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जानिये, वृद्धावस्‍था की किस परेशानी में अपनाएं, कौन सी होम्‍योपैथिक दवाएं

-विश्‍व वृद्धजन दिवस (1 अक्‍टूबर) पर विशेष लेख

लेखक- प्रो डॉ राजेंद्र सिंह, एमडी (होम्योपैथी), पीएचडी (जनस्वास्थ्य)

“वृद्धावस्था कोई रोग नही है, यह जीवन की सच्चाई है”, श्रीमद्भागवत गीता में कहा भी गया है-  जन्ममृत्युजराव्याधि दुःखदोष अनुदर्शनम् ॥ 13-8॥ 

देश में बुजुर्गों की जनसंख्या वर्ष 1961 से लगातार बढ़ रही है और 2021 में यह 13.8 करोड़ पर पहुंच गई है I बुजुर्गों की संख्या में बढ़ोतरी का एक मुख्य कारण मृत्य दर में कमी आना है I नेशनल स्टैटिक्स ऑफिस(NSO) की एक स्टडी में यह बात सामने आई है I इस स्टडी में यह भी पाया गया है कि पिछले दो दशकों (2021 तक) में वृद्ध पुरुषों की संख्या महिलाओं से अधिक रही है, लेकिन यह अनुमान लगाया गया है कि 2031 में बुजुर्ग महिलाओं की संख्या बुजुर्ग पुरुषों से अधिक होगी। वर्तमान समय में भारत में कुल जनसंख्या का 10.3 प्रतिशत बुजुर्ग हैं, जिन्हें स्वास्थ्य के सभी क्षेत्रों में किसी न किसी प्रकार की शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और आर्थिक समस्याओं से जूझना पड़ता है।  यदि हम भौतिक और मनोवैज्ञानिक क्षेत्र को देखें, तो हमारे पास भारत में किए गए पिछले अध्ययनों के निम्नलिखित आंकड़े हैं- 3.7 मिलियन वृद्ध डिमेंशिया से पीड़ित हैं, 40 लाख  दृष्टि दोषों से पीड़ित हैं,  1.6 मिलियन वार्षिक स्ट्रोक के मामले, 3 में से 1 गठिया से पीड़ित, 3 में से 1 को उच्च रक्तचाप है, 5 में से 1 को मधुमेह है, 5 में से 1 को श्रवण संबंधी समस्याएं हैं, 4 में से 1 अवसादग्रस्त है, 10 में से 1 गिरता है और फ्रैक्चर होता है, आंत्र विकार में कैंसर 10 गुना अधिक आम है।

भारत में वृद्ध लोगों के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य देखभाल कार्यक्रम

वृद्ध व्यक्तियों पर राष्ट्रीय नीति की घोषणा जनवरी 1999 में वृद्ध लोगों के कल्याण की पुष्टि करने के लिए की गई थी I वरिष्ठ नागरिकों पर राष्ट्रीय नीति जो 30 मार्च, 2011 से तैयार है, क्रियान्वयन चरण में है।  मंत्रालय ने वर्ष 2010 से 2011 तक बुजुर्गों के स्वास्थ्य देखभाल के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम (एनपीएचसीई) को लागू किया।

एनपीएचसीई निम्नलिखित उद्देश्यों के साथ मंत्रालय में गैर-संचारी प्रभाग का एक हिस्सा है-

देश के स्वास्थ्य देखभाल वितरण प्रणाली के विभिन्न स्तरों पर बुजुर्गों को निवारक, उपचारात्मक और पुनर्वास सेवाएं प्रदान करना, रेफरल सिस्टम को मजबूत करने के लिए, विशेष कार्यबल विकसित करने के लिए, वृद्धावस्था के रोगों के क्षेत्र में अनुसंधान को बढ़ावा देना।

भारत में विभिन्न शारीरिक, मनोसामाजिक, आर्थिक और आध्यात्मिक समस्याओं वाले लगभग 120 मिलियन बुजुर्ग हैं।  जबकि कार्यात्मक और संज्ञानात्मक रूप से फिट सरकार द्वारा प्रदान की जाने वाली सामान्य स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं तक पहुंच सकते हैं, इन लोगों को स्वतंत्र रखने के लिए, सक्रिय उम्र बढ़ाने की आवश्यकता है।  स्वास्थ्य मंत्रालय ने अधिकांश राज्यों में जराचिकित्सा केंद्र और जराचिकित्सा क्लीनिक बनाए हैंI 

वृद्धों के लिए होम्योपैथी फायदेमंद है क्योंकि होम्योपैथी में मरीजों का समग्र रूप से इलाज किया जाता है, और दवाओं को बीमारी के बजाय प्रत्येक व्यक्ति के लिए अनुकूलित किया जाता है।  होम्योपैथी एक चिकित्सा प्रणाली है जो सुरक्षित, कुशल और व्यापक रूप से अनुभवजन्य है।

वृद्धावस्था के रोगों में होम्योपैथी-

वैसे तो वृद्धावस्था को कोई टाल नही सकता परन्तु वृद्धावस्था में होने वाली कई समस्याओं का निराकरण होम्योपैथिक औषधियों से किया जा सकता है, क्योकि होम्योपैथिक लक्षण आधारित समग्र चिकित्सा पद्धति है।

विटामिन सी और ई ये उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को रोकते है और इन्हे प्राकृतिक स्त्रोंतों से प्राप्त किया जाना चाहिये l पोष्टिक तत्व बी -12,  लौह, फोलिक एसिड और तॉबा जैसे खनिज त्वचा की कोशिकाओं में रक्त आपूर्ति के लिये आवश्यक ता  होती है I इनके प्राप्त होने के स्त्रोंत सब्जिया, अनाज, मटर, दूध, मेवे, फलियां आदि  हैं।

समय से पहले बुढ़ापा (ब्यूफो) :- समय से पहले बुढ़ापा, एंटी एजिंग मेडिसन 

वृद्धजनों के जल्दी थकने पर (हाईड्रेस्टिस) :- वयोवृद्ध जो सरलतापूर्वक थक जाने वाले लोग, क्षीणकाय एंव दुर्बल व्यक्तियों के लिए हाईड्रेस्टिस विशेष रूप से लाभदायी है।

जीवनी शक्ति को प्रबल एवं मानसिक शारीरिक विकास के लिए  (एक्स रे) :-

यह शारीरिक व मानसिक शक्ति को बढ़ाती है और जीवनी शक्ति को बल प्रदान करती है। एक्‍स रे दवा में कोशिका चयापचय उत्तेजित करने का गुण है मन तथा शरीर की प्रतिक्रियात्मक जैविक शक्ति को जागृत करती है दबे हुऐ लक्षणों को भीतर से बाहर लाती है विशेष रूप से उन लक्षणों को जो प्रमेह विष जनित तथा मिश्र संक्रमणों से उत्पन्न होते हैं।

जिनसेंग-

जिनसेंग को एरेलिया क्वीनकिफोलिया नाम से जाना जाता है। इसे चमत्कारी जड़ के रूप में मान्यता मिली है कहते हैं इसका प्रतिदिन सेवन करने पर बुढ़ापा बहुत देर से आता है । हाथ सदा ठण्डा रहे कम्पन्न सुन्न अंगुलियां सफेद, कम उम्र में बुढ़ापे के लक्षण जिनसेंग की प्रधान क्रिया स्थल रीढ़ की मज्जा का निम्नांश है शरीर के नीचे का भाग वात से सुन्न हो जाता है पैर के तलवे सुन्न हो जाते हैं व अंगूठे में तेज दर्द रहता है।

वृद्धावस्था में कैल्केरिया कार्ब का प्रयोग बार-बार न करे :-

वृद्धावस्था में कैल्केरिया कार्ब दवा का उपयोग बार-बार अधिक दिनों तक नहीं करना चाहिये। 

वृद्धावस्था की शिकायतों की महत्वपूर्ण दवा (कैल्केरिया फ्लोर)

वृद्धावस्था में चमड़ी में झुर्रियां, बालों का झड़ना, आंखों की दृष्टि का घटते जाना, सुनने की क्षमता कम होना, दांतों की दतंवेष्ट का कमजोर होना आदि शिकायतों पर बायोकेमिक औषधि कैल्केरिया फलोर का प्रयोग किया जाता है। चूंकि इस दवा के प्रयोग से वृद्धावस्‍था की कई शिकायतों का हल हो जाता है परन्तु इसके लम्बे समय तक प्रयोग करने से पथरी की शिकायत होने की संभावना बढ़ जाती है अत: इस दवा का प्रयोग कम शक्ति में अधिक लम्बे समय तक नहीं करना चाहिये इसकी होम्योपैथिक 30 शक्ति का प्रयोग कुछ समय छोड़-छोड़ कर लम्बे अंतराल से करना उचित है।

वृद्धावस्था में अब्सेन्ट माइन्ड की दशा में (कोनियम, लाईकोपोडियम, अमोनियम कार्ब) :-

वृद्धावस्था में अब्सेन्ट माइन्ड की दशा में कोनियम, लाईकोपोडियम, अमोनियम कार्ब उपयोगी है। 

वृद्धावस्था में बच्चों जैसा व्यवहार करना (बैराईटा कार्ब) :-

यदि वृद्धावस्था में बच्चों जैसा व्यवहार करने लगे तो बैराईटा कार्ब का प्रयोग करना चाहिये ।

सुनाई देने में परेशानी कम सुनाई देना-

वृद्धावस्था में यदि सुनाई देने में दिक्कत आ रही हो तो साईक्यूटा, मैगकार्ब, पेट्रोलियम, बैराईटाकार्ब, फासफोरस दवाओं का उपयोग करना चाहिये।

आत्मविश्वास की कमी (एनाकार्डियम)-

अपने आप से आत्मविश्वास की कमी व दूसरों में विश्वास का अभाव आंख, नाक, कान आदि अंगों की शक्ति का नाश, कमी रोगी का संदेहशील होना, पेट खाली-खाली लगना आदि परेशानि‍यों में एनाकार्डियम 200 या 1एम में देना चाहिये।

अधिक कार्य करते-करते वृद्धावस्था की कमजोरी हड्डियां कमजोर (एम्ब्रा ग्रेसिया) –

जो लोग अधिक काम करते करते या वृद्धावस्था के कारण कमजोर हो जाते है शक्तिहीन हड्डियाँ शिथिल हो जाना, नींद न आती हो, इन लक्षणों पर यह औषधि जीवनदायनी महान औषधि है इस दवा की 3-एक्स दिन में तीन बार कुछ दिनों तक देते रहना चाहिये।

मानसिक थकान, सोचने समझने की शक्ति का ह्रास, भूलने की आदत (अश्वगंधा क्यू) – मानसिक थकान सोचने समक्षने की शक्ति का ह्रास भूलने की आदत, यह वृद्धों के लिए ही नहीं बल्कि किसी भी कमजोर व्यक्ति में आदत हो उसे अश्वगंधा मूल अर्क में दिन में तीन बार देना चाहिये।

स्मरण शक्ति की कमी मानसिक कमजोरी,अनिद्रा थकान (काली फॉस 6 एक्स)-

स्मरण शक्ति की कमी, स्नायविक शक्ति का सर्वथा अभाव, मानसिक कमजोरी, अनिद्रा, थकानआदि में यह काफी उपयोगी दवा है ।

बुढ़ापे में धीमी और कमजोर नाड़ी (जेल्सीमियम 30)-

यदि बुढ़ापे में धीमी और कमजोर नाड़ी हो तो  जेल्सीमियम 30 दवा का प्रयोग किया जा सकता है ।

वृद्धावस्था में झुककर चलने पर (मेजोरियम 30)-

वृद्धावस्था में जब एकाएक झुककर चलने लगे या झुक कर चलने को बाध्य हो तो ऐसी स्थिति में उसे मेजोरियम 30 पोटेंशी में देना चाहिये

वृद्धावस्था में लोकोमोटर एटेक्सिया पैर में कमजोरी पक्षाघात पैर (एल्युमिना 30)-

वृद्धावस्था में लोकोमोटर एटेक्सिया, पैर में कमजोरी पक्षाघात पैर से ऊपर चढ़ने जैसा चलने पर तलवा गद्देदार लगे एल्युमिना 30 या 200 l 

वृद्धावस्था में शरीर सूखता जाये एवं हृदय कांपता हो (आयोडियम 30)-

वृद्धावस्था में शरीर सूखता जाता है हृदय कांपता हो एवं अत्याधिक भूंख लगती हो तो आयोडियम 30 दिन में तीन बार प्रयोग करना चाहिये ।

बुढ़ापे की अनेक शिकायतें (काली कार्ब)- डिप्रेशन, कमजोरी, अनिद्रा, ठंड का सहन न होना, जीवन शक्ति का घटते जाना,  ऋतु परिवर्तन के समय शरीर अस्वस्थ हो जाना आदि शिकायतों पर काली कार्ब 30 में दिन में तीन बार प्रयोग करना चाहियेI

शारीरिक क्षीणता बढ़ती जाने पर (लाइकोपोडियम) :-

वृद्धावस्था में जब शारीरिक क्षीणता बढ़ती जाये तो ऐसी स्थिति में लाईकोपोडियम 30 शक्ति में देना चाहिये।

(लेखक चंदेश्‍वर आजमगढ़ स्थित राजकीय श्रीदुर्गाजी होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के प्रधानाचार्य व सामुदायिक चिकित्सा विभाग के हेड हैं।)

नोट- दवाओं के इस्‍तेमाल से पूर्व अपने चिकित्‍सक से सलाह ले लें तो बेहतर रहेगा

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