Thursday , December 2 2021

मुख्‍यमंत्री जी, एमपीडब्‍ल्‍यू प्रकरण पर आपका संज्ञान लेना आवश्‍यक

-एमपीडब्‍ल्‍यू संगठन के संरक्षक ने की मुख्‍यमंत्री योगी से अपील

-प्रशिक्षण पूरा होने से ग्रामीण क्षेत्रों का भी होगा भला : विनीत मिश्रा

-प्रशिक्षण की मांग को लेकर सत्‍याग्रह आंदोलन 10वें दिन भी जारी

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ। ग्रामीण क्षेत्रों में संक्रामक रोगों की रोकथाम करने वाले फ्रंटलाइन वर्कर संविदा एमपीडब्‍ल्‍यू एसोसिएशन के संरक्षक विनीत मिश्रा ने कहा है कि एमपीडब्‍ल्‍यू द्वारा अधूरे प्रशिक्षण को पूरा कराने की जायज मांग के प्रकरण पर सरकार के मुखिया मुख्यमंत्री योगी को संज्ञान लेना चाहिए जब तक उच्च स्तर से इसका संज्ञान नहीं लिया जाएगा तब तक ग्रामीण क्षेत्रों में आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं बहाल करा पाना मुश्किल होगा। मुख्यमंत्री से अपील करते हुए उन्‍होंने कहा कि जन स्वास्थ्य विषय पर निर्धारित हमारी प्रशिक्षण की मांग को स्वीकार कर अमित मोहन प्रसाद अपर मुख्य सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण को निर्देशित करने की कृपा करें।

एसोसिएशन के मीडिया प्रभारी सैयद मुर्तजा ने यह जानकारी देते हुए बताया कि एमपीडब्‍ल्‍यू द्वारा अपने अधूरे प्रशिक्षण को पूरा कराने की मांग को लेकर महानिदेशालय परिवार कल्याण परिसर में किया जा रहा अनिश्चितकालीन सत्याग्रह आंदोलन दसवें दिन भी जारी रहा।

विनीत मिश्र ने कहा कि अत्यंत खेद का विषय है कि MPW संविदा कर्मचारी अपने 1 वर्षीय प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए पिछले 7 वर्षों से प्रयास कर रहे हैं। भारत सरकार के अनुबंध (मेमोरेंडम) पर जिला स्वास्थ समिति के अधिकारियों ने संविदा MPW गाइडलाइन-2010 में  विहित एक वर्षीय प्रशिक्षण के प्रावधान के विपरीत मात्र 10 दिनों का प्रशिक्षण करा कर रख लिया गया था आज उन्हीं संविदा के पदों पर निर्धारित 1 वर्षीय प्रशिक्षण की बाध्यता के चलते प्रधानमंत्री मोदी की अति महत्वाकांक्षी योजना हेल्थ एंड वैलनेस उपकेंद्रों पर संविदा MPW की तैनाती पिछले 3 वर्षों से रुकी हुई है। ऐसा प्रतीत होता है कि केंद्र और राज्य सरकार की मंशा के विपरीत अधिकारीगण कार्य कर रहे हैं। जहां केंद्र और राज्य सरकार ग्रामीण स्वास्थ्य को दुरुस्त करना चाहती है वही अफसर ग्रामीण स्वास्थ्य को लेकर गंभीर नहीं हैं।

रायबरेली जनपद से संगठन पदाधिकारी देवेश ने बताया कि वायरस जनित संक्रमण को उपचार से ज्यादा रोकने की आवश्यकता होती है, सामान्य क्षेत्रों में प्रति 5000 की आबादी तथा दुरुह क्षेत्रों में प्रति 3000 की ग्रामीण आबादी पर संक्रमण को रोकने के लिए एक स्वास्थ्य कार्यकर्ता MPW पुरुष की तैनाती विभागीय शासनादेश 23 जुलाई 1981 के अनुसार प्राविधानित की गई है। आज प्रदेश की आबादी 23 करोड़ को पार कर रही है प्रदेश की इतनी बड़ी आबादी को संक्रामक रोगों से बचाव करने के लिए मात्र 9080 पद सृजित हैं जिसमें से अधिकांश पद पिछले 32 वर्षों से रिक्त पड़े हैं, यही नहीं भारत सरकार द्वारा वित्तीय सहायता प्राप्त हेल्थ एंड वैलनेस उप केंद्रों पर पिछले 3 वर्षों से सृजित ढाई हजार पद प्रशिक्षण के अभाव में रिक्त पड़े हैं। आज इतने बड़े प्रदेश में आबादी के अनुपात में विभागीय शासनादेश को देखते हुए लगभग 55000 MPW कार्यकर्ताओं की आवश्यकता है उनके स्थान पर मात्र 1500 MPW कार्य कर रहे हैं नियमित तथा संविदा के 10000 पद आज की तारीख में विभाग में रिक्त पड़े हैं इसी विभाग में जिला स्वास्थ्य समिति द्वारा मेरिट पर संविदा पर चयनित अनुभवी स्वास्थ्य कार्यकर्ता संविदा MPW अपने विभागीय प्रशिक्षण की मांग विभाग में कर रहे हैं।

विनीत मिश्रा ने बताया कि इतने बड़े प्रदेश में ग्रामीण क्षेत्रों में संक्रमण रोकने के लिए की जा रही लापरवाही का दोषी कौन है, विभाग “सब चलता है” की तर्ज पर कार्य कर रहा है। आंदोलन के आज 10 वें दिन भी विभाग और शासन संविदा MPW को प्रशिक्षण कराए जाने की मांग पर मौन धारण किए हुए है ऐसा करके शासन कौन सी जन-नीतियों का पालन कर रहा है।

संगठन संयोजक अखिलेश तिवारी ने बताया कि उच्च न्यायालय खंडपीठ लखनऊ में उत्तर प्रदेश बेसिक हेल्थ वर्कर्स एसोसिएशन द्वारा नियमित पदों को भरने के लिए वर्ष 2012 में डाली गई रिट याचिका में शासन के द्वारा दाखिल शपथ पत्र में कहा गया है कि प्रतिवर्ष नियमित पदों पर प्रशिक्षण देकर नियुक्तियां की जाएंगी। इसके बावजूद पिछले 9 वर्षों से एक भी व्यक्ति को प्रशिक्षण नहीं दिया गया, पिछले 32 वर्षों से प्रशिक्षण केंद्र निष्प्रयोज्य पड़े हैं।

संगठन प्रवक्ता शिवेंद्र मिश्रा ने बताया कि विभाग अपने ऐसे संविदा कर्मचारियों के विरुद्ध न्यायालय में लड़ाई लड़ रहा है जिन्होंने सरकार की नीतियों के अनुरूप विभाग में संक्रामक रोगों के नियंत्रण का कार्य किया है।

प्रांतीय संगठन पदाधिकारियों के साथ जनपद सीतापुर के संगठन जिला अध्यक्ष सचिन पटेल, औरैया से आकाश सहित प्रतापगढ़, कानपुर तथा लखनऊ के 25 MPW अनिश्चितकालीन सत्याग्रह आंदोलन में शामिल रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

15 + 2 =

Time limit is exhausted. Please reload the CAPTCHA.