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नकली दवाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए नियमों में संशोधन

-दवाओं के पैक पर आवश्‍यक विवरण वाला क्‍यू आर कोड लगाना जरूरी

-1 जनवरी 2023 से लागू होगी नयी व्‍यवस्‍था


सेहत टाइम्‍स
लखनऊ।
भारत सरकार ने नकली दवाओं के कारोबार को नेस्‍तनाबूद करने के लिए बड़ा कदम उठाते हुए नियम बना दिया है इसके अनुसार अब एपीआई/मेडिसिन निर्माताओं के लिए दवाओं/एपीआई उत्पादों पर सभी विवरणों के साथ क्यूआर कोड रखना अनिवार्य कर दिया है।

भारत सरकार के स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय द्वारा 18 जनवरी, 2022 को नये नियमों को लेकर अधिसूचना जारी कर दी गयी है। नयी व्‍यवस्‍था में एक ही स्कैन के साथ, ग्राहक को दवाओं, यहां तक कि शिपिंग विवरण, बैच, लाइसेंस संख्या और आयात लाइसेंस के बारे में सब कुछ पता चल जायेगा।

सरकार के इस नये कदम से जहां नकली दवाओं के कारोबार पर रोक लग सकेगी, वहीं लोगों की जिन्‍दगी के साथ खिलवाड़ भी नहीं हो सकेगा। औषधि नियम 1945 का और संशोधन करने के लिए जो नियम बनाया गया है इसमें इन नियमों का संक्षिप्त नाम औषधि संशोधन नियम 2022 है, यह नियम 1 जनवरी 2023 को प्रवृत्त होंगे।


नए नियम के अनुसार भारत में विनिर्मित या आयातित प्रत्येक सक्रिय भेषज संघटक के आधान के प्रत्येक स्तर पर इसके लेवल पर क्यूआर कोड लिखा जाएगा इसमें जिन चीजों को अंकित करना आवश्यक होगा उनमें अद्वितीय उत्पाद पहचान कोड, एपीआई का नाम, ब्रांड का नाम, विनिर्माता का नाम और पता, बैच संख्या, बैच का आकार, विनिर्माण की तारीख, समाप्ति या पुन जांच की तारीख, सीरियल शिपिंग आधान कोड, विनिर्माण अनुज्ञप्ति संख्या या आयात अनुज्ञप्ति संख्या और अपेक्षित विशिष्ट भंडारण स्थिति का अंकन करना आवश्‍यक है।