-विश्व पर्यावरण दिवस (5 जून) पर केजीएमयू के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग में “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के तहत हुआ वृक्षारोपण

सेहत टाइम्स
लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग में आज विश्व पर्यावरण दिवस पर एक सार्थक एवं प्रेरणादायक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन वायु मित्र अभियान (डॉक्टर्स फॉर क्लीन एयर एंड क्लाइमेट चेंज एवं लंग केयर फाउंडेशन Doctors for Clean Air and Climate Change and Lung Care Foundation) के राष्ट्रीय संयोजक डॉ. सूर्यकान्त के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। उन्होंने बताया कि “एक पेड़ माँ के नाम” भारत सरकार द्वारा शुरू किया गया एक जन-अभियान है, जिसका उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण को मातृत्व के सम्मान से जोड़ते हुए वृक्षारोपण को जन-आंदोलन बनाना है। इस अभियान का उद्देश्य केवल वृक्षारोपण कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह भावनात्मक, सामाजिक और पर्यावरणीय चेतना का संगम है। इसका उद्देश्य लोगों को प्रकृति से जोड़ना, हरित आवरण बढ़ाना, जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को कम करना तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और स्वच्छ पर्यावरण सुनिश्चित करना है।
जिंदा रखने के साथ ही ऊर्जा भी देती है स्वच्छ वायु
रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सूर्यकान्त ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने तथा मानव स्वास्थ्य की रक्षा में पेड़ों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि मानव भोजन के बिना तीन सप्ताह और पानी के बिना तीन दिन तक जीवित रह सकता है, लेकिन स्वच्छ वायु के बिना तीन मिनट से अधिक जीवित नहीं रह सकता। एक व्यक्ति प्रतिदिन लगभग 25 हजार बार श्वास लेता है तथा लगभग 10 हजार लीटर वायु उसके फेफड़ों से होकर गुजरती है, जिससे हमें रोज 500 लीटर ऑक्सीजन मिलती है, जो हमें न सिर्फ जिंदा रखती है बल्कि काम करने के लिए ऊर्जा भी प्रदान करती है। ऐसे में वायु की गुणवत्ता का सीधा प्रभाव मानव स्वास्थ्य पर पड़ता है।
पौधे सिर्फ़ प्लांट नहीं, ऑक्सीजन प्लांट हैं
उन्होंने कहा, “पेड़ लगाना केवल पर्यावरण संरक्षण का कार्य नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य और कल्याण में एक निवेश है। हर पेड़ स्वच्छ हवा, कम प्रदूषण और एक स्वस्थ ग्रह के निर्माण में योगदान देता है।” इसीलिए डॉ सूर्यकान्त कहते है कि पौधे सिर्फ़ प्लांट नहीं, ऑक्सीजन प्लांट हैं। क्योंकि पौधे हमें अजीवन निःशुल्क ऑक्सीजन प्रदान करते हैं।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण प्रदूषण मानव स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बन चुका है। औद्योगिकीकरण, शहरीकरण, वाहनों की बढ़ती संख्या, जीवाश्म ईंधनों Fossil fuels का अत्यधिक उपयोग तथा प्लास्टिक प्रदूषण ने वायु, जल और मिट्टी की गुणवत्ता को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। विशेष रूप से वायु प्रदूषण आज श्वास संबंधी रोगों का एक प्रमुख कारण बन चुका है।
ऑर्गेनाइजेशन फॉर कंजर्वेशन ऑफ एनवायरनमेंट एंड नेचर Organization for Conservation of Environment and Nature (ओशन) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सूर्यकान्त ने कहा कि प्रकृति-आधारित समाधान जलवायु परिवर्तन और स्वास्थ्य समस्याओं से निपटने का सबसे प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2018 से वायु मित्र अभियान के माध्यम से वृक्षारोपण, जल संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन, शहरी हरित क्षेत्रों के विकास तथा स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग के लिए व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। हरित वातावरण न केवल वायु गुणवत्ता को बेहतर बनाता है, बल्कि मानसिक तनाव को कम कर लोगों के स्वास्थ्य में भी सुधार करता है।
पौधे ही हैं भविष्य की ऑक्सीजन
विभागाध्यक्ष डॉ. सूर्यकान्त ने बताया कि उनके अथक प्रयासों से विभाग के परिसर में कई ग्रीन ज़ोन विकसित किए गए हैं, जो पूरे केजीएमयू परिसर में सर्वाधिक हैं। उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति को स्वस्थ जीवित रहने के लिए शुद्ध ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है और यह हमें पेड़-पौधों से ही प्राप्त होती है। अतः पौधे ही भविष्य की ऑक्सीजन हैं। यह संयोग कहें या विभाग का सौभाग्य कि श्वास रोग विभाग में शुद्ध वायु का महत्व और भी अधिक है। विभाग परिसर में ग्रीन गार्डन एवं नवग्रह वाटिका का भी निर्माण किया गया है। वाटिका में फल, फूल एवं औषधीय गुणों से भरपूर पेड़-पौधे लगाए गए हैं। इसके अतिरिक्त अनेक प्रकार की साग-सब्जियों एवं अन्य पौधों का भी रोपण किया गया है। ये पौधे विभाग की सुंदरता में चार चाँद लगाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के प्रति उत्कृष्ट कार्य का संदेश देते हैं तथा सभी को प्रेरित करते हैं।
कार्यक्रम में विभाग के चिकित्सक डॉ. संतोष कुमार, डॉ. आनंद श्रीवास्तव, डॉ. अंकित कुमार, सीनियर एवं जूनियर डॉक्टर्स, नर्सिंग स्टाफ, शोधार्थियों, पीआरसी टीम तथा विभागीय कर्मचारियों ने वृक्षारोपण अभियान में सक्रिय रूप से भाग लिया और विभागीय परिसर में पौधे लगाए। यह गतिविधि एक स्वच्छ, हरित एवं स्वस्थ पर्यावरण को बढ़ावा देने के प्रति विभाग की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। कार्यक्रम का समापन सभी प्रतिभागियों द्वारा पर्यावरण संरक्षण संबंधी पहलों का समर्थन जारी रखने तथा वायु गुणवत्ता में सुधार एवं जलवायु परिवर्तन से निपटने की दिशा में सक्रिय योगदान देने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।

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