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एसजीपीजीआई के डॉ ज्ञान चंद ने हासिल की रोबोटिक एंडोक्राइन सर्जरी में ऐतिहासिक उपलब्धि, सर्जरी का दोहरा शतक

-18 वर्षों से हाइपोथायरॉइडिज्म से ग्रस्त 25 वर्षीय युवक की अत्यन्त जटिल सर्जरी को दिया अंजाम

सेहत टाइम्स

लखनऊ। संजय गांधी पीजीआई के डॉ. ज्ञान चंद, प्रोफेसर, एंडोक्राइन सर्जरी विभाग ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए 200 रोबोटिक एंडोक्राइन सर्जरी सफलतापूर्वक पूर्ण की हैं। यह उपलब्धि न्यूनतम इनवेसिव सर्जरी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

इस उपलब्धि के अंतर्गत, डॉ. चंद और उनकी टीम ने हाल ही में एक अत्यंत जटिल और चुनौतीपूर्ण रोबोटिक सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। यह सर्जरी हरदोई निवासी 25 वर्षीय युवक (जूनियर इंजीनियर) पर की गई, जिसे पिछले 18 वर्षों से गर्दन के सामने सूजन की समस्या थी, जो धीरे-धीरे बढ़ रही थी। मरीज को हाइपोथायरॉइडिज्म था और वह नियमित रूप से दवा (थायरोनॉर्म 62.5 माइक्रोग्राम प्रतिदिन) ले रहा था।
जांच के दौरान थायरॉयड ग्रंथि का व्यापक बढ़ाव पाया गया, जिसकी निचली सीमा स्पर्श से महसूस नहीं हो रही थी, जिससे रेट्रोस्टर्नल विस्तार की संभावना थी। अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन में बड़ा मल्टीनोड्यूलर गॉइटर, रेट्रोस्टर्नल विस्तार तथा लिम्फोसाइटिक थायरॉयडाइटिस की पुष्टि हुई। FNAC रिपोर्ट बेथेस्डा II श्रेणी में थी। ग्लैंड का बड़ा आकार, रेट्रोस्टर्नल विस्तार और थायरॉयडाइटिस जैसी स्थिति आमतौर पर रोबोटिक या न्यूनतम इनवेसिव सर्जरी के लिए चुनौतीपूर्ण मानी जाती है।

पूर्ण प्रीऑपरेटिव मूल्यांकन के बाद मरीज का रोबोटिक टोटल थायरॉयडेक्टॉमी (BABA एप्रोच) द्वारा ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन के दौरान दोनों लोब बड़े पाए गए, जिसमें दाहिना लोब मेडियास्टिनम तक फैला हुआ था और इस्तमस मोटा था। महत्वपूर्ण संरचनाओं जैसे रिकरेंट लैरिंजियल नर्व और पैराथायरॉयड ग्रंथियों को सुरक्षित रखा गया। निकाले गए थायरॉयड का कुल वजन 149 ग्राम था, जिसमें दाहिने लोब का आकार 12 × 7 × 3 सेमी और बाएं लोब का आकार 8 × 6.5 × 2 सेमी था।

ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति पूरी तरह स्थिर रही। उसकी आवाज सामान्य रही और कैल्शियम स्तर भी सामान्य पाया गया। इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए संस्थान के निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर आर के धीमन ने डाक्टर ज्ञान चंद और उनकी टीम को बधाई दी है।

इस अवसर पर डा. ज्ञान चंद ने कहा कि यह संस्थान के निदेशक प्रोफेसर आर के धीमन एवं एंडोक्राइन सर्जरी विभाग के प्रमुख प्रोफेसर गौरव अग्रवाल के सतत मार्गदर्शन व प्रोत्साहन से ही संभव हुआ है। उन्होंने कहा कि यह केस दर्शाता है कि अनुभवी सर्जन के हाथों में रोबोटिक सर्जरी पारंपरिक सीमाओं को भी सफलतापूर्वक पार कर सकती है। उन्होंने बताया कि सही मरीज का चयन और विशेषज्ञता ऐसे जटिल मामलों में सफलता की कुंजी है।
यह उपलब्धि रोबोटिक एंडोक्राइन सर्जरी को एक सुरक्षित, सटीक और कॉस्मेटिक रूप से बेहतर विकल्प के रूप में स्थापित करती है, विशेषकर जटिल मामलों में भी।