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अब टीबी की जांच, उपचार की दिशा तय करने को लगे पंख

तीन घंटे में 16 लोगों की जांच करने वाली पहली मशीन लगी उत्‍तर प्रदेश में
16 माड्यूल जींस CBNAAT  जांच मशीन का उद्घाटन किया मंत्री जय प्रताप सिंह ने
 

सेहत टाइम्स ब्‍यूरो

लखनऊ। क्षय रोग यानी टीबी को जड़ से समाप्‍त करने के लिए उत्‍तर प्रदेश सरकार तेजी से कार्य कर रही है, इस दिशा में शुक्रवार को एक और कदम उठाते हुए आज किंग जॉर्ज चिकित्‍सा विश्‍वविद्यालय (केजीएमयू) में 16 माड्यूल जींस CBNAAT  जांच मशीन का उद्घाटन उत्तर प्रदेश के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जय प्रताप सिंह द्वारा किया गया। इस मशीन की खासियत यह है कि इससे मात्र तीन घंटों में एक साथ 16 मरीजों की जांच हो सकेगी, इस जांच से ही तय होगा कि मरीज के अंदर टीबी के कीटाणु हैं या नहीं और यदि हैं तो वे ड्रग रेजिस्‍टेंट तो नहीं, क्‍योंकि ड्रग रेजिस्‍टेंट होने पर और ड्रग रेजिस्‍टेंट न होने पर अलग-अलग प्रकार की दवाओं से उपचार दिया जाता है।

इस मशीन का उद्घाटन शुक्रवार को किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के अटल बिहारी वाजपेयी साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर में पुनरीक्षित राष्ट्रीय क्षय नियंत्रण कार्यक्रम उत्तर प्रदेश के अंर्तगत किया गया। इस मशीन को केजीएमयू में स्थपित किए जाने से अब एक साथ 16 टीबी के मरीजों की जांच एवं उनके उपचार किए जाने की विधि का पता पहले के मुकाबले काफी कम समय में लग सकेगा।

केजीएमयू में स्‍थापित हुई एडवांस्‍ड टेक्‍नोलॉजी से युक्‍त मशीन

इस अवसर पर चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री ने बताया कि विश्वभर के देशों ने टीबी रोग को समाप्त करने के लिए वर्ष 2030 का लक्ष्य निर्धारित किया है लेकिन भारत सरकार ने वर्ष 2025 तक इस बीमारी को जड़ से समाप्त करने का संकल्प लिया है और इसी कड़ी में आज यह एडवांस टेक्नोलॉजी से युक्त यह मशीन केजीएमयू में स्थापित की गई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस मशीन के यहां उपलब्ध होने से पहले के मुकाबले काफी कम समय में टीबी के रोगियों की पहचान और उनके उपचार में तेजी आएगी और इसका लाभ पूरे प्रदेश की जनता को मिलेगा। इसके साथ ही उन्होंने टीबी मरीजों का दवा उपलब्ध होने के साथ ही उसके सेवन को भी सुनिश्चि‍त किए जाने का अनुरोध किया और टीबी से पीड़ित मरीजों को बीच में ही इलाज न छोड़ने तथा पूरा इलाज करवाने की अपील की।

अनियमित दिनचर्या कम कर रही रोग प्रतिरोधक क्षमता

मंत्री ने अनियमित दिनचर्या को भी टीबी सहित अन्य बीमारियां होने का मुख्य कारण बताते हुए कहा कि अनियमित दिनचर्या एवं शारीरिक गतिविधियों में कमी से आज समाज के हर आयु वर्ग के लोगों में रोग प्रतिरोधक क्षमता की कमी हो रही है। उन्होंने कहा कि यदि स्वयं में जागरूकता नहीं लाएंगे तो देश और प्रदेश में गंभीर बीमारी से ग्रस्त लोगों की संख्या में बढ़ोतरी हो सकती है। उन्होंने कहा कि भविष्य की पीढ़ी को स्वस्थ एवं सुरक्षित रहने के लिए अपनी दिनचर्या में बदलाव करना जरूरी है।

स्वस्थ रहने के लिए स्वच्छता सबसे सरल उपाय

इस अवसर पर चिकित्सा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो एमएलबी भट्ट ने स्वच्छ भारत योजना, नमामि गंगे योजना तथा उज्‍ज्‍वला योजना, अन्तरराष्ट्रीय योग दिवस का जिक्र करते हुए कहा कि केन्द्र सरकार की विभिन्न महत्वाकांक्षी योजनाओं ने स्वच्छता के माध्यम से टीबी पर सबसे घातक प्रहार करने का कार्य किया है और इस दिशा में पर्याप्त प्रगति हुई है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ रहने के लिए स्वच्छता सबसे सरल उपाय है। स्वच्छ वातावरण में रहने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और इसके माध्यम से बीमारी से दूर रहा जा सकता है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि टीबी मुक्त भारत के लिए सरकार के साथ ही गैर सरकारी संगठनों एवं स्वयंसेवी संस्थाओं को भी महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी।

विश्‍व भर के टीबी रोगियों में एक चौथाई से ज्‍यादा भारत में

कुलपति ने कहा कि सम्पूर्ण विश्व में लगभग एक करोड़ लोगों को प्रति वर्ष टीबी की चपेट में आते हैं और उसमें से 27 फीसदी से ज्यादा लोग भारत में टीबी का शिकार होते हैं तथा उससे बड़ा दुर्भाग्य उत्तर प्रदेश का है जहां देश के 27 लाख टीबी मरीजों में से लगभग 8 लाख टीबी के मरीज यहां डायग्नोस होते हैं। इसके साथ ही उन्होंने टीबी रोग के उपचार के लिए और अधिक शोध किए जाने की जरूरत पर जोर दिया।

इस अवसर पर केजीएमयू माइक्रोबायोलॉजी विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो अमिता जैन और स्टेट टीबी आफिसर डॉ संतोष गुप्ता ने CBNAAT  मशीन की उपयोगिता के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि इस मशीन के माध्यम से मात्र दो से तीन घंटों में ही 16 टीबी मरीजों की एक साथ जांच रिपोर्ट और उन्हें किस प्रकार का इलाज दिया जाए समेत अन्य जानकारी हासिल की जा सकती है।

विश्‍व भर में हर डेढ़ मिनट में एक टीबी रोगी की मौत

इस कार्यक्रम में केजीएमयू के रेस्परेटरी मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष एवं राज्य क्षय रोग नियंत्रण टास्क फोर्स के अध्यक्ष डॉ सूर्यकांत ने बताया कि विश्वभर में हर डेढ़ मिनट में एक मरीज की मौत होती है। उन्होंने भारत सरकार द्वारा इस बीमारी को गंभीरता से लिए जाने तथा इसके रोकथाम के लिए किए जा रहा उपायों की सराहना करते हुए कहा कि भारत सरकार द्वारा टीबी के मरीजों के इलाज के साथ ही 500 रुपए पोषण भत्ता भी दिया जा रहा है, जो कि सीधे पीड़ित मरीजों के बैंक खातों में भेजा जा रहा है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में तीन लाख इकसठ हजार आठ सौ नब्बे (3,61,890) मरीजों को पोषण भत्ते के रूप में 74 करोड़ रुपए दिए जा चुके हैं। इसके साथ ही यूपी के 18 वर्ष तक के 548 बच्चों को गोद लिया गया है तथा उनके इलाज की सम्पूर्ण जिम्मेदारी उठाई जा रही है।

उक्त कार्यक्रम में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ नरेन्द्र अग्रवाल, महानिदेशक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं, उत्तर प्रदेश, डॉ पद्माकर सिंह, प्रमुख सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग, उत्तर प्रदेश, देवेश चतुर्वेदी, माइक्रोबायोलॉजी विभाग की डॉ शीतल वर्मा समेत अन्य चिकित्सक एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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