-राज्यपाल सचिवालय से प्रदेश के सभी राज्य विश्वविद्यालयों, संस्थानों को भेजे गये निर्देश

सेहत टाइम्स
लखनऊ। स्टूडेंट्स का जबरन धर्मान्तरण करने की कोशिश पर सख्त रुख अपनाते हुए राज्यपाल सचिवालय ने गाइडलाइन्स जारी करते हुए कहा है कि शिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को प्रभावित कर, भय दिखाकर, मानसिक दबाव बनाकर अथवा अनैतिक प्रलोभन देकर किए जाने वाले किसी भी प्रकार के अवैध या बलपूर्वक धर्मान्तरण (Religious Conversion) के प्रयास पूर्णत: अवांछनीय, अनैतिक और विधि-विरुद्ध हैं। इस प्रकार की अवांछित गतिविधियों को रोकने एव परिसर में सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने हेतु विश्वविद्यालय / संस्थान के स्तर से प्रभावी एवं निवारक कदम (Preventive Measures) तत्काल प्रभाव से उठाए जाने की आवश्यकता है।
उत्तर प्रदेश के सभी राज्य विश्वविद्यालयों, संस्थानों को राज्यपाल/कुलाधिपति के विशेष कार्याधिकारी द्वारा जारी निर्देशों में कहा गया है कि वर्तमान में शैक्षणिक परिसरों में विद्यार्थियों को प्रलोभन अथवा मानसिक दबाव द्वारा धर्मान्तरण के प्रयासों की खबरें प्रायः संज्ञान में आ रही हैं। एक सुरक्षित, धर्मनिरपेक्ष और अकादमिक वातावरण बनाए रखने हेतु यह अनिवार्य है कि प्रशासन सतर्क रहे और ऐसे प्रयासों को जड़ से समाप्त करने हेतु त्वरित रणनीति अपनाएं।
चरित्र निर्माण की आधारशिला भी हैं संस्थान
निर्देशों में कहा गया है कि उच्च शिक्षण संस्थान न केवल ज्ञान और नवाचार के केंद्र है, अपितु वे हमारे युवाओं के नैतिक, बौद्धिक और सामाजिक चरित्र निर्माण की आधारशिला भी है। शिक्षण परिसरों का वातावरण सदैव अकादमिक उत्कृष्टता, वैचारिक स्वतंत्रता और सौहार्द से परिपूर्ण होना चाहिए।
‘एन्टी-रेडिकलाइजेशन’ अथवा ‘छात्र कल्याण प्रकोष्ठ’ को करें अति सक्रिय
निर्देशों में इसके लिए कुछ कदमों को उठाने का निर्देश देते हुए कहा गया है कि मेंटर-मेंटी के सेशन में इस विषय को रखते हुए स्टूडेंट्स को पूर्णरूप से जागरूक किया जाये। सघन निगरानी एवं अंतःसंचार (Vigilance & Dialogue) के लिए विश्वविद्यालय एवं संस्थान स्तर पर ‘एन्टी-रेडिकलाइजेशन’ अथवा ‘छात्र कल्याण प्रकोष्ठ’ (Student Welfare Cell) को अत्यधिक सक्रिय करें और शिक्षक अभिभावक बैठकों (PTA Meetings) और अनौपचारिक संवादों के माध्यम से विद्यार्थियों की मनोदशा और उनकी समस्याओं पर निरंतर दृष्टि रखें।
काउंसिलिंग सेल स्थापित करें
इसके अलावा परिसर में सुदृढ और संवेदनशील परामर्श केंद्र (Counseling Cells) स्थापित किए जाए, जहाँ यदि कोई विद्यार्थी किसी भी प्रकार के मानसिक दबाव, प्रलोभन या संदेहास्पद बहकावे में हो, तो वह बिना किसी संकोच के अपनी बात साझा कर सके। उसकी पहचान पूर्णतः गोपनीय रखी जाए।
छात्रावासों में बाहरियों का प्रवेश पूर्ण प्रतिबंधित करें
इसके अलावा सुरक्षा एवं बाहरी तत्वों पर नियंत्रणः छात्रावासों (Hostels) और परिसर के संवेदनशील स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ की जाए। संस्था के छात्रावासों में अनधिकृत बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए तथा समय-समय पर आकस्मिक निरीक्षण (Surprise Inspections) सुनिश्चित किए जाएं। विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों, तार्किक सोच और विधिक अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने हेतु विशेष व्याख्यान एवं संगोष्ठियों का आयोजन किया जाए, जिससे वे किसी भी प्रकार के दुष्प्रचार या प्रलोभन का शिकार न हॉ। यदि परिसर के भीतर या छात्रावासों में किसी भी संस्था, समूह अथवा व्यक्ति द्वारा ऐसी संदेहास्पद गतिविधियों को संचालित करने का प्रयास संज्ञान में आता है. तो स्थानीय प्रशासन एवं पुलिस की तत्त्काल सूचित करते हुए, राज्य के प्रभावी धर्मान्तरण-विरोधी कानूनों के अंतर्गत कठोरतम विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
अटल बिहारी वाजपेयी चिकित्सा विश्वविद्यालय ने दिये अनुपालन के निर्देश
अटल बिहारी वाजपेयी चिकित्सा विश्वविद्यालय उत्तर प्रदेश के कुलसचिव ने सभी सरकारी व निजी मेडिकल कॉलेज, डेंटल कॉलेज, नर्सिंग कॉलेज व एलाइड हेल्थ कॉलेजेज को राज्यपाल सचिवालय द्वारा जारी निर्देशों का अनुपालन करते हुए कार्रवाई करने और की गयी कार्रवाई से विश्वविद्यालय को अवगत कराने के निर्देश दिये हैं।

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