Wednesday , July 15 2026

एसजीपीजीआई के दीक्षांत समारोह में कड़क अभिभावक की तरह नजर आयीं राज्यपाल

-संस्थान की प्रगति के लिए पीठ थपथपायी, साथ ही खामियों को भी दूर करने को कहा

-मेडिकल प्रोफेशनल्स, रिसर्चर्स और स्टूडेंट्स को दिए गये 279 डिग्रियां और सम्मान

सेहत टाइम्स

लखनऊ। संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) लखनऊ की कुलाध्यक्ष व राज्यपाल आनंदी बेन पटेल संस्थान के 30वें दीक्षांत समारोह-2026 में दिये गये अपने सम्बोधन के दौरान घर के उस मुखिया की तरह नजर आयीं जो अच्छे काम के लिए जहां पीठ थपथपाता है, वहीं कमियों को भी साफगोई से उजागर करते हुए उन्हें दूर करने की सलाह देता है, क्योंकि यह उसका कर्तव्य है कि परिवार को सही रास्ता दिखाये। राज्यपाल ने संस्थान की प्रगति पर खुशी जतायी, 2017 से अब तक के बीच में आये हुए बदलावों को लेकर तारीफ भी की, लेकिन इसके साथ ही छोटी-बड़ी खामियों को लेकर भी खुलकर बोलते हुए कहा कि अपनी उपलब्धियों का जश्न मनाते हुए हमें अपनी कमियों को भी पहचानना चाहिए और सुधार के लिए लगातार प्रयास करना चाहिए। अलग-अलग कैटेगरी में पास होने वाले 279 स्टूडेंट्स को निदेशक प्रो आरके धीमन, रजिस्ट्रार कर्नल वरुण बाजपेयी तथा डीन प्रो शालीन कुमार ने डिग्रियां प्रदान कीं।

नहीं आ सके जेपी नड्डा और मयंकेश्वर शरण

एसजीपीजीआई के श्रुति ऑडीटोरियम में आयोजित समारोह में पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा को आना था, लेकिन किन्हीं कारणों से वे समारोह में नहीं पहुंचे इसी प्रकार विशिष्ट अतिथि प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा राज्यमंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह भी किन्हीं कारणोंवश समारोह में नहीं आ सके। समारोह की अध्यक्षता संस्थान की कुलाध्यक्ष राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने की, मंच पर यूपी के उप मुख्यमंत्री व चिकित्सा शिक्षा मंत्री ब्रजेश पाठक और चिकित्सा शिक्षा विभाग की सचिव व महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा और प्रशिक्षण नेहा शर्मा के साथ ही संस्थान के निदेशक प्रो आरके धीमन और डीन प्रो शालीन कुमार भी मंच पर मौजूद थे। इस मौके पर रजिस्ट्रार वरुण बाजपेई सहित संस्थान के फैकल्टी मेम्बर्स आदि उपस्थित रहे।

वैश्विक स्तर पर पहचान बना रहा संस्थान : राज्यपाल

राज्यपाल ने कहा कि 14 दिसंबर 1980 को स्थापित यह संस्थान चिकित्सा शिक्षा अनुसंधान एवं राष्ट्रीय उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में राष्ट्रीय नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बना रहा है। नेक द्वारा ए प्लस प्लस ग्रेड प्राप्त करना इसकी शैक्षणिक गुणवत्ता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि पहले अंतरराष्ट्रीय तो दूर राष्ट्रीय स्तर पर भी पहले 100 संस्थानों में नाम नहीं आता था, और आज मैं देख रही हूं विश्व रैंकिंग में स्थान प्राप्त कर यह संस्थान अपनी वैश्विक प्रतिष्ठा को साबित कर रहा है।

उन्होंने कहा कि छोटी-छोटी बातों की प्रधानमंत्री चिंता करते हैं, मैंने महिलाओं के स्वास्थ्य और अन्य सेवाओं के लिए जैसे ही प्रधानमंत्री के समक्ष प्रस्ताव रखा, उन्होंने तुरंत स्वीकार कर लिया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बजट 2026 में स्वास्थ्य क्षेत्र को विशेष प्राथमिकता देते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के बजट में लगभग 10% की वृद्धि की गयी। करते हुए इसे 1 करोड़ 6 लाख रुपए से अधिक किया गया है स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में भारत ने पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति की है।

बच्चों की हार्ट सर्जरी पर कही बड़ी बात

राज्यपाल ने आयुष्मान कार्ड से वंचित लोगों बनाने में हो रही लापरवाही, जन औषधि केंद्रों की जानकारी लोगों तक पहुंचाने में अस्पतालों की भूमिका पर भी सवाल उठाये। उन्होंने कहा कि नयी-नयी फैकल्टीज की नियुक्ति हुईं, लेकिन कितना रिसर्च वर्क हुआ, यह भी बताइये। उन्होंने कहा कि अभी निदेशक ने बच्चों की 300 से ज्यादा हार्ट सर्जरी की जानकारी दी, मुझे यह सुनकर अच्छा लगा, लेकिन यह भी तो बताइये कि इनमें सफल कितनी रहीं। इन बच्चों में कितने जीवित रहे और कितनों की मौत हो गयी। कि 300 से अधिक सर्जरी जा चुकी हैं, लेकिन मैं पूछना चाहती हूं कि सर्जरी की, बहुत अच्छी बात है लेकिन इनमें से कितने जीवित हैं और कितनों की मृत्यु हुई, यह नहीं बताया। क्यों मौत हो गयी, कैसे इसमें सुधार किया जाये, यह भी आप ही बतायेंगे। उन्होंने कहा कि हम उपलब्धि तो लिखते हैं, लेकिन कमियां नहीं लिखते। क्या कोई साधन की आवश्यकता थी, कोई दवाई की आवश्यकता थी, यह तो आपको ही पता चलेगा।

अस्पताल में निर्माण कार्यों पर दी सलाह

राज्यपाल ने कहा कि संस्थानों में जब भवन निर्माण होता है तो क्या आप लोग यह देखते हैं कि कैसा बना है, मरीज के, उपचार के दृष्टिकोण से जिन चीजों की आवश्यकता है, वह पूरी हुईं या नहीं। उन्होंने कहा कि होता यह है कि कमियां बाद में पता चलती हैं, इसलिए बनाने वाले से पहले कहिये कि नक्शा दिखाये। उन्होंने कहा जन भवन की टीम द्वारा 54 भवनों का निरीक्षण किया गया। कई जगह कमियां पायी गयीं। कोई भी व्यक्ति आपके यहां भवन बनाने के लिए आए इसके पहले उसको को बोलो यह डिजाइन बताइये, उन्होंने कहा कि जितने पैसे सरकार ने दिए हैं, उसमें अगर ढंग से निर्माण हो तो 15-20 करोड़ रुपये बच सकते हैं। उन्होंने हॉस्टल में भोजन की व्यवस्था के लिए अक्षय पात्र जैसी संस्थाओं से सेवा लेने की बात कही। उन्होंने कहा मनमाने तरीके से बाहर का खाना मंगाने में ड्रग्स आदि के आने की संभावना भी बनी रहती है। उन्होंने संस्थान में कुछ स्थानों की जानकारी देते हुए वहां पर गंदगी होने की बात कही। इन स्थानों में ए ब्लॉक के पास न्यू पीजी हॉस्टल के पीछे सीबीएमआर के पीछे और पार्किंग कॉर्नर पर बस स्टैंड के पास तथा नर्सरी स्कूल के पीछे ठेकेदार के स्टोर के पास की जगह शामिल हैं। उन्होंने स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से चिकित्सकों का भी टेस्ट कराने की सलाह दी। राज्यपाल ने सिर्फ दो पुस्तक का विमोचन किये जाने पर भी सवाल उठाया।

लड़कियों के स्वास्थ्य को लेकर जतायी चिंता

उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों की सेहत की सुरक्षा के लिए HPV वैक्सीनेशन प्रोग्राम को और मजबूत किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि लड़कियों के स्वास्थ्य को लेकर जांच, वैक्सीन के बारे में लड़कियों को बताना चाहिये, जिससे कि वे अपने परिवार और बाद में अपनी ससुराल में इस जानकारी के चलते जागरूकता पैदा कर सकें। उन्होंने बहराइच की डिप्टी एसपी हर्षिता तिवारी और चीफ डेवलपमेंट ऑफिसर सुनील कुमार धनवंता को HPV वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट देकर सम्मानित किया।

सच्चा प्रेम भागना नहीं सिखाता

उन्होंने कहा कि लड़कियों को प्रेम में पड़कर अपनी सीमाएं नहीं लांघनी चाहिये, सच्चा प्रेम भागने पर मजबूर नहीं करता है। मैं मानती हूं कि इसमें गलती लड़कियों की नहीं होती है, उम्र ही ऐसी होती है इसलिए हमें समझाने की आवश्यकता है। बिना सोचे समझे भागने जैसा कदम उठाने के परिणामस्वरूप लड़कियों के गर्भवती होने, छोड़ देने जैसी बातें सामने आती हैं। यदि सच्चा प्रेम है तो दोनों मिलकर तय कर लीजिए कि जब तक पढ़ाई खत्म नहीं होगी तब तक नो मैरिज। उन्होंने कहा कि आप एक बच्चों के सामने, स्टूडेंट के सामने एक आदर्श अध्यापक के रूप में प्रस्तुत कीजिए। राज्यपाल ने आंगनवाड़ी सिस्टम को मजबूत करने पर भी जोर दिया।

मरीज के बिना चिकित्सक का कोई अस्तित्व नहीं : ब्रजेश पाठक

ब्रजेश पाठक ने अपने सम्बोधन में शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज आप सबके जीवन में एक अहम पड़ाव आया है। आप लोग पढ़कर प्रदेश की सेवा में काम करने के लिए तैयार हो चुके हैं। एसजीपीजीआई प्रदेश का ही नहीं देश का जाना माना चिकित्सा संस्थान है, लोगों को बहुत भरोसा है और मुझे पूरी उम्मीद है इस भरोसे को आप लोग और मजबूत बनाने का काम करेंगे। प्रदेश सरकार लगातार एसजीपीजीआई को आगे बढ़ाने के लिए काम कर रही है 2017 में जब सरकार बनी तब पीजीआई का बजट मात्र 700 करोड़ था आज यह बढ़कर लगभग तीन गुना से अधिक 2200 करोड़ से अधिक हो चुका है। ब्रजेश पाठक ने मुंशी प्रेमचंद की मंत्र कहानी का जिक्र करते हुए कहा कि यह कहानी बताती है कि मरीज की पीड़ा क्या होती है और किस ढंग से मरीज की सेवा की जाती है। मरीज को भगवान मानकर के हमें सेवा करना है, अगर मरीज नहीं है तो चिकित्सक का कोई अस्तित्व नहीं है यह मानकर चलना है कि मरीज हमारे लिए भगवान है वह हमारे लिए सेवा का अवसर लेकर आया है। हम उसे स्वस्थ करके घर भेजेंगे। उन्होंने कहा कि मरीज को भर्ती करने के लिए अगर बेड उपलब्ध नहीं है तो उसे एम्बुलेंस में ही प्राथमिक उपचार देते हुए बेहतर संस्थान के लिए रेफर करें, सीधे मना नहीं करें।

निदेशक ने बतायी प्रगति और भावी योजनाएं

निदेशक प्रो आरके धीमन ने संस्थान की रिपोर्ट और योजनाओं की जानकारी देते हुए कहा कि हमारा ध्यान एक ऐसा संस्थान बनाने पर है जो ज्यादा इन्नोवेटिव डिजिटल एंपावर्ड, रिसर्च ओरिएंटेड जैसी विशेषताओं से युक्त हो। हमारे यहां एडवांस पेडियाट्रिक सेंटर आ रहा है यह हमारे सबसे बड़े प्रोजेक्ट में से एक है जो कि उत्तर प्रदेश सरकार के इस विजन को दिखाता है कि किसी भी बच्चे को स्पेशलाइज्ड मेडिकल केयर के लिए उत्तर प्रदेश राज्य से बाहर न जाना पड़े। इसे विकसित किया जा रहा है पहला फेज तैयार हो चुका है जिसका शुरुआत हम अक्टूबर इसी वर्ष में करेंगे। इसके अलावा फेल टू भी हम डेवलप कर रहे हैं। सर्वाधिक बेड क्षमता वाला इन सुविधाओं से युक्त यह भारत का पहला अस्पताल होगा।

प्रो धीमन ने कहा कि हम आपको यह बताना चाहते हैं केवल उत्तर प्रदेश में प्रतिवर्ष 70000 से अधिक बच्चे कंजेटियल हार्ट डिजीज से पीड़ित होते हैं और पैदा होते हैं, इनका इलाज नॉर्थ इंडिया में नहीं होता साउथ में होता है और वहां भी 5 से 10% बच्चे ही इलाज करा पाते हैं। उन्होंने बताया कि इस प्रकार के सेंटर का पीजीआई में पहला फेज प्रारम्भ हो गया है, मुख्य बात यह है कि इसमें बच्चों की 300 से अधिक सर्जरी की जा चुकी है। इसी क्रम में उन्होंने संस्थान में शुरू हो चुके अंग प्रत्यारोपण कार्य के बारे में भी जानकारी दी। निदेशक ने सरकार से मिल रहे अटूट समर्थन के लिए आभार जताया।

समारोह में एसजीपीजीआई द्वारा गोद लिए गए गांवों के स्कूली बच्चों ने हमारे जीवन में माँ की भूमिका और उनके अनमोल स्थान पर दो प्रेरणादायक कहानियां और गुजराती लोक नृत्य पेश किया।