-चिकित्सकों, नर्सों एवं पैरामेडिकल स्टाफ को कार्यशालाओं में किया जायेगा अपडेट
-लखनऊ सहित उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, उड़ीसा के 29 जिलों में लॉन्चिंग
सेहत टाइम्स
लखनऊ। देश के चार राज्यों उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, उड़ीसा में निजी स्वास्थ्य सुविधाओं में प्रसव के दौरान देखभाल को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से देश की 43 हजार से ज्यादा गायनेकोलोजिस्ट्स वाली सबसे बड़ी संस्था फेडरेशन ऑफ ऑब्स्टेट्रिक एण्ड गायनेकोलोजिकल सोसाइटीज़ ऑफ इंडिया (FOGSI) ने प्रोजेक्ट अधुना (Advancing Delivery of Healthcare through Upgraded Newborn and Intrapartum Care Approaches) लॉन्च किया है। इसके तहत मातृ एवं नवजात शिशु देखभाल के लिए साक्ष्य आधारित दृष्टिकोण के साथ चिकित्सा प्रथाओं को मजबूत बनाने के उद्देश्य से प्रोजेक्ट अधुना इन राज्यों के 29 चुनिंदा ज़िलों में स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देगा। इन्हीं 29 जिलों में एक उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में अधुना की आज 5 अप्रैल को लॉन्चिंग की गयी।
फॉग्सी की लखनऊ इकाई लॉग्स की अध्यक्ष डॉ प्रीती कुमार बताती हैं कि इस पहल के तहत FOGSI ने सीपीडी सत्रों (Continuing Professional Development (CPD)) के तहत वर्कशॉप्स की एक शृंखला शुरू की है, जिन्हें चिकित्सकगण/डॉक्टरों, नर्सों एवं पैरामेडिक्स स्टाफ के लिए डिज़ाइन किया गया है। ये सत्र निजी स्वास्थ्य सुविधाओं की विभिन्न ज़रूरतों को पूरा करने के लिए प्रशिक्षण प्रदान करते हैं, जिन्हें चिकित्सकीय सुविधाओं में तुरंत लागू किया जा सकता है। ये सीपीडी सत्र डॉक्टरों को मातृ एवं नवजात शिशु देखभाल के लिए नवीनतम नवाचारों, साक्ष्य-आधारित उपायों, कौशल और मुख्य क्षमताओं के बारे में जानकारी प्रदान करते हैं, ऐसे में यह स्वास्थ्यसेवाओं की सुलभता को बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।


लखनऊ में पहला सीपीडी सत्र यहां स्थित होटल क्लार्क्स अवध में आयोजित किया। प्रेसीडेट डॉ. प्रीती कुमार और सेक्रेटरी डॉ. सीमा मेहरोत्रा के मार्गदर्शन में आयोजित इस सत्र में शामिल 150 प्रतिभागियों को विभिन्न सत्रों के माध्यम से महत्वपूर्ण पहलुओं जैसे इंटरावीनस फेरिक कार्बोक्सीमाल्टोज़ (IV FCM) के इस्तेमाल से मातृ एनीमिया का प्रबन्धन, पोस्टपार्टम हेमरेज (PPH) के प्रबन्धन के लिए ई-मोटिव बंडल से साक्ष्य जुटाना तथा प्रसव के तीसरे चरण का सक्रिय प्रबन्धन शामिल था। इस अवसर पर महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य, स्तनपान और माताओं की सम्मानजनक देखभाल से जुड़ी अच्छी प्रथाओं पर स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के साथ चर्चा एवं विचार-विमर्श भी किया गया।

हीमोग्लोबीन बढ़ाने के लिए गोलियों से बेहतर है इंजेक्शन : डॉ एचपी पटनायक
उड़ीसा सरकार में सेक्रेटरी रह चुके कन्सल्टेंट गाइनीकोलॉजिस्ट डॉ एचपी पटनायक ने गर्भवती महिलाओं में एनीमिया यानी खून की कमी के बारे में अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि करीब 70 फीसदी महिलाओं में खून की कमी की शिकायत होती है। उन्होंने विस्तार से बताया कि गर्भावस्था में यदि हीमोग्लोबीन 11 ग्राम से कम है तो इसकी पूर्ति के लिए गोलियों से बेहतर इंजेक्शन है। उन्होंने कहा कि रक्ताल्पता की पूर्ति के लिए लम्बे समय गोलियां दी जा रही हैं, लेकिन ऐसे बहुत से कारण हैं, जो इन गोलियों से कामयाबी नहीं मिलती है। जबकि इंजेक्शन को एक बार ही लगवाने से पूरी प्रेगनेंसी में हीमोग्लोबीन का स्तर मेन्टेन रहता है।
