली ज्यादातर मौतों का कारण कार्डियक अरेस्ट होना है, ये मौतें वयस्कों के साथ ही बच्चों की भी हुुई हैं। बच्चों के कार्डियक अरेस्ट होने के कारणों में उनका पूर्व से या जन्मजात हृदय रोगों से ग्रस्त होना भी है।

सम्मेलन के आयोजन अध्यक्ष प्रो. ऋषि सेठी ने बताया कि CARDICON 2026 का मुख्य संदेश स्पष्ट है- प्रारंभिक जांच, स्वस्थ जीवनशैली और समय पर उपचार से हृदय रोग काफी हद तक रोके जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि सम्मेलन के प्रथम दिवस में उच्च रक्तचाप, मधुमेह, डिस्लिपिडेमिया, मोटापा तथा हृदयाघात की समग्र रोकथाम एवं प्रबंधन पर चर्चा होगी। द्वितीय दिवस में जटिल हृदय उपचार एवं नवीनतम तकनीकों पर विशेष सत्र आयोजित होंगे। प्रो सेठी ने बताया कि केजीएमयू में शीघ्र ही लेजर ट्रीटमेंट की शुरुआत की जायेगी।

आयोजन सचिव डॉ अक्षय प्रधान ने बताया कि यह सम्मेलन देशभर के वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञों को एक मंच पर लाएगा, जहां बढ़ते हृदय रोगों की समस्या पर चर्चा की जाएगी तथा रोकथाम एवं उपचार के नवीनतम उपायों पर विचार-विमर्श होगा। आयोजन सचिव प्रो. अक्षय प्रधान ने बताया कि भारत में हृदय रोग मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक है। उच्च रक्तचाप, मधुमेह, मोटापा और कोलेस्ट्रॉल की बढ़ती समस्या, साथ ही निष्क्रिय जीवनशैली, तनाव और तंबाकू सेवन के कारण कम उम्र में हृदयाघात के मामले बढ़ रहे हैं। प्रो प्रधान ने बताया कि केजीएमयू की कुलपति एवं सम्मेलन की संरक्षक पद्मश्री प्रो सोनिया नित्यानंद ने सम्मेलन की सफलता के लिए अपनी शुभकामनाएँ प्रेषित की हैं।

प्रो. प्रवेश विश्वकर्मा ने कहा कि कई लोग अपने छुपे हुए जोखिम कारकों से अनभिज्ञ रहते हैं, जब तक कि उन्हें गंभीर हृदयाघात (STEMI) जैसी स्थिति का सामना न करना पड़े।

प्रो. मोनिका भंडारी ने बताया कि भारतीय मरीजों में पश्चिमी देशों की तुलना में लगभग 10 वर्ष पहले हृदय रोग विकसित हो जाते हैं, और अब 30-40 वर्ष की आयु में भी हृदयाघात के मामले देखे जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि गर्भावस्था में हृदयाघात का खतरा रहता है, जिसको पूर्व में ही कुछ लक्षणों और जांचोें से पकड़ा जा सकता है।