
लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में मेडिसिन विभाग द्वारा भाटिया–मिश्रा स्मृति व्याख्यान का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। इस शैक्षणिक कार्यक्रम में प्रतिष्ठित शिक्षाविदों, संकाय सदस्यों, रेज़िडेंट चिकित्सकों तथा विद्यार्थियों ने भाग लिया और एक अत्यंत ज्ञानवर्धक अकादमिक सत्र का लाभ प्राप्त किया।
स्मृति व्याख्यान डॉ. मोने ज़ैदी द्वारा प्रस्तुत किया गया। ज्ञात हो कि डॉ. मोने ज़ैदी एक विख्यात चिकित्सक-वैज्ञानिक हैं, जिन्होंने भारत के किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज से चिकित्सा शिक्षा प्राप्त की तथा लंदन स्थित हैमरस्मिथ चिकित्सालय में प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसके पश्चात उन्होंने लंदन विश्वविद्यालय से डॉक्टर ऑफ दर्शनशास्त्र तथा डॉक्टर ऑफ चिकित्सा की उपाधियाँ अर्जित कीं। आगे चलकर उन्होंने विभिन्न संस्थानों में संकाय पदों पर कार्य किया और बाद में माउंट सीनाई में औषधि विज्ञान के प्राध्यापक के रूप में कार्यभार संभाला, जहाँ उन्होंने अस्थि अनुसंधान कार्यक्रम की स्थापना की।
उनके महत्वपूर्ण शोध में पीयूष ग्रंथि-अस्थि अक्ष की अवधारणा को स्थापित किया गया तथा यह दर्शाया गया कि फॉलिकल-उत्तेजक हार्मोन को अवरुद्ध करने से अस्थि द्रव्यमान में वृद्धि हो सकती है, शरीर की चर्बी कम हो सकती है और तंत्रिका-अपक्षयी प्रक्रियाओं से सुरक्षा मिल सकती है।
उन्होंने “अस्थि क्षय, स्थूलता तथा अल्ज़ाइमर रोग के उपचार के लिए फॉलिकल-उत्तेजक हार्मोन अवरोधक औषधि” विषय पर अत्यंत प्रेरक व्याख्यान प्रस्तुत किया। अपने व्याख्यान में डॉ. ज़ैदी ने प्रजनन क्रिया से परे फॉलिकल-उत्तेजक हार्मोन की भूमिका से संबंधित उभरते वैज्ञानिक प्रमाणों को रेखांकित किया तथा अस्थि क्षय, चयापचय संबंधी विकारों और तंत्रिका-अपक्षयी रोगों के उपचार में इस हार्मोन को अवरुद्ध करने की संभावित उपचारात्मक रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा की।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कई प्रतिष्ठित सेवानिवृत्त संकाय सदस्य—डॉ. सी. जी. अग्रवाल, डॉ. एस. के. दास, डॉ. ए. के. त्रिपाठी तथा डॉ. अशोक चन्द्र—की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिससे कार्यक्रम की शोभा और बढ़ गई।
कार्यक्रम में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. ओझा, पैरामेडिकल विज्ञान के अधिष्ठाता डॉ. के. के. सिंह तथा शैक्षणिक अधिष्ठाता एवं मेडिसिन विभागाध्यक्ष प्रोफेसर वीरेन्द्र आतम की उपस्थिति से आयोजन और भी गरिमामय हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रोफेसर वीरेन्द्र आतम के स्वागत संबोधन से हुआ, जिसके पश्चात वक्ता का संक्षिप्त परिचय प्रोफेसर कौसर उस्मान द्वारा प्रस्तुत किया गया। सत्र का संचालन डॉ. मेधावी गौतम ने किया।
कार्यक्रम के दौरान प्रोफेसर के. के. सावलानी ने भाटिया–मिश्रा स्मृति व्याख्यान के इतिहास और महत्व पर प्रकाश डालते हुए इसकी उस समृद्ध परंपरा को रेखांकित किया जो शैक्षणिक उत्कृष्टता को प्रोत्साहित करती रही है।
स्मृति व्याख्यान के पश्चात जी. एस. टंडन सम्मान की घोषणा प्रोफेसर एस. सी. चौधरी द्वारा की गई। इस सम्मान का परिचय डॉ. संजय टंडन तथा डॉ. सलिल टंडन ने दिया, जिन्हें उनके दिवंगत पिता प्रोफेसर जी. एस. टंडन की शैक्षणिक विरासत के सम्मान में स्थापित किया गया है।
इस कार्यक्रम में लगभग 150 प्रतिभागियों—जिनमें विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के संकाय सदस्य, रेज़िडेंट चिकित्सक तथा एमबीबीएस विद्यार्थी शामिल थे—ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जो इस विषय के प्रति गहरी शैक्षणिक रुचि को दर्शाता है।
कार्यक्रम का समापन डॉ. दीपक भगचंदानी द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसके साथ यह आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

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