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International Nurses Day 2026: नर्सिंग उत्कृष्टता, उन्नत नर्सिंग देखभाल, साक्ष्य-आधारित अभ्यास, नर्सों के सशक्तिकरण पर चर्चा

-एसजीपीजीआई में भव्य अंतर्राष्ट्रीय नर्सिंग वेबिनार के साथ मनाया गया अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस सप्ताह

सेहत टाइम्स

लखनऊ। Sanjay Gandhi Postgraduate Institute of Medical Sciences (एसजीपीजीआई) द्वारा अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस सप्ताह समारोह के अंतर्गत 9 मई 2026 को टेलीमेडिसिन सभागार में अंतर्राष्ट्रीय नर्सिंग वेबिनार का सफल आयोजन किया गया। यह वेबिनार नर्सिंग उत्कृष्टता, उन्नत नर्सिंग देखभाल, साक्ष्य-आधारित अभ्यास (Evidence-Based Practice) और नर्सों के सशक्तिकरण को समर्पित वैज्ञानिक एवं शैक्षणिक गतिविधियों की शृंखला का महत्वपूर्ण समापन रहा।

कार्यक्रम का शुभारंभ नीलम श्रीवास्तव, एंसी जयराज और नीमा पंत के संबोधनों से हुआ। वेबिनार के विभिन्न सत्रों का संचालन मंजू सिंह (मुख्य नर्सिंग ऑफिसर), अलका मोहन, अनीता वाल्टर, ज्योतिबाला एवं अन्य वरिष्ठ नर्सिंग विशेषज्ञों ने किया।
वेबिनार में भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के विभिन्न राज्यों एवं संस्थानों से जुड़े राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों ने Evidence-Based Nursing Practice (EBP) के विविध आयामों पर अपने विचार साझा किए। पश्चिम बंगाल के बर्दवान मेडिकल कॉलेज की प्रोफेसर डॉ. उमा रानी अधिकारी ने साक्ष्य-आधारित नर्सिंग पद्धतियों को लागू करने की रणनीतियों पर प्रकाश डाला। मेरठ की प्रोफेसर डॉ. बालमोनी बोस ने रोगी सुरक्षा और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं में EBP की भूमिका को रेखांकित किया।

ओडिशा के बरहामपुर मेडिकल कॉलेज की प्रोफेसर डॉ. राजलक्ष्मी मिश्रा ने साक्ष्य-आधारित नैदानिक नर्सिंग पद्धतियों पर व्याख्यान दिया। एसजीपीजीआई कॉलेज ऑफ नर्सिंग की सबाना खातून ने शोध को रोगी देखभाल में लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया। वहीं कोलकाता के नारायणा सुपरस्पेशलिटी अस्पताल की प्रोफेसर डॉ. शम्पा गुप्ता ने अंतःशिरा दर्द प्रबंधन में Evidence-Based Approaches पर चर्चा की।

ओडिशा के कटक मेडिकल कॉलेज की डॉ. अंजना बाला बेहुरा ने साक्ष्य-आधारित नर्सिंग पद्धतियों को लागू करने में आने वाली चुनौतियों और अवसरों की विस्तृत जानकारी दी। ईएसआई जोका, कोलकाता की निबेदिता डे ने प्रसूति एवं प्रसव कक्षों में संक्रमण रोकथाम के Evidence-Based तरीकों पर प्रस्तुति दी।

अंतर्राष्ट्रीय वक्ता शेरोन शीबा थंबिथुराई (यूएई) ने गहन चिकित्सा नर्सिंग में साक्ष्य-आधारित अभ्यास के महत्व को रेखांकित किया। आलिया विश्वविद्यालय, पश्चिम बंगाल की डॉ. उषा मल्लिक ने नवजात शिशु नर्सिंग देखभाल में Evidence-Based Practice की आवश्यकता पर जोर दिया। वहीं All India Institute of Medical Sciences (एम्स) दिल्ली की मीरा प्रजापति ने सर्जिकल साइट संक्रमण की रोकथाम और ऑपरेशन थिएटर प्रथाओं में नर्सिंग की भूमिका पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।

वेबिनार के वैज्ञानिक सत्रों से नर्सिंग समुदाय को व्यापक लाभ मिला। इससे नर्सिंग पेशेवरों के ज्ञान में वृद्धि हुई, अनुसंधान-आधारित क्लीनिकल प्रैक्टिस को प्रोत्साहन मिला तथा रोगी सुरक्षा एवं गुणवत्ता सुधार की दिशा में नई प्रेरणा प्राप्त हुई।
कार्यक्रम का समापन जुइन दत्ता घोष द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने सभी वक्ताओं, आयोजकों, मॉडरेटरों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। वेबिनार के सफल आयोजन में योगदान के लिए जुइन दत्ता घोष को नर्सिंग प्रशासन द्वारा सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम का संचालन अभिषेक नाहर और कनिका जैनथ ने किया।

वेबिनार में भारत और विदेशों से करीब 200 प्रतिभागियों ने भाग लिया। यह आयोजन स्वास्थ्य पेशेवरों के बीच Evidence-Based Nursing Practice और सहयोगात्मक शिक्षण के बढ़ते वैश्विक महत्व को दर्शाने वाला महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ। एसजीपीजीआई ने इस सफल आयोजन के माध्यम से नर्सिंग शिक्षा, अनुसंधान, रोगी सुरक्षा और गुणवत्ता आधारित स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को पुनः मजबूत किया।