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आधुनिक चिकित्सा फिर एक बार, थारू जनजाति एवं सीमांत गांवों के द्वार

-नेशनल मेडिकोज आर्गेनाइजेशन की चिकित्सा सेवा का उद्देश्य, ‘जहां कम, वहां हम’

-6 से 8 फरवरी तक आयोजित होगी ‘गुरु गोरखनाथ स्वास्थ्य सेवा यात्रा 6.0’

-5 फरवरी को होगी रवानगी, 2.5 लाख से अधिक लोगों तक पहुंचने का संकल्प

सेहत टाइम्स

लखनऊ। ‘जहां कम वहां हम’ ‘जहाँ राह नहीं, वहाँ हम पहुँचेंगे; जहाँ चिकित्सा नहीं, वहाँ स्वास्थ्य सेवा पहुँचाएँगे।’ इस ध्येय के साथ नेशनल मेडिकोज आर्गेनाइजेशन (NMO) अवध एवं गोरक्ष प्रांत तथा श्री गुरु गोरखनाथ सेवा न्यास द्वारा भारत-नेपाल सीमा के सुदूर थारू बाहुल्य एवं सीमावर्ती क्षेत्रों में आगामी 6 से 8 फरवरी तक तीन दिवसीय ‘गुरु गोरखनाथ स्वास्थ्य सेवा यात्रा 6.0’ का आयोजन किया जा रहा है। आने वाले समय में इन सुदूर क्षेत्रों में हम लोग हमेशा चिकित्सा सुविधा दे सकें, इसके लिए टेलीमेडिसिन प्रणाली को स्थापित किये जाने की दिशा में कार्य चल रहा है।

यह जानकारी आज 31 जनवरी को यहां विश्व संवाद केंद्र, जियामऊ में आयोजित प्रेस वार्ता में ‘गुरु गोरखनाथ स्वास्थ्य सेवा यात्रा 6.0’  की औपचारिक घोषणा यात्रा का आधिकारिक पोस्टर एवं रूट मैप जारी करते हुए दी गयी। प्रेस वार्ता में श्री गुरु गोरखनाथ सेवा न्यास के संरक्षक प्रो. एम.एल.बी. भट्ट, NMO अवध प्रांत के अध्यक्ष प्रो. संदीप तिवारी, डॉ विजय कुमार एवं मीडिया प्रभारी डॉ. कपिल देव शर्मा मौजूद रहे। उन्होंने बताया कि लखनऊ स्थित डॉ राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान से यह यात्रा 5 फरवरी को रवाना होगी और रात तक अपने स्वास्थ्य सेवा कार्य करने वाले गन्तव्य स्थल तक पहुंच जायेगी। उन्होंने कहा कि यह मात्र स्वास्थ्य शिविर नहीं, बल्कि राष्ट्रवाद, सेवा-भावना और अंतिम छोर तक पहुंचने का एक जीवंत संदेश है।

आयोजकों ने बताया कि इस सेवा यात्रा की टीम में KGMU, AIIMS, SGPGI, BHU सहित देश के प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थानों से लगभग 1000 विशेषज्ञ चिकित्सक, डॉक्टर एवं मेडिकल छात्र भाग लेंगे। इस सेवा यात्रा में दुर्गम क्षेत्रों में गंभीर मरीजों के लिए ‘स्पेशलिस्ट ऑन कॉल’, पोर्टेबल जांच मशीनें एवं त्वरित परामर्श की व्यवस्था भी की गयी है। उन्होंने बताया कि महिला चिकित्सकों के साथ ही हमारी मोबाइल वैन में जांच मशीनों की सुविधा होने से इन दुर्गम क्षेत्रों में वैन के अंदर ही महिला मरीजों की पैप स्मीयर, ब्रेस्ट आदि की जांच किया जाना भी संभव हो सकेगा।

यात्रा के कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया गया कि 6 एवं 7 फरवरी को लगभग 300 केंद्रों (1500+ गांवों को कवर करते हुए) ग्रामीण स्तर पर विशेष शिविर लगाये जायेंगे तथा 8 फरवरी को शिविर वाले जिलों में विशाल स्वास्थ्य मेला लगाया जायेगा जिसमें निःशुल्क जांच, दवा वितरण एवं विशेष परामर्श दिया जायेगा। उन्होंने बताया कि विगत 5 वर्षों में कुल 4 लाख से ज्यादा मरीजों का सफल उपचार करने के बाद इस वर्ष 2.5 लाख से अधिक लोगों तक पहुंचने का संकल्प किया गया है।

शिविर में स्वच्छ भारत अभियान के तहत स्वच्छता किट वितरण, स्वास्थ्य शिक्षा कार्यशालाएँ आयोेजित की जायेंगी जिसमें महिला चिकित्सकों द्वारा माहवारी स्वच्छता एवं दंत चिकित्सकों द्वारा मुख स्वास्थ्य जांच की जायेगी। शिविर में चश्मा वितरण, आधार कार्ड/आयुष्मान कार्ड पंजीकरण के साथ ही थारू समाज पर शोध भी किया जायेगा, ज्ञात हो पहले ही 5 अंतरराष्ट्रीय शोध पत्र प्रकाशित किये जा चुके हैं।

चिकित्सकों ने बताया कि भारत-नेपाल सीमा के कई गांव आज भी बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित हैं। वॉलंटियर्स पैदल यात्रा कर, कठिन रास्तों को पार कर अंतिम छोर तक दवा, जांच और सेवा पहुंचाएंगे। मेडिकल छात्रों की भागीदारी से उनके अंदर ग्रामीण सेवा के संस्कार भी विकसित होंगे। डॉ भट्ट ने अपने पूर्व के अनुभव को साझा करते हुए बताया कि ऐसे-ऐसे सुदूर ग्रामीण क्षेत्र हैं जहां तक पहुंचने में अत्यन्त दुर्गम परिस्थितियों से गुजरना पड़ता है। उन्होंने बताया कि शिविर में 90-95 वर्ष की आयु वाले ऐसे-ऐसे मरीज पहुंचते हैं जिन्होंने आज तक कभी डॉक्टर को दिखाया ही नहीं है। डॉ संदीप तिवारी ने कहा कि इस शिविर में सम्बन्धित जिलों में स्थापित मेडिकल कॉलेज, अस्पतालों के चिकित्सकों द्वारा भी सहयोग किया जाता है।