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लैप्रोस्‍कोपिक सिस्‍टोगैस्‍ट्रोस्‍टोमी सर्जरी करने वाला पहला सरकारी अस्‍पताल बना बलरामपुर चिकित्‍सालय

-आयुष्‍मान भारत योजना के तहत पूरी तरह नि:शुल्‍क की गयी सर्जरी

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ। बलरामपुर अस्‍पताल में चिकित्‍सकों ने सफलतापूर्वक लैप्रोस्‍कोपिक सिस्‍टोगैस्‍ट्रोस्‍टोमी सर्जरी (Laparoscopic cystogastrostomy) को अंजाम दिया है। खास बात यह है कि यह सर्जरी आयुष्‍मान भारत के तहत की गयी है, जो कि पूरी तरह नि:शुल्‍क की गयी, साथ ही दूरबीन विधि से इस प्रकार की सर्जरी पहली बार आयुष्‍मान भारत योजना में व उत्‍तर प्रदेश के किसी सरकारी अस्‍पताल में की गयी है। चार घंटे चली इस सर्जरी में अत्‍याधुनिक उपकरण हार्मोनिक नाइफ का इस्‍तेमाल किया गया, इस उपकरण की खासियत यह है कि इससे चीरा लगाते समय रक्‍तस्राव नहीं होता है।

सर्जरी में शामिल रहे अस्‍पताल के निदेशक डॉ राजीव लोचन ने यह जानकारी देते हुए बताया कि बाराबंकी का रहने वाला 18 वर्षीय चमन को छह माह से पेट दर्द की शिकायत बनी हुई थी, तथा कोई चीज खा-पी नहीं पाता था। उल्‍टी हो जा रही थी, जांच से पता चला कि मरीज को पैंक्रिटाइसिटस बीमारी है। उन्‍होंने बताया कि इसका इलाज कई माह से चल रहा था, लेकिन भर्ती इसे बीते सोमवार को किया गया था।

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क्‍या होती है पैंक्रिटाइटिस

जांच में पैंक्रिटाइटिस की बीमारी थी, यह बीमारी चोट लगने से, ज्‍यादा शराब पीने से, पथरी आदि होने से हो जाती है। ज्‍यादा दिक्‍कत बढ़ने पर मवाद निकलता है, यह मवाद पेट के अंदर पैंक्रियाज और स्‍टमक के बीच जमा होता रहता है, और गोल सिस्‍ट बना देता है, जिसे मेडिकल टर्म में सूडो पैंक्रियाटिक सिस्‍ट यह पेट में कब्‍जा कर लेती है जिससे व्‍यक्ति न खा पाता है, न पी पाता है, पेट दर्द बना रहता है।

सर्जरी में किया गया हार्मोनिक नाइफ का प्रयोग

डॉ राजीव लोचन ने बताया कि सामान्‍यत: पूरा पेट खोल कर इसे ड्रेन किया जाता है, पेट में रास्‍ता बनाया जाता है इसे सिस्‍टोगैस्‍ट्रोस्‍टोमी कहते हैं, उन्‍होंने बताया कि हम लोगों ने इस युवक की सर्जरी बिना पेट खोले दूरबीन विधि से यानी लैप्रोस्‍कोपिक सिस्‍टोगैस्‍ट्रोस्‍टोमी सर्जरी की। उन्‍होंने बताया कि सर्जरी बहुत बड़ी थी इसलिए इसमें हार्मोनिक नाइफ का इस्‍तेमाल किया गया। उन्‍होंने बताया कि इस नाइफ की कीमत करीब 14 लाख रुपये है, लेकिन हम लोगों ने इसे किराये पर मंगाकर यह सर्जरी की।

 

उन्‍होंने बताया कि चार घंटे चली इस सर्जरी को जनरल एनेस्‍थीसिया में किया गया, सर्जरी करने वाले डॉक्‍टरों में डॉ विवेक सिंह, डॉ राजीव लोचन, एनेस्‍थीसिया के डॉ पीयूष व डॉ कौशल के साथ ही सिस्‍टर विनीता शामिल रहीं।