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विपरीत परिस्थितियों में भी स्‍वामी विवेकानंद ने भारत को विश्‍व में विशिष्‍ट पहचान दिलाई

-यूपी के 21 जिलों का भ्रमण करती हुई विवेकानंद संदेश यात्रा वापस लखनऊ पहुंची

-मालवीय सभागार में आयोजित समारोह में उप मुख्‍यमंत्री ब्रजेश पाठक ने व्‍यक्‍त किये विचार

सेहत टाइम्‍स

लखनऊ। उत्‍तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा है कि स्वामी विवेकानंद ने विपरीत परिस्थितियों में भी अपने आध्यात्मिक शक्तियों के बल पर भारत को पूरे विश्व में एक पहचान दी। भारत की गौरवशाली संस्कृति की रक्षा मे हमारे प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी का भी बड़ा योगदान है। उन्‍होंने कोविड महामारी मे भारत की ताक़त का जिक्र करते हुए सभी को शुभकामनाएं दीं।

डिप्‍टी सीएम ने यह बात आज 23 जनवरी को यहां लखनऊ विश्‍वविद्यालय स्थित मालवीय सभागार में विवेकानंद संदेश यात्रा के समापन के मौके पर आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में सम्‍बोधित करते हुए कही। संदेश यात्रा का शुभारम्‍भ बीती 12 जनवरी को लखनऊ से किया गया था, जो कि 21 जिलों, 7 मंडलों से गुजरती हुई नेताजी सुभाष चन्द्र बोस जयंती पर आज 23 जनवरी को लखनऊ पहुंची। यात्रा का आयोजन आज़ादी के 75वें अमृत महोत्सव के अंतर्गत संस्कृति मंत्रालय के सौजन्य से विवेकानंद केन्द्र कन्याकुमारी ने केंद्र के 50 वर्ष पूर्ण होने पर स्वामी विवेकानंद के संदेशों को जन जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से किया था। संदेश यात्रा लखनऊ, बाराबंकी,अयोध्या, बस्ती,संत कबीर नगर, गोरखपुर, कुशीनगर, देवरिया, मऊ, गाजीपुर, वाराणसी, जौनपुर, संत रविदास नगर, प्रयागराज, कौशाम्बी, चित्रकूट, बांदा,फतेहपुर,कानपुर नगर, कानपुर देहात, उन्नाव का भ्रमण करते हुए वापस लखनऊ आयी। इस यात्रा में शोभायात्रा, विमर्श एवं योग, व्यायाम और प्राणायाम की गतिविधियों को संचालित किया गया।

मालवीय सभागार में यात्रा के कर्मवीर यात्रियों का भव्य स्वागत समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम का संचालन प्रो शीला मिश्रा ने किया, अध्यक्षता मेजर जनरल ए के चतुर्वेदी, समारोह के विशिष्‍ट अतिथि विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हनुमंत राव थे। समारोह में यात्रा प्रमुख प्रान्त संचालक दयानंद लाल जी, यात्रा संयोजक भानु प्रताप सिंह मौजूद थे। भानु प्रताप सिंह ने अपने उद्बोधन में पूरी यात्रा प्रारम्भ और पूर्ण होने तक की प्रगति पर प्रकाश डालते हुए यात्रा में शामिल सभी यात्रियों का स्वागत करते हुए बधाई दी।

हनुमंतराव ने अपने उद्बोधन में कहा कि  जीवन दो प्रकार का होता है, सफल जीवन और सार्थक जीवन, सार्थकता जीवन का परम लक्ष्य होना चाहिए, स्वामी विवेकानंद के सन्देश में चार खंभे हैं ये चार दिव्य गुण हैं निरहंकार, निर्ममता, त्याग और सेवा। जो भी इन चार बिंदुओं को अपनाएगा उसका जीवन सार्थक बन जायेगा।

मेजर जनरल अजय कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि  आज मैं अपने श्रद्धा सुमन नेताजी सुभाष चन्द्र बोस को अर्पित करता हूं। स्‍वामीजी ने लगभग 8 हज़ार वर्ष तक की पुरानी गुलामी की मानसिकता तोड़ी, स्वामी जी ने कहा था कि देश को जागने की जरूरत है, इस समाज में कोई भी काम कमतर नहीं है। गर्व से कहो कि हम भारतीय हैं स्वामीजी के इस सन्देश को कई महापुरुषों ने अपनाया, यह सन्देश आज भी प्रासंगिक है। उन्‍होंने कहा कि विवेकानन्द संदेश यात्रा को गंभीरता से लिया जाना चाहिए इसके प्रति तटस्थता ठीक नहीं, जो तटस्थ हैं इतिहास उनको माफ नहीं करेगा। मेजर जनरल ने सन्देश यात्रियों को संबोधित करते हुए कहा कि आप ही चेंज एजेंट हो अपने काम में गर्व करो बदलाव अवश्य आयेगा।

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