-कर्मचारियों ने मुख्य चिकित्सा अधीक्षक पर लगाया मनमानी करने का आरोप
-राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के नेतृत्व में लोहिया कर्मचारी अस्तित्व बचाओ मोर्चा

सेहत टाइम्स ब्यूरो
लखनऊ। डॉ राम मनोहर लोहिया संस्थान में पूर्व में लोहिया अस्पताल के समय से कार्यरत कर्मचारियों को बीती 1 जून को अचानक संस्थान से हटाये जाने के विरोध में राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के नेतृत्व में लोहिया कर्मचारी अस्तित्व बचाओ मोर्चा के कर्मचारी निदेशक और मुख्य चिकित्सा अधीक्षक का घेराव करेंगे।


मोर्चा के उपाध्यक्ष अनिल कुमार ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि डॉ राम मनोहर लोहिया संयुक्त चिकित्सालय में विलय से पहले कार्यरत कर्मचारियों, जिनकी प्रतिनियुक्ति पर तैनाती इसलिए नहीं हो पाई थी कि संस्थान की गलती के कारण उन कर्मचारियों के पे बैंड या तो गलत हो गए थे या उनकी शैक्षिक योग्यता गलत बताई गई थी, उनको शासन द्वारा संबद्ध कर दिया गया था। अनिल कुमार ने बताया कि इस संबंध में 4 अक्टूबर 2019 को प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा रजनीश दुबे के कक्ष में तत्कालीन प्रमुख सचिव स्वास्थ्य प्रशान्त त्रिवेदी, तत्कालीन स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ पदमाकर सिंह, तत्कालीन महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ के के गुप्ता, तत्कालीन निदेशक राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान डॉ ए के त्रिपाठी, तत्कालीन निदेशक राम मनोहर लोहिया संयुक्त चिकित्सालय डॉ डी एस नेगी, रजिस्टार मेडिकल कॉलेज, राष्ट्रीय अध्यक्ष इप्सेफ वी पी मिश्रा, राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के महामंत्री अतुल मिश्रा व लोहिया कर्मचारी अस्तित्व बचाओ मोर्चा के पदाधिकारियों के साथ समझौता हुआ था कि अतिशीघ्र प्रतिनियुक्ति से बाकी रह गये कर्मचारियों को, जो कमियां हैं उनको दूर कराकर प्रतिनियुक्ति पर ले लिया जाएगा, का निर्देश निदेशक डॉ राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान को दिया गया था, जिसका अनुपालन भी किया गया।
अनिल चौधरी का कहना है कि इसके बावजूद अब संस्थान के सी एम एस द्वारा द्वेषवश नयी निदेशक को भ्रमित कर आदेश पारित किया गया है। उन्होंने कहा कि सीएमएस का यह कदम कर्मचारियों को आंदोलन करने पर विवश कर रहा है। उन्होंने कहा कि इस के संबंध में वर्ष 2019 वर्ष 2020 वर्ष 2021 में लगातार पत्र शासन को प्रेषित किए गए हैं, कोरोना काल होने के कारण शासन में कोई निर्णय नहीं हो पाया। शासन के निर्णय का इंतजार किए बिना किसी आदेश के तानाशाही रवैया को अपनाते हुए महानिदेशक स्वास्थ्य के पत्र का उल्लेख करते हुए कार्य मुक्त कर दिया जाना कतई स्वीकार नहीं है, जबकि महानिदेशक का पत्र सिर्फ सूचना से संबंधित था कि कुल कितने कर्मचारी संस्थान में संबद्ध हैं। गलत आदेश को निरस्त करने का आदेश अब तक नहीं हुआ है। इसीलिए कर्मचारी घेराव करने को मजबूर हैं। अनिल चौधरी ने बताया कि इस घेराव कार्यक्रम में राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के महामंत्री अतुल मिश्रा स्वयं भी मौजूद रहेंगे साथ ही परिषद के अन्य सदस्य भी शामिल होंगे।
