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सिगरेट पीना मर्दानगी नहीं, नामर्द बनाने की तैयारी है : प्रो वेद प्रकाश

-विश्व तम्बाकू निषेध दिवस (31 मई) पर केजीएमयू के पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केयर विभाग में पत्रकार वार्ता

सेहत टाइम्स

लखनऊ। पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केयर विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो वेद प्रकाश ने कहा कि दाने-दाने में केसर का दम बताने वाले दम निकालने वाली तम्बाकू के बारे में नहीं बताते हैं। जो लोग यह समझते हैं कि तम्बाकू, सिगरेट पीना बड़ी मर्दानगी की बात है, तो वे यह समझ लें कि इससे मर्दानगी नहीं, बल्कि नामर्दगी आती है।

विश्व तम्बाकू निषेध दिवस  World No Tobacco Day (31 मई) के मौके पर आयोजित पत्रकार वार्ता में प्रो वेद ने कहा कि मुंह में या शरीर में गांठ, किसी भी तरह के लक्षण देखें तो जांच जरूर करायें, शुरुआत में ही जांच कराने से रोग जल्दी पकड़ में आ जाता है। उन्होंने कहा कि तम्बाकू और दूसरे नशों से दूर रहने के लिए स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम होने चाहिये, सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन्स के अनुसार स्कूलों के आसपास तम्बाकू, सिगरेट आदि बेचे जाने पर रोक है, लेकिन स्थिति यह है कि एक लड़का अपने साथ झोले में भरकर तम्बाकू और दूसरे नशे के सामान और एक लाठी लाता है, एक तरफ पेड़ में और दूसरी तरफ लाठी में एक तार बांधकर उसमें सभी तरह की तम्बाकू, गुटखा, प्रतिबंधित सिगरेट और भी बहुत तरह की नशीली वस्तुओं को बेचता है।

उन्होंने कहा कि मेरी अपील है कि स्कूलों के किनारे इस तरह की अस्थायी दुकानें लगाकर नशीली वस्तुएं बेचने वालों को पकड़ा जाए। 21वीं सदी का सशक्त भारत तभी बनेगा जब हम लोग तम्बाकू से मुक्ति कर लेंगे, तभी कैंसर के मामले भी कम होंगे। प्रो वेद ने कहा कि टीबी मुक्त भारत करने की तैयारी हो रही है, अच्छी बात है, लेकिन तम्बाकू मुक्त भारत कब होगा।

टीबी से ज्यादा खतरनाक है सीओपीडी : प्रो राजेन्द्र प्रसाद

वरिष्ठ पल्मोनोलॉजिस्ट पद्मश्री प्रो राजेन्द्र प्रसाद ने कहा कि जिस लुभावनेपन से बताया जाता है कि तम्बाकू, सिगरेट पीने वाले बहुत स्मार्ट हो जाते हैं, गलत है। तम्बाकू-सिगरेट से किसी प्रकार का कोई भी फायदा नहीं है, नुकसान ही नुकसान है। कैंसर, हार्ट, फेफड़़े की बीमारी हो जाती है। उन्होंने कहा कि आपको यह जानकर हैरानी होगी कि सिगरेट-तम्बाकू से होने वाली बीमारी सीओपीडी Chronic Obstructive Pulmonary Disease टीबी से भी ज्यादा खतरनाक है, क्योंकि टीबी का तो इलाज है, लेकिन सीओपीडी का नहीं, सिर्फ इसके लक्षणों को कम किया जा सकता है।

टीबी से मृत्यु का आंकड़ा देखें तो भारत में आज भी प्रतिवर्ष 3 लाख लोग टीबी से मर रहे हैं लेकिन इससे तीन गुना लगभग 8.5 लाख लोगों की मौत सीओपीडी से हो रही है। उन्होंने बताया कि लोगों में यह भ्रम है कि बीड़ी, सिगरेट से कम नुकसान करती है। प्रो प्रसाद ने कहा कि जितना समय आप सिगरेट-बीड़ी पीने में लगाते हैं, उतना समय जिन्दगी का कम करते हैं। उन्होंने कहा कि स्मार्ट बीड़ी-सिगरेट नहीं बनाती है, स्मार्ट बनाता है योग, इसलिए योग करिये, व्यायाम करिये, स्वस्थ रहिये।

अपने मुंह में झांकिये : प्रो यूएस पाल

ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी के प्रो यूएस पाल ने बताया कि तम्बाकू का सेवन कैंसर का कारण हैं, यह सही है लेकिन इसके अलावा भी बहुत से कारण हैं। उन्होंने कहा कि बहुत से युवा सोचते हैं कि हमारे दादा जी खाते थे, वह तो काफी साल जिये, ऐसे युवाओं को इस भ्रम को मन से निकाल देना चाहिये, उन्हें यह समझना चाहिये कि दादाजी के समय में और आजकल के समय में बहुत अंतर है, रहन-सहन, व्यायाम, शारीरिक श्रम, मिलावटी सामान, पेस्टीसाइट्स खाद प्रदूषण जैसे बहुत से कारण हैं, जो कैंसर पैदा करने में सहायक हैं।

प्रो पाल ने कहा कि मेरी यह अपील है कि जिस तरह से रोज आप अपने बाल, चेहरा आदि को देख कर उसे दुरुस्त करते हैं, इसी तरह अपने मुंह में भी झांकें, मुंह के अंदर अपने गाल देखें, मसूढ़ा देखें, जुबान देखें, इसका आपको लाभ दिखेगा, कोई भी बदलाव दिखने पर आप स्वयं सचेत हो जायेंगे।

किसी को जल्दी तो किसी को देर से होता है कैंसर : डॉ शिवराजन

केजीएमयू के कैंसर सर्जन डॉ शिवराजन ने बताया कि तम्बाकू का सेवन करने पर शरीर के लगभग सभी अंगों के कैंसर में तम्बाकू एक बड़ा कारण है। उन्होंने बताया कि तम्बाकू का सेवन करने वाले जब कहते हैं कि मैंने तो अभी कुछ समय पहले ही सेवन करना शुरू किया था, जबकि फलां मरीज 30 साल से खा रहा है, उसे अब हुआ। डॉ शिवराजन ने कहा कि अभी ऐसा कोई पैमाना नहीं आया है कि तम्बाकू खाने के कितने दिन बाद कैंसर होता है, उन्होंने कहा कि यह व्यक्ति के अंदर के कई कारणों पर निर्भर करता है।

डॉ शिवराजन ने कहा कि मेरा लोगों के लिए यही संदेश है कि तम्बाकू का सेवन न करें और अगर कर रहे हैं तो तत्काल छोड़ दें। साथ ही दूसरा अगर कोई कर रहा है तो उसे भी छोड़ने के लिए प्रेरित करें।

दूसरे नशों की अपेक्षा जल्दी लगती है तम्बाकू की लत : डॉ अमित सिंह

लोगों को नशे से मुक्ति दिलाने में लगे मनोचिकित्सा विभाग के डॉ अमित सिंह ने बताया कि तम्बाकू-निकोटिन की लत दूसरे नशों से जल्दी लगने की संभावना रहती है, इसलिए इसका सेवन थोड़ा भी न करें। उन्होंने कहा कि नशा छोड़ने के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति जरूरी है, यह सही है, लेकिन इसके बाद भी अगर छोड़ने में समस्या महसूस हो रही है, तो ऐसे लोगों का भी इलाज हमारे यहां होता है। इसके अच्छे ट्रीटमेंट उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा तम्बाकू छोड़ने के लिए इस्तेमाल होने वाले गम्स, पैचेज आदि होते हैं, लेकिन इसका इस्तेमाल करने का भी अलग तरीका होता है, तभी इसका लाभ दिखता है।