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नियमित व्यायाम, वजन पर लगाम और संतुलित आहार बचा सकता है नैश से

-ग्लोबल NASH दिवस पर फैटी लिवर बीमारी को नैश का गंभीर रूप बनने से रोकने का आह्वान

-एसजीपीजीआई में आयोजित कार्यक्रम में जुटे कई अन्य संस्थानों के भी विशेषज्ञ

सेहत टाइम्स

लखनऊ। एसजीपीजीआई के निदेशक पद्मश्री प्रोफ़ेसर आर.के. धीमन ने कहा है कि NASH (जिसे अब MASH – मेटाबोलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टीटोहेपेटाइटिस कहा जाता है) को मुख्य रूप से जीवनशैली से जुड़ी बीमारी माना जाता है। जीवनशैली से जुड़े मुख्य जोखिम कारक ज़्यादा वज़न और शारीरिक रूप से निष्क्रिय जीवनशैली हैं। नियमित शारीरिक व्यायाम करके, स्वस्थ वज़न बनाए रखकर और फलों, सब्ज़ियों व साबुत अनाज से भरपूर संतुलित आहार लेकर इससे बचा जा सकता है।

फैटी लिवर की बीमारी आज के दौर में तेज़ी से बढ़ती हुई स्वास्थ्य समस्या है। फैटी लिवर की बीमारी के गंभीर रूप को NASH (नॉन-अल्कोहलिक स्टीटो-हेपेटाइटिस) कहा जाता है। आम लोगों में फैटी लिवर की बीमारी के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए हर साल जून के दूसरे गुरुवार को ‘इंटरनेशनल ग्लोबल NASH दिवस’ मनाया जाता है।

संस्थान के हेपेटोलॉजी विभाग द्वारा आज 11 जून 2026 को ग्लोबल NASH दिवस मनाया गया। इस कार्यक्रम का उद्घाटन SGPGI के डीन प्रोफेसर शालीन कुमार, हेपेटोलॉजी के HOD प्रोफेसर अमित गोयल, KGMU में गैस्ट्रोएंटरोलॉजी के HOD प्रोफेसर सुमित रुंगटा, BHU-IMS में गैस्ट्रोएंटरोलॉजी के HOD प्रोफेसर देवेश यादव और GSVM, कानपुर में गैस्ट्रोएंटरोलॉजी के HOD प्रोफेसर विनय कुमार ने किया। यह कार्यक्रम टेलीमेडिसिन लेक्चर थिएटर में आयोजित किया गया था और इसमें प्रतिभागियों के लिए क्विज़ और व्यावहारिक प्रशिक्षण शामिल था।

हर तीसरा व्यक्ति फैटी लिवर की बीमारी से प्रभावित

विशेषज्ञों ने इस बात पर ज़ोर दिया कि हमारे देश में हर तीसरा व्यक्ति फैटी लिवर की बीमारी से प्रभावित है। डायबिटीज और मोटापा फैटी लिवर की बीमारी के मुख्य जोखिम कारक हैं। हमारा देश मोटापा और डायबिटीज की वैश्विक राजधानी है। भविष्य में हमारे फैटी लिवर की बीमारी की वैश्विक राजधानी बनने की भी संभावना है। उन्होंने विशेष रूप से फैटी लिवर की बीमारी का जल्द पता लगाने पर ज़ोर दिया ताकि इसे सिरोसिस और लिवर कैंसर में बदलने से रोका जा सके। विशेषज्ञों ने NASH और मेटाबोलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टीटोटिक लिवर डिजीज (MASLD) को ठीक करने में स्वस्थ भोजन और जीवनशैली के महत्व पर ज़ोर दिया।

हेपेटोलॉजी विभाग के डॉ अजय कुमार मिश्रा और डॉ सुरेंद्र सिंह ने पोस्टग्रेजुएट क्विज़ का आयोजन किया। राज्य भर से 100 से ज़्यादा युवा डॉक्टरों ने इसमें भाग लिया और फैटी लिवर की बीमारी, खासकर NASH के निदान और प्रबंधन के बारे में व्यावहारिक प्रशिक्षण (hands-on training) प्राप्त किया।

साथ मिलकर काम करने पर जोर

इस आयोजन का उद्देश्य NASH के बारे में जागरूकता, रोकथाम और प्रबंधन को बढ़ावा देना था, जिसमें इस स्थिति को ठीक करने में स्वस्थ जीवनशैली के विकल्पों की भूमिका पर प्रकाश डाला गया। जागरूकता फैलाकर और सर्वोत्तम तरीकों को बढ़ावा देकर, हेपेटोलॉजी विभाग भारत में लिवर की बीमारियों के बढ़ते बोझ को कम करने का प्रयास कर रहा है। इस बात पर ज़ोर दिया गया कि साथ मिलकर काम करने से हम लिवर की सेहत को बेहतर बना सकते हैं और लोगों तथा समुदायों पर NASH के असर को कम कर सकते हैं।