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दवा खाने के बाद भी अस्‍थमा के चलते सांस लेने में परेशानी दूर करेगा योग

केजीएमयू-लविवि के संयुक्‍त शोध का परिणाम, ध्‍यान करने से होते हैं शरीर की आंतरिक क्रियाओं में परिवर्तन

लखनऊ। कहते हैं कि जब तक सांस है तब तक आस है और यही सांस लेने में अगर कष्‍ट हो तो क्‍या आशा और कैसी आशा, साथ ही इसका अनुभव अत्‍यन्‍त पीड़ादायक होता है। सांस के रोग अस्‍थमा में जो मरीज इनहेलर का प्रयोग करते हैं उनमें 40 फीसदी मरीज ऐसे हैं जो अत्‍यन्‍त कष्‍टमय तथा शेष 60 फीसदी आंशिक कष्‍टमय जीवन व्‍यतीत करते हैं क्‍योंकि उन्‍हें अनियंत्रित अस्‍थमा के साथ जीवन गुजारना पड़ता है ऐसे लोगों के लिए योग अत्‍यन्‍त फायदेमंद साबित हुआ है। योग के फायदे एक शोध में सामने आये हैं।

 

प्रो सूर्यकान्त

यह जानकारी किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के पल्‍मोनरी रोग विभाग के विभागाध्‍यक्ष डॉ सूर्यकांत ने देते हुए बताया कि योग एक प्राचीनतम विधा है। आधुनिक युग में योग की अत्यधिक आवश्यकता है क्योकि मानव जीवन दुख, तनाव व रोग से परिपूर्ण है। मोटापा, अनिद्रा, कब्ज, चिन्ता, हाईपरटेंशन तथा श्वसन संबन्धी रोग प्रमुख रूप से जीवन शैली से सम्बंधित बीमारियां है। इनमें अस्थमा श्वसन सम्बन्धी एक प्रमुख बीमारी है।

 

डॉ सूर्यकांत बताते हैं कि भारत में लगभग तीन करोड़ लोग अस्थमा से पीड़ित हैं और उनमें लगभग 30 प्रतिशत लोग ही इन्हेलर का प्रयोग करते हैं, शेष लोग अस्थमा के कारण कष्टमय जीवन व्यतीत करते हैं। हमारे देश में 40 प्रतिशत लोंगो में अस्थमा अनियंत्रित व 60 प्रतिशत लोंगो में आंशिक रूप से नियंत्रित है। अतः इन रोगियों में इनहेलर चिकित्सा के अतिरिक्त अन्य सह चिकित्सा की आवश्यकता प्रतीत होती हैं।

 

उन्‍होंने बताया कि के0जी0एम0यू0 व लखनऊ विश्वविद्यालय के तत्वावधान में योग एवं अस्थमा पर एक शोध कार्य किया गया। जिसमें अस्थमा के मरीजों को दो वर्गों में बांटा गया प्रथम वर्ग में 121 मरीज और दूसरे वर्ग में 120 मरीजों को शामिल किया गया। छह माह तक योग वर्ग के मरीजों को योगासन, प्राणायाम व ध्यान कराया गया। रोगियो को मुख्य रूप से ताड़ासन, पर्वतासन, अर्द्धमत्स्येन्द्रासन, गोमुखासन, शलभासन, धनुरासन, नौकासन व शवासन कराया गया। नाड़ी शोधन, भ्रामरी व भस्त्रिका प्राणायाम तथा सोहम मेडिटेशन कराया गया।

 

उन्‍होंने बताया कि ध्यान (मेडिटेशन) के कारण शरीर की आन्तरिक क्रियाओं में विशेष परिर्वतन होते है और प्रत्येक कोशिका ऊर्जा से भर जाती है जिससे प्रसन्नता, शान्ति और उत्साह का संचार भी बढ़ जाता है। व्यक्ति के आत्मविश्वास में वृद्धि होती है, स्वास्थ्य बेहतर होता है और जीवन की गुणवत्ता में सुधार आता है।

 

इस शोध से यह निष्कर्ष सामने आया कि यदि प्रतिदिन 30 मिनट योग किया जाये तो अस्थमा के मरीजों के जीवन स्तर में सुधार आता है। एण्टीआक्सीडेन्टस का स्तर शरीर मे बढ़ जाता है। फेफड़ों की बंद साँस की नालियां खुलती हैं और कार्यक्षमता में वृद्धि होती है, अस्थमा के लक्षणों में सुधार आने के साथ ही इन्हेलर की मात्रा में भी कमी आती है। व्यक्ति सुचारु रूप से अपना कार्य कर सकता है। डॉ सूर्यकांत ने बताया कि योग को सहचिकित्सा के रूप में इनहेलर चिकित्सा के साथ साथ उपयोग में लाया जा सकता है।

 

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