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क्‍या कहना है मिस वर्ल्‍ड मानुषी छिल्‍लर का, महिलाओं के हर माह के ‘खास’ दिनों के बारे में

विशेष अभियान से जुड़ी मानुषी ने एक कार्यक्रम शक्ति परियोजना’ के दौरान बयां की थी स्थिति

 

लखनऊ। 17 साल बाद भारत की सुन्‍दरी ने मिस वर्ल्ड का खिताब जीता।  हरियाणा की मानुषी छिल्‍लर ने 108 सुन्‍दरियों को पीछे छोड़ चीन में हुई इस सौन्‍दर्य प्रतियोगिता में यह खिताब हासिल किया। तन के साथ ही मन की सुन्‍दरता के उस जवाब, जिसमें उसने मां का महत्‍व बताया था, को सबने जान ही लिया। अब हम आपको बताते हैं कि पेशे से डॉक्‍टर रह चुकी मानुषी की महिलाओं के लिए अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण विषय मासिक धर्म के बारे में राय क्‍या है। यह राय उन्‍होंने पहले एक कार्यक्रम के दौरान दी थी। इसमें उन्‍होंने भारत में इसके बारे में क्‍या स्थिति है, इसका जिक्र किया था।

मीडिया में चल रही खबरों में बताया गया है कि मानुषी ने सेनेटरी पैड के यूज और हाइजीन को लेकर आयोजित एक कार्यक्रम ‘शक्ति परियोजना’ में कहा था कि लोगों में पीरियड्स को लेकर बहुत तरह का भ्रम है। लोग तो पीरियड्स का खून देकर भी भड़क जाते हैं और इसे एक बीमारी के तौर पर देखने लगते हैं। उन्होंने कहा कि लोगों को भ्रम पालने के बजाए उसके साइंटिफिक कारणों के बारे में पता लगाना चाहिए।

ज्ञात हो, मानुषी सेनेटरी पैड के प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। मानुषी ने कहा था कि उनके राज्य में तो सेनेटरी पैड का इस्तेमाल करने वाली महिलाओं की संख्या बेहद कम है। उन्होंने एक कार्यक्रम के दौरान मौजूद लोगों को एक वाकया भी सुनाया। उन्‍होंने बताया कि कैसे हरियाणा में पीरियड्स के दौरान इंफेक्शन से एक महिला इस स्थिति में पहुंच गई कि वह अब कभी मां नहीं बन पा सकती। वह अवसाद यानी डिप्रेशन में चली गई है।

मानुषी का कहना था कि इस अभियान के तहत काम करने के लिए वह गांव गांव गईं और जानकर उन्हें अफसोस हुआ कि तमाम महिलाओं को तो सेनेटरी पैड की जानकारी तक नहीं। आज भी वे कपड़े का इस्तेमाल करती हैं। गंदे कपड़े के कारण उन्हें कई बार इंफेक्शन भी हो जाता है।

मानुषी ने उस कार्यक्रम में ही कह दिया था कि भारत के समाज में सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि लोग सेनेटरी नैपकिन के बारे में बात भी नहीं करना चाहते। महिलाएं शर्माती हैं। वह इसे लेकर जागरूकता मिशन से जुड़ी है और उन्हें उम्मीद है कि लोग इस मसले को लेकर जल्द ही जागरूक होंगे।

 

 

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