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2026 में विश्व के शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में छा गया एसजीपीजीआई

-निदेशक प्रो आरके धीमन सहित 18 प्रोफेसर व 2 पोस्ट डाक्टोरल फैलो शामिल

सेहत टाइम्स
लखनऊ। संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई), लखनऊ के निदेशक पद्मश्री प्रो आरके धीमन सहित संस्थान के 20 चिकित्सकों ने विश्व के शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों की प्रतिष्ठित सूची में नाम दर्ज कराया है। यह इस बात का प्रमाण है कि मरीजों को अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ चिकित्सा अनुसंधान के वैश्विक मानचित्र पर भी एसजीपीजीआई ने अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। ज्ञात हो अमेरिका के स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय से जारी इस प्रतिष्ठित वैश्विक सूची में विभिन्न वैज्ञानिक क्षेत्रों में उल्लेखनीय शोध योगदान देने वाले वैज्ञानिकों को शामिल किया जाता है। संस्थान की सूची में हेपेटोलॉजी, न्यूरोलॉजी, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, गैस्ट्रो सर्जरी, क्लिनिकल इम्यूनोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, क्रिटिकल केयर मेडिसिन, एंडोक्राइनोलॉजी, एंडोक्राइन सर्जरी, पेडियाट्रिक गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट तथा बायोस्टैटिस्टिक्स एवं हेल्थ इंफॉर्मेटिक्स जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के चिकित्सक-वैज्ञानिक शामिल हैं।

सूची में शामिल प्रमुख नामों में संस्थान के निदेशक एवं हेपेटोलॉजी के प्रो. आर.के. धीमन, प्रो. राकेश अग्रवाल और प्रो. उदय चंद्र घोषाल (गैस्ट्रोएंटरोलॉजी), स्वर्गीय प्रो. यू.के. मिश्रा और प्रो. जयंती कालिता (न्यूरोलॉजी), प्रो. गौरव अग्रवाल (एंडोक्राइन सर्जरी), उज्ज्वल पोद्दार और प्रो. अंशु श्रीवास्तव (पेडियाट्रिक गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट), रमा देवी मित्तल (मेडिकल जेनेटिक्स), प्रो. नारायण प्रसाद (नेफ्रोलॉजी), प्रो. मोहन गुर्जर (क्रिटिकल केयर मेडिसिन), प्रो.अमित गोयल और डॉ. अजय कुमार मिश्रा, (हीपैटोलॉजी), प्रो. प्रभाकर मिश्रा और डॉ. मोना पाठक (बायोस्टैटिस्टिक्स एवं हेल्थ इंफॉर्मेटिक्स), डॉ. रोहित सिन्हा (एंडोक्राइनोलॉजी), प्रो. स्वस्ति तिवारी (मॉलिक्यूलर मेडिसिन), डॉ. दुर्गा प्रसन्ना मिश्रा (क्लिनिकल इम्यूनोलॉजी), शामिल हैं। इस सूची में एंडोक्रिनोलॉजी विभाग की पोस्ट-डॉक्टरल फेलो डॉ. सना रज़ा और हेपेटोलॉजी विभाग की रिसर्च एसोसिएट डॉ. मनीषा दुबे भी शामिल हैं। इन चिकित्सक-वैज्ञानिकों के शोध कार्यों ने अपने-अपने क्षेत्रों में चिकित्सा ज्ञान को आगे बढ़ाने के साथ-साथ एसजीपीजीआई की अंतरराष्ट्रीय अकादमिक और शोध पहचान को भी मजबूत किया है।

प्रो धीमन ने कहा, संस्थान के लिए गौरव का क्षण

इस उपलब्धि पर एसजीपीजीआई के निदेशक प्रो. आर.के. धीमन ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे पूरे संस्थान के लिए गौरव का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि मरीजों की सेवा और उत्कृष्ट चिकित्सा सुविधाओं के लिए स्थापित पहचान के साथ अब एसजीपीजीआई वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय में भी अपनी मजबूत जगह बना रहा है। उन्होंने कहा, “एसजीपीजीआई उत्कृष्ट चिकित्सा सेवाओं के लिए देश और प्रदेश में ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व में अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। अब हमारे चिकित्सकों और वैज्ञानिकों ने उच्च गुणवत्ता वाले शोध के क्षेत्र में भी संस्थान को वैश्विक पहचान दिलाई है।” प्रो. धीमन ने कहा कि संस्थान के चिकित्सक लगातार गुणवत्तापूर्ण शोध कर रहे हैं और उनके शोध कार्यों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान तथा स्वीकार्यता मिल रही है।

उन्होंने कहा, “एक निदेशक के रूप में यह मेरे लिए अत्यंत गर्व और संतोष का विषय है कि हमारे संस्थान के 20 चिकित्सक-वैज्ञानिक दुनिया के शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में शामिल हुए हैं। यह उपलब्धि केवल इन वैज्ञानिकों की व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि पूरे एसजीपीजीआई की सामूहिक अकादमिक और शोध संस्कृति की सफलता है।” उन्होंने कहा कि संस्थान को इस उपलब्धि पर रुकना नहीं है। “हमें शोध की गुणवत्ता, नवाचार और वैश्विक प्रभाव को लगातार बेहतर करना होगा। हमारी कोशिश होनी चाहिए कि एसजीपीजीआई आने वाले वर्षों में चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में और भी ऊंचे वैश्विक मानक स्थापित करे।” प्रो. धीमान ने विशेष रूप से युवा चिकित्सकों और विद्यार्थियों का उल्लेख करते हुए कहा कि संस्थान के कुछ वैज्ञानिकों ने अपने अपेक्षाकृत छोटे अकादमिक करियर में ही वैश्विक स्तर पर पहचान बनाई है। उन्होंने इसे युवा शोधकर्ताओं के लिए बड़ी प्रेरणा बताया।

लखनऊ और उत्तर प्रदेश के लिए भी गौरव की उपलब्धि

यह उपलब्धि केवल एसजीपीजीआई के लिए ही नहीं, बल्कि लखनऊ और उत्तर प्रदेश की वैज्ञानिक एवं चिकित्सा पहचान के लिए भी महत्वपूर्ण है। यह उपलब्धि इस बात का भी प्रमाण है कि उत्तर प्रदेश में विश्वस्तरीय चिकित्सा अनुसंधान, नवाचार और वैज्ञानिक प्रतिभा को आगे बढ़ाने की मजबूत क्षमता मौजूद है। एसजीपीजीआई के चिकित्सक-वैज्ञानिकों की यह वैश्विक पहचान आने वाली पीढ़ी के शोधकर्ताओं को प्रेरित करने के साथ-साथ संस्थान की अकादमिक यात्रा को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का आधार भी बनेगी।