Thursday , December 2 2021

हम याचिका पर बहस के लिए भी तैयार हैं और अवमानना याचिका पर कार्यवाही के लिए भी

-एम.पी. डब्ल्यू. एसोसिएशन का प्रशिक्षण की मांग को लेकर बेमियादी सत्याग्रह आंदोलन 40वें दिन भी जारी

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ। संविदा एम.पी.डब्ल्यू. को प्रशिक्षण को लेकर चल रहे मुकदमे में  उच्च न्यायालय के अंतरिम आदेश और स्थगन आदेश एमपीडब्ल्यू के पक्ष में होने तथा शासन द्वारा लाई गई विशेष अपील खारिज होने के बावजूद शासन फिर से न्यायालय में बहस कराना चाहता है। न्यायालय में बहस के लिए हम लोग तैयार हैं। अन्यथा की स्थिति में आदेशों की अवमानना याचिका के लिए कदम बढ़ाने पर एसोसिएशन को मजबूर होना पड़ेगा।

यह बात एम.पी. डब्ल्यू. एसोसिएशन के संरक्षक विनीत मिश्रा ने आज यहां परिवार कल्याण महानिदेशालय पर चल रहे बेमियादी सत्याग्रह आंदोलन में कहीं। कार्य दिवसों पर चलाए जा रहे सत्याग्रह को आज 40 दिन हो गए। विनीत मिश्रा ने बताया कि इस मसले पर उच्च न्यायालय में चल रहे मुकदमों में हुए स्थगन आदेश और अंतरिम आदेश दोनों ही हमारे हक में पारित हैं तथा हमारे खिलाफ शासन द्वारा लाई गई विशेष अपील भी खारिज जो चुकी है। विशेष अपील खारिज होने के बाद भी शासन द्वारा रिट पर बहस कराए जाने पर जोर दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि शासन जब भी चाहेगा रिट पर बहस कराई जाएगी जिसकी पूर्ण तैयारी कर ली गई है अन्यथा अपर मुख्य सचिव के खिलाफ अवमाननावाद की कार्रवाई जिसमें 18 अक्टूबर की तारीख लगी है, उस पर अग्रिम कार्रवाई का कार्य किया जाएगा।

उन्‍होंने बताया कि आज संक्रामक रोगों की बाढ़ आई हुई है चारों तरफ बच्चे, युवा, वृद्ध लोग डेंगू और वायरल फीवर की चपेट में हैं संक्रामक रोगों के नियंत्रण के लिए कर्मचारियों का सर्वथा अभाव है। यह शासन की हठधर्मिता है कि‍ संक्रामक रोगों के नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले संविदा कर्मचारियों के विरुद्ध शासन लड़ाई लड़ रहा है।

डेंगू, मलेरिया, फाइलेरिया जैसी तमाम संक्रामक बीमारियों का नियंत्रण कर्मचारियों के अभाव में नहीं हो पा रहा है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को तमाम परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी अपर मुख्य सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण की है, जिन्होंने संक्रामक रोगों के नियंत्रण करने वाले महत्वपूर्ण कर्मचारियों की पत्रावली को पिछले 3 वर्ष से अधिक समय से नीतिगत निर्णय लेने के नाम पर रोक रखा है, जो कि अत्यंत निंदनीय है।

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