इस औषधीय पौधे की खेती से पर्यावरण भी दुरुस्‍त और आय भी ज्‍यादा

सीमैप में आयोजित अंतर्राष्‍ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में उपमुख्‍यमंत्री ने बताये लेमनग्रास की खेती के फायदे

 

लखनऊ। खस की खेती पर्यावरण के लिए लाभकारी होने के साथ-साथ कृषकों की आय को भी बढ़ाने में सहायक होगी। वैकल्पिक खेती प्रणाली को अपनाकर कृषकों की आय को बढ़ाया जा सकता है। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री डॉ दिनेश शर्मा ने सोमवार को यहाँ सीमैप, कुकरैल पिकनिक स्पॉट रोड, लखनऊ में केन्द्रीय औषधीय एवं सगंध पौध संस्थान (सीमैप-सीएसआईआर) द्वारा आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के अवसर पर यह विचार व्यक्त किये।

 

डॉ दिनेश शर्मा ने कहा कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में खस की खेती उपयोगी साबित हो सकती है और इस दिशा में सीएसआईआर और सीमैप के द्वारा कई प्रयोग किये जा चुके हैं। परम्परागत खेती के साथ-साथ लेमनग्रास की खेती को अपनाकर कृषक अपनी आय को बढ़ा सकते हैं।

 

सीमैप के औषधीय पादपों पर आईओआरए-आरसीएसटीटी समन्वय केन्द्र एक प्रशिक्षण कार्यक्रम की मेजबानी कर रहा है। विदेश मंत्रालय भारत सरकार के मार्गदर्शन में 25 नवम्बर से 1 दिसम्बर  के दौरान आईओआरए सदस्य देशों के लिए ‘औषधीय पादपों के लिए विविधता, प्रलेखन, जीन बैंकिंग और डाटाबेस’ प्रशिक्षण का उद्देश्य औषधीय पादप संसाधनों के प्रबन्धन के लिए ज्ञान प्राप्त करना है, जो औषधीय पौधों, विशेषज्ञों, उत्पादों, संस्थाओं और विनियामक पर एक मजबूत डाटावेस बनाकर ज्ञान भण्डार के विकास को बढ़ावा देगा। प्रशिक्षण कार्यक्रम में भारत सहित 13 देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। छह दिवसीय इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान पौधों की पहचान और महत्व तथा औषधीय पौधों और पारम्परिक ज्ञान पर चर्चा होगी।

 

उप मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि आय के स्रोतों को बढ़ाने के लिए इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम एक प्रकार के वरदान है और यहाँ आये वैज्ञानिकों एवं युवाओं के लिए यह बहुत ही लाभकारी सहायक होगा। प्रशिक्षण किसी भी कार्य में महारथ हासिल करने में सहायक सिद्ध होता है।

 

पौधों के औषधीय गुणों का उपयोग करके मानव शरीर की व्याधियों को दूर करना भारत की परम्परा रही है। वर्तमान में मानव शरीर के तमाम विकारों को दूर करने के लिए जो तकनीक अपनायी जाती है, उसमें भारत की परम्परागत चिकित्सा शिक्षा पद्धति का अहम योगदान है। अथर्ववेद में भी इसका उल्लेख है कि आयुर्वेदिक पौधों का किस प्रकार से उपयोग औषधि निर्माण में किया जाये।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रमुख सचिव, वन एवं पर्यावरण कल्पना अवस्थी, निदेशक, सीमैप अनिल के0 त्रिपाठी सहित 13 देशों के प्रतिनिधि एवं वैज्ञानिक तथा छात्र उपस्थित रहे।