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कल्‍याण सिंह कैंसर इंस्‍टीट्यूट यूपी का पहला चिकित्‍सा संस्‍थान, जहां बौद्धिक सम्‍पदा अधिकार नीति लागू

-अनुसंधान समिति की प्रथम बैठक में 20 इंट्रामुरल प्रोजेक्‍ट्स प्रस्‍तुत किये गये

सेहत टाइम्‍स

लखनऊ। कल्‍याण सिंह सुपर स्‍पेशियलिटी कैंसर इंस्‍टीट्यूट (केएसएसएससीआई) उत्‍तर प्रदेश के ऐसा पहला चिकित्‍सा संस्‍थान बन गया है जिसकी अपनी बौद्धिक संपदा अधिकार नीति 2022 (इंटेलेक्चुल प्रॉपर्टी राइट 2022) लागू हो चुकी है। अपनी अनुसंधान नीति के अनुसार ऑन्कोलॉजी के क्षेत्र में अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए अनसंधान समिति की पहली बैठक आज 24 जनवरी को आयोजित की गयी। निदेशक डॉ आरके धीमन की अध्‍यक्षता में हुई बैठक में 20 इंट्रामुरल प्रोजेक्‍ट्स प्रस्‍तुत किये गये।

यह जानकारी देते हुए संस्थान के रिसर्च प्रभारी डॉ शरद सिंह ने बताया की यह नीति नवोन्मेषी अवधारणाओं में शामिल नवोन्मेषकों/अन्वेषकों और शोधकर्ताओं के अधिकारों को निश्चित रूप से संरक्षित करेगी और प्रेरित भी करेगी। ज्ञात हो इस नीति के लागू होने से रिसर्च को लेकर भविष्‍य में रॉयल्‍टी, नाम जैसे क्रेडिट लेने की पात्रता तय करने में किसी प्रकार की दिक्‍कत नहीं होती है। सब कुछ पहले से ही दस्‍तावेज का हिस्‍सा बन जाता है।

आज की बैठक की जानकारी देते हुए डॉ शरद ने बताया कि आज आयोजित अनुसंधान समिति की पहली बैठक में संस्थान के विभिन्न विभागों के प्रधान अन्वेषकों ने अपने इंट्रामुरल प्रोजेक्ट प्रस्तुत किए। इस प्रकार कुल 20 इंट्रामुरल प्रोजेक्ट प्रस्तुत किए गए, जोकि ऑन्कोलॉजी के क्षेत्र में एक नया आयाम दे सकते हैं तथा जिसका लाभ विभिन्न तरह के कैंसर रोगियों के सफल इलाज एवं उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए किया जा सकता है।

इसी समिति ने संस्थान में चल रही डीएचआर-आईसीएमआर द्वारा पोषित लगभग डेढ़ करोड़ की 2 परियोजनायों की प्रगति की भी समीक्षा की एवं एक नई मल्टी-सेंट्रिक वित्त पोषित परियोजना इंटरनेशनल गायनेकोलॉजिकल सोसाइटी (IGCS) और कोलकाता गायनोकोलॉजिकल ऑन्कोलॉजी ट्रायल्स एंड ट्रांसलेशनल रिसर्च ग्रुप (KOLGOTRG) द्वारा निम्न और मध्यम आय वाले देशों की सर्वाइकल कैंसर से पीड़ित महिलाओं के जीवन की गुणवत्ता में सुधार एवं मृत्‍यु दर कम करने के लिए भी समीक्षा की गई।

इस अवसर पर संस्थान के निदेशक द्वारा केएसएसएससीआई की बौद्धिक संपदा अधिकार नीति 2022  के लिए एक पुस्तक का विमोचन किया गया, जबकि अबतक उत्तर प्रदेश राज्य के किसी भी प्रमुख चिकित्सा संस्थान में इस प्रकार की नीति उपलब्ध नहीं है, जिसमें वैश्विक अभ्यास के अनुसार शिक्षण, प्रशिक्षण और अनुसंधान के बुनियादी तीन घटकों को विभिन्न प्रतिशतों में परिभाषित किया गया है, जो किसी भी संस्थान के लिए बहुत उपयोगी सिद्ध होगा। यह नीति निश्चय ही अन्वेषकों एवं शोधकर्ताओं के अधिकारों को संरक्षित एवं प्रेरित भी करेगी। अनुसंधान समिति की बैठक में KSSSCI की समिति के बाहरी और आंतरिक सदस्यों ने भाग लिया।

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