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केजीएमयू के पैरामेडिकोज को बताया गया आजादी के दीवानों का इतिहास

काकोरी में खजाना तो लूटा लेकिन अपने ऊपर एक पैसा खर्च नहीं किया चंद्रशेखर ने

लखनऊ। ऐसे थे हमारे देश के महान सपूत चंद्रशेखर, जिन्‍होंने अंग्रेजों के खिलाफ क्रांति के दौरान काकोरी में रेलगाड़ी से खजाना तो लूटा लेकिन लूटे गये धन से एक पैसा भी अपने व्‍यक्तिगत जीवन में खर्च नहीं किया। इस पैसे को लूटने का उद्देश्‍य भारत माता को आजाद कराना था।

यह बात किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के प्रभारी ट्रॉमा सर्जरी डॉ समीर मिश्र ने आजाद भारत में आज की पीढ़ी के छात्र-छात्राओं को अपने गौरवशाली इतिहास से रूबरू कराने के लिए आयोजित कार्यक्रम में मुख्‍य वक्‍ता के रूप में कही। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ पैरामेडिकल साइंसेज द्वारा क्रांति दिवस समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें स्वतंत्र भारत में क्रांतिकारियों की भूमिका विषय पर छात्र-छात्राओं ने अपने मौलिक विचार प्रस्तुत किए तथा कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं प्रभारी ट्रॉमा सर्जरी डॉ समीर मिश्रा द्वारा क्रांतिकारियों के जीवन पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए छात्र-छात्राओं को अपने चरित्र को सुंदर बनाये रखने की प्रेरणा दी।

 

डॉ समीर मिश्रा ने काकोरी काण्ड में क्रांतिकारियों की सक्रिय भूमिका की जानकारी देते हुए कहा कि यह अंग्रेजों के प्रति अपना रोष प्रकट करने का एक माध्यम था तथा क्रांतिकारियों ने काकोरी काण्ड में लूटी गई रकम में से एक पाई भी अपने व्यक्तिगत जीवन में व्यय नहीं की। यह उनका राष्ट्र के प्रति सच्ची निष्ठा एवं प्रेम था। अपने व्यक्तिगत किस्‍सों को साझा करते हुए डॉ समीर ने बताया कि काकोरी काण्ड के पश्चात स्वतंत्रता संग्राम सेनानी शहीद चंद्रशेखर आजाद और उनके साथी छिप कर इधर-उधर रह रहे थे। इसी दौरान उनके (डॉ समीर के) ताऊ अपनी मां यानी डॉ समीर की दादी से चंद्रशेखर और उनके साथियों के लिए खाना बनवाकर ले गये थे जिसे चंद्रशेखर और साथियों ने खाया।

डॉ समीर ने बताया कि इस बात का जिक्र बाद में जब चंद्रशेखर आजाद शहीद हो गये तब ताऊजी ने दादी से किया, तो दादी के मुंह से तुरंत ही यह निकला कि …हम तो लरकन की सेवा भी नहीं कर पाये… साथ ही उन्‍हें गर्व था देश के सपूत पर जिसने स्‍वार्थ को दूर रख देश की खातिर अपने प्राणों की आहूति दे दी और ऐसे महान सपूत के लिए वह कुछ कर पायीं। इस घटना का उदाहरण देते हुए उन्होंने छात्र-छात्राओं को यह समझाने का प्रयास किया कि यदि हम महान कार्य करते हैं तो हमारे सानिध्य में आने वाला व्यक्ति भी गौरवान्वित महसूस करता है।

कार्यक्रम में अधिष्ठाता, पैरामेडिकल साइंसेस डॉ विनोद जैन ने स्वदेश प्रेम का अर्थ एवं उसके महत्व को समझाते हुए बताया कि क्रांति का अर्थ परिवर्तन होता है, चाहे वह हरित क्रांति हो, श्वेत क्रांति अथवा आजादी के लिए लड़ी गई लड़ाई हो। उन्होंने बताया कि व्यवस्था परिवर्तन में इच्छा एवं उस पर सकारात्मक क्रियान्वन ही क्रांति ला सकता है। उन्होंने छात्र-छात्राओं का आह्वान करते हुए कहा कि जिस प्रकार राष्ट्र को गुलामी से मुक्त कराने में क्रांतिकारियों का योगदान रहा। उसी प्रकार से छात्र-छात्राओं को किसी भी सामाजिक कुरीति को दूर कर समाज में बदलाव लाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए। इस अवसर पर अपने स्वागत संबोधन में सहायक अधिष्ठाता, पैरामेडिकल साइंसेस डॉ अतिन सिंघई ने राष्ट्रहित से जुड़े कार्य करने का संदेश दिया।

इस कार्यक्रम में अधिष्ठाता, छात्र कल्याण डॉ जीपी सिंह ने अपने संबोधन में छात्र-छात्राओं से आह्वान किया कि वह अपने जीवन का बहुमूल्य समय समाजोपयोगी में लगाएं। कार्यक्रम में पीपीटी के माध्यम से आशीष चतुर्वेदी, शिवानी वर्मा एवं मो उबैद ने प्रस्तुतिकरण दिया, जिन्हें कार्यक्रम के अंत में प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संयोजन एवं कुशल संचालन दुर्गा गिरि द्वारा किया गया।

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