एक ऐसा मंदिर जहां चिकित्‍सक कर सकेंगे शांति के साथ अपने आराध्‍य की आराधना

डॉ रमा श्रीवास्‍तव व डॉ मनोज कुमार की पहल, सीतापुर रोड पर सर्वदेव धन्‍वन्‍तरि मंदिर में अनेक देवी-देवताओं की मूर्तियों की स्‍थापना

पूरे विधिविधान से तीन दिन चली पूजा-अर्चना के बाद की गयी प्राण प्रतिष्‍ठा, पूर्णाहूति के साथ ही आयोजित हुआ भंडारा

 

लखनऊ। आमतौर पर धरती का भगवान कहे जाने वाले डॉक्‍टर को भी जगत के पालनहार परमपिता परमेश्‍वर की शरण में जाकर प्रार्थना करने की जरूरत पड़ती है, उसे भी अपने मरीज के स्‍वास्‍थ्‍य की चिंता रहती है। इसी तरह की सोच ने चिकित्‍सक दम्‍पति डॉ रमा श्रीवास्‍तव व डॉ मनोज कुमार को प्रेरित करते हुए सीतापुर रोड पर अटरिया के बनौगा गांव में सर्वदेव धन्‍वन्‍तरि मंदिर की सोच को जन्‍म दिया,  माघ पूर्णिमा को इस मंदिर में अनेक मूर्तियों की स्‍थापना पूरे विधिविधान के साथ की गयी।

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन सहित अनेक संस्‍थाओं से जुड़ीं डॉ रमा श्रीवास्‍तव से जब पूछा गया कि यह विचार उनके मन में कैसे आया तो उन्‍होंने बताया कि मंदिरों में बहुत भीड़ होती है, सारे डॉक्‍टर अपने-अपने मरीजों के स्‍वास्‍थ्‍य के लिए परेशान होते ही हैं, वे यह सोचते हैं कि हमारा मरीज ठीक हो जाये। डॉक्‍टरों के पास कोई ऐसा एक्‍सक्‍लूसिव ठिकाना नहीं था जहां वे अपनी श्रद्धा, अपना विश्‍वास, भगवान के प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट कर सकें इसलिए विशेष रूप से चिकित्‍सकों के लिए एक मंदिर बनाने की चाहत ने जन्‍म लिया। डॉ रमा ने बताया कि इसीलिए चिकित्‍सकों के लिए, चिकित्‍सकों के द्वारा, चिकित्‍सक का मंदिर बनाया गया है।

आपको बता दें कि हिन्दू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार धन्वन्तरि, भगवान विष्णु के अवतार समझे जाते हैं। इनका पृथ्वी लोक में अवतरण समुद्र मंथन के समय शरद त्रयोदशी को हुआ था। इसीलिये दीपावली के दो दिन पूर्व धनतेरस को भगवान धन्वंतरी का जन्म धनतेरस के रूप में मनाया जाता है। इसी दिन इन्होंने आयुर्वेद का भी प्रादुर्भाव किया था।  इन्‍हे आयुर्वेद की चिकित्सा करनें वाले वैद्य आरोग्य का देवता कहते हैं। इन्होंने ही अमृतमय औषधियों की खोज की थी।

 

उन्‍होंने बताया कि मंदिर बनने की शुरुआत बीती नवरात्रि में हो गयी थी। उन्‍होंने बताया कि 12 हजार स्‍क्‍वॉयर फीट के एरिया में अभी करीब 2000 स्‍क्‍वॉयर फीट पर निर्माण किया गया है। उन्‍होंने बताया कि अबतक इस पर करीब 36 लाख रुपये की लागत आयी है। उन्‍होंने बताया कि मूर्तियों के लिए कुछ चिकित्‍सकों ने दान दिया है जबकि कुछ ने भविष्‍य में देने का वादा किया है। उन्‍होंने बताया कि इस मंदिर में भगवान धन्‍वन्‍तरि के साथ ही गणेश, शिव, लक्षमी, छह फीट ऊंचे हनुमान, नवग्रह, राधाकृष्‍ण के साथ बीच में मांदुर्गा की स्‍थापना की गयी है। उन्‍होंने बताया कि अयोध्‍या से आये महेन्‍द्र पंडित सहित पांच पंडितों ने पूरी पूजा सम्‍पन्‍न करायी, 17 फरवरी से शुरू हुई का समापन मंगलवार को मूर्तियों की प्राण प्रतिष्‍ठा के साथ हुआ। डॉ रमा ने बताया कि मंगलवार को दो बजे शुरू हुआ पूर्णाहूति यज्ञ शाम करीब छह बजे पूर्णाहूति के साथ सम्‍पन्‍न हुआ। इसके बाद भंडारा हुआ।

डॉ रमा ने बताया कि यज्ञ में पूर्णाहूति देने लखनऊ के साथ ही बाहर से भी डॉक्‍टर शामिल होने आये। लखनऊ शहर के करीब डेढ़ सौ लोगों के अलावा आसपास के गांव के करीब 800-900 लोग उपस्थित रहे। भाग लेने वालों में आगरा मानसिक संस्‍थान के निदेशक डॉ सुधीर कुमार, डॉ कुसुम राय शामिल रहे। इनके अलावा जस्टिस विष्‍णु सहाय, प्रो इंदु सहाय, सहारा परिवार की कुमकुम राय चौधरी अपने सहयोगियों के साथ, डॉ एएम खान, डॉ रुखसाना खान, डॉ दीपक मेहन, डॉ पीके गुप्‍ता, डॉ प्रांजल अग्रवाल, डॉ एमएम सिंह, डॉ मनोज श्रीवास्‍तव, डॉ संजय अरोड़ा, डॉ अजय अग्रवाल, डॉ आनंद वर्धन, डॉ विश्‍वमोहिनी सिन्‍हा, डॉ एसके सिन्‍हा, डॉ हेमन्‍त कुमार, हाईकोर्ट के सरकारी वकील राजीव रंजन प्रसाद, एसके तिवारी, नीरज तिवारी एवं अन्‍य लोगों यज्ञ में अपनी पूर्णाहूति दी।