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गर्भधारण में बाधक बीमारी पीसीओडी के कारणों में ज्‍यादातर साइकोसोमेटिक

-रिसर्च के बाद होम्‍योपैथी से सफल इलाज करने वाले डॉ गिरीश गुप्‍ता ने कॉन्‍फ्रेंस में प्रस्‍तुत किया अपना शोध पत्र

-भारत सरकार से पीसीओडी‍ रिसर्च प्रोजेक्‍ट पाने वाले प्रथम प्राइवेट होम्‍योपैथिक चिकित्‍सक हैं डॉ गिरीश

सेहत टाइम्‍स

लखनऊ। गौरांग क्‍लीनिक एंड सेंटर फॉर होम्‍योपैथिक रिसर्च (जीसीसीएचआर) के संस्‍थापक व चीफ कन्‍सल्‍टेंट डॉ गिरीश गुप्‍ता ने गर्भधारण में बाधा पैदा करने वाली बीमारी पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम (पीसीओएस या पीसीओडी) पर की गयी अपनी रिसर्च की जानकारी देते हुए बताया है कि पीसीओडी के कारणों में ज्‍यादातर मनोदैहिक या साइकोसोमेटिक होते हैं, और इन्‍हीं कारणों को केंद्र में रखकर मरीजों को दी गयीं दवाओं से पीसीओडी के उपचार में सफलता प्राप्‍त हुई।   

डॉ गुप्‍ता ने यह बात चंडीगढ़ में 11-12 फरवरी को आयोजित इंडियन इंस्‍टीट्यूट ऑफ होम्‍योपैथिक फि‍जीशियन की दो दिवसीय कॉन्‍फ्रेंस होम्‍यो वर्ल्‍ड विजन में पीसीओडी पर दिये अपने प्रेजेन्‍टेशन में कही। आपको बता दें कि प्राइवेट क्षेत्र में रहते हुए होम्‍योपैथिक रिसर्च के प्रति अपना जीवन समर्पित करने वाले डॉ गुप्‍ता ने अपनी डॉक्‍टरी पढ़ाई के दौरान ही शोध कार्यों की शुरुआत कर दी थी। चार दशकों से होम्‍योपैथिक प्रैक्टिस कर रहे डॉ गिरीश ने अब तक अनेक जटिल रोगों का सफल उपचार कर रिसर्च के क्षेत्र में अंतर्राष्‍ट्रीय और राष्‍ट्रीय स्‍तर पर अपना लोहा मनवाया है। डॉ गुप्‍ता के पीसीओडी में सफल शोध को देखते हुए ही भारत सरकार द्वारा उन्‍हें वर्ष 2015 में पीसीओडी पर प्रोजेक्‍ट सौंपा गया था। ज्ञात हो कि डॉ गिरीश गुप्‍ता प्रथम प्राइवेट होम्‍योपैथिक चिकित्‍सक हैं जिन्‍हें भारत सरकार से रिसर्च प्रोजेक्‍ट दिया गया है। इस प्रोजेक्‍ट के तहत शोध कार्य वर्ष 2015 से 2017 तक आयुष मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा प्राप्त वित्ती्य सहायता से किया गया।

कॉन्‍फ्रेंस में अपने प्रेजेन्‍टेशन में इस बारे में जानकारी देते हुए डॉ गिरीश गुप्‍ता ने बताया कि इस रिसर्च पेपर का प्रकाशन “इंडियन जर्नल ऑफ रिसर्च इन होम्योपैथी”(IJRH) में जनवरी-मार्च 2021 अंक में हुआ था। यह जर्नल सेंट्रल काउंसिल फॉर रिसर्च इन होम्योपैथी (CCRH) द्वारा प्रकाशित किया जाता है जिसमें गहन छानबीन कर अनेक कसौटी पर कसने के बाद ही लेख के प्रकाशन की स्वीकृति दी जाती है। इस जर्नल में प्रकाशित होने वाली रिसर्च को दूसरे देशों में आसानी से समझा जा सके इसके लिए रिसर्च का सारांश कई विदेशी भाषाओं में भी प्रकाशित किया जाता है।

डॉ गिरीश ने बताया कि यह शोध पीसीओएस से पीड़ित 34 महिलाओं (23 अविवाहित तथा 11 विवाहित) पर 2 वर्ष की अवधि में किया गया जिसके परिणाम अत्यंत उत्साहवर्धक रहे। इन 34 महिलाओं में से 16 में आशातीत लाभ प्राप्त हुआ, 12 में यथास्थिति बनी रही तथा 6 में कोई लाभ नहीं हुआ।

डॉ गुप्‍ता ने बताया कि इस कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन हरियाणा विधानसभा के अध्यक्ष ज्ञान चंद गुप्ता द्वारा किया गया,  उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि होम्‍योपैथिक चिकित्सा बहुत ज्यादा प्रभावी और साइड इफेक्ट से रहित होने के साथ ही सस्ती व आम आदमी की पहुंच में होने के चलते आम प्रचलन में आ चुकी है। उन्होंने कहा कि विश्व के 85 से 90 देशों में यह पद्धति एलोपैथी के बाद दूसरे स्थान पर है, भारत में भी इसका बहुत प्रयोग हो रहा है।

कॉन्फ्रेंस में कई चिकित्सकों ने अपने-अपने शोध पत्र प्रस्तुत करते हुए जानकारियां साझा कीं। इस मौके पर इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ होम्योपैथिक फिजीशियन के मानद अध्यक्ष पद्मश्री डॉ वीके गुप्ता, राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ एमए राव, वाइस प्रेसिडेंट डॉ मोहंती, सचिव डॉ रविंद्र कोचर, हरियाणा शाखा के अध्यक्ष डॉ विनोद सांगवान, हरियाणा होम्योपैथिक काउंसिल के चेयरमैन डॉ हर प्रकाश शर्मा, केंद्र सरकार के आयुष विभाग में सलाहकार डॉ संगीता दुग्गल, राष्ट्रीय होम्योपैथिक अनुसंधान केंद्र के महानिदेशक डॉ सुभाष कौशिक, डॉ जी श्रीनिवासन, डॉ वीएस चंदौक, डॉ एसवीएन बख्‍शी, आईआईएचपी हरियाणा के उप प्रधान डॉ राजेश कुमार सहित अनेक चिकित्सक उपस्थित रहे।