Wednesday , January 26 2022

कर्मचारी-शिक्षक संयुक्‍त मोर्चा ने मशाल जुलूस निकालकर जलायी आंदोलन की अलख

-प्रदेश के सभी जिलों में मशाल जुलूस निकालकर जिलाधिकारी को सौंपा मुख्‍यमंत्री के नाम ज्ञापन

-लखनऊ में नगर निगम कार्यालय से जिलाधिकारी कार्यालय तक मशाल जुलूस निकालकर सौंपा ज्ञापन

-मांगें न मानी गयीं तो 9 दिसम्‍बर से पूरे प्रदेश में होगा कार्य बहिष्‍कार

सेहत टाइम्‍स

लखनऊ। कर्मचारी-शिक्षक संयुक्त मोर्चा, उ0प्र0 के आह्वान पर डी.ए. की फ्रीज 3 किस्तों के एरियर का भुगतान करने सहित विभिन्न संवर्गो की वेतन विसंगतियां दूर करने, पुरानी पेंशन लागू करने, निजीकरण समाप्त करने सहित 12 सूत्रीय मांग की पूर्ति के लिए लखनऊ सहित प्रदेश के समस्त जनपदों में मशाल जुलूस निकालकर जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन प्रेषित किया गया।

लखनऊ के कर्मचारी-शिक्षक आज शाम चार बजे नगर निगम मुख्यालय पर एकत्रित होकर जिलाधिकारी कार्यालय तक मशाल जुलूस निकालकर कर्मचारी शिक्षक संयुक्त मोर्चा के अध्यक्ष वी. पी. मिश्रा की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट में हुई सभा में यह भी घोषणा की गई कि 9 दिसम्बर से प्रदेश के लाखों कर्मचारी-शिक्षक कार्य बहिष्कार/कार्यबन्दी करेंगे। मोर्चा के महासचिव शशि कुमार मिश्र ने कहा कि प्रदेश का कर्मचारी अब सौतेले रवैये से नाराज है, इसलिए आंदोलन आवश्यक है।

राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के महामंत्री अतुल मिश्रा ने बताया कि अनेक आन्दोलनों के माध्यम से शासन व सरकार का ध्यान आकृष्ट किया गया था, लेकिन कोई वार्ता तक नहीं हो सकी। फार्मेसिस्ट, आप्टोमेट्रिस्ट, लैब टेक्निशियन सहित अन्य संवर्गों की वेतन विसंगति केन्द्र सरकार द्वारा दूर की जा चुकी है परन्तु समझौतों के बावजूद प्रदेश में अभी वेतन विसंगति लम्बित है। अन्य संवर्गो की वेतन विसंगति एवं वेतन समिति की संस्तुतियों एवं शेष भत्तों पर अक्टूबर 2018 में ही मंत्रिपरिषद से निर्णय कराने का निर्णय लिया गया था जो एक वर्ष बाद भी अभी तक लम्बित है। केन्द्र सरकार द्वारा वित्त पोषित योजनाओं एवं राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं में 3 लाख आउटसोर्सिंग, संविदा, ठेके पर कार्यरत कर्मचारियों के लिए स्थायी नीति बनाने की मांग ठंडे बस्ते में है।

मोर्चा ने राजस्व संवर्ग, सींच पर्यवेक्षक, जिलेदार, स्थानीय निकाय आदि की सेवा नियमावली, एवं तकनीकी पर्यवेक्षक नलकूप सेवा नियमावली, अधीनस्थ वन सेवा नियमावली, वेटेनरी फार्मेसिस्ट की सेवा नियमावली प्रख्यापित करने, सभी संवर्गों का पुनर्गठन, जिनकी सेवा नियमावली प्रख्यापित नहीं हैं, उसे प्रख्यापित कराने का निर्णय लिया गया था। निर्णय के बाद मोर्चा लगातार शासन का ध्यान आकृष्ट करता रहा है। शासन द्वारा संविदा, आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के लिए स्थाई नीति का निर्णय फरवरी 2019 में पूर्ण कर लिया गया लेकिन अभी तक मंत्रिपरिषद से पारित नहीं कराया गया, जिसके कारण संविदा व आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की स्थायी नीति जारी न होने से कर्मचारियों का लगातार शोषण हो रहा है। 

शासन द्वारा यह भी निर्णय लिया गया था कि एक समान शैक्षिक योग्यता वाले संवर्गों को एक समान वेतन भत्ते अनुमन्य किए जायें चाहे वे किसी भी विभाग में कार्यरत हों, परन्तु वित्त विभाग द्वारा अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हो सकी है। बार-बार समझौतों के बावजूद कर्मचारियों की कैशलेस चिकित्सा सुविधा अभी तक प्रारम्भ नहीं हो सकी।

उ0प्र0 स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ के प्रान्तीय प्रवक्ता सै0 कैसर रज़ा द्वारा बताया गया कि प्रदेश की स्थानीय निकायों की मांगों पर वर्षों से कार्यवाही लम्बित है, वहीं फार्मासिस्ट फेडरेशन, उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष, मोर्चे के प्रवक्ता सुनील यादव एवं डी0पी0ए0 के अध्यक्ष संदीप बड़ोला ने बताया कि प्रदेश के समस्त विधाओं के फार्मासिस्ट चिकित्सालयों की रीढ़ के रूप में कार्य कर रहें है, जिनकी मांगों पर उच्च स्तर पर लिये गये निर्णय के बाद भी क्रियान्वयन लम्बित है। वही प्रदेश के रोडवेज कर्मचारियों तथा विकास प्राधिकरण, उ0प्र0 राज्य निगम के कर्मचारियों आदि की सेवा सम्बन्धी तथा अन्य वेतन विसंगतियां, विनियमितीकरण आदि की समस्याओं का हल न निकलने के कारण रोडवेज कर्मचारी परिषद के महामंत्री गिरीश चन्द्र मिश्र एवं उ0प्र0 राज्य निगम कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष मनोज मिश्र ने भी रोष व्यक्त किया।

मशाल जुलूस में परिषद के संगठन प्रमुख डॉ॰ के॰के॰ सचान, अध्यक्ष सुरेश रावत, निगम महासंघ के महामंत्री घनश्‍याम यादव, माध्यमिक शिक्षक संघ के महामंत्री, नन्द किशोर मिश्र, जवाहर-इन्दिरा भवन कर्मचारी वेलफेयर ऐसोसिएशन की अध्यक्ष मीना सिंह एवं यू0पी0 सिंह, राजकीय नर्सेज संघ के महामंत्री अशोक कुमार, डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन के महामंत्री उमेश मिश्र व कोषाध्यक्ष  अजय पाण्डे, फार्मासिस्ट फेडरेशन के महामंत्री अशोक कुमार,  कुष्ठ कर्मचारी संघ के अध्यक्ष सतीश यादव, सहायक वन कर्मचारी संघ के अध्यक्ष मो॰ नदीम महामंत्री अमित श्रीवास्तव, सिंचाई संघ के अध्यक्ष आर॰ के॰ पान्डे, महामंत्री अवधेश मिश्र, राजस्व अधिकारी संघ के महामंत्री नीरज चतुर्वेदी, डेन्टल हाईजिनिस्ट एसोसिऐशन के राजीव तिवारी, वन विभाग मिनिस्ट्रियल कर्मचारी संघ के महामंत्री आशीष पान्डे, बेसिक हेल्थ वर्कर एसोसिएशन के अध्यक्ष धनन्जय तिवारी, महामंत्री एस॰ एस॰ शुक्ला, के॰जी॰एम॰यू॰ कर्मचारी परिषद के अध्यक्ष प्रदीप गंगवार, महामंत्री राजन यादव, संयुक्त एन॰एच॰एम॰ कर्मचारी संघ के महामंत्री योगेश उपाध्याय, आप्टोमेट्रिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष सर्वेश पाटिल, एक्स-रे टेक्नीशियन एसोसिएशन के महामंत्री आर0के0पी0 सिंह, डा0 आर0एम0एल0 लोहिया अस्तित्व बचाव मोर्चा के अध्यक्ष डी0डी0 त्रिपाठी, राम मनोहर कुशवाहा, अनिल चौधरी, परिषद के मण्डलीय मंत्री राजेश चौधरी, मीडिया प्रभारी सुनील कुमार, सचिव कमल श्रीवास्तव, उत्तर प्रदेशीय सफाई कर्मचारी संघ के प्रमुख महामंत्री जगदीश प्रसाद बाल्मीकि, राहुल बाल्मीकि, उ0प्र0 जल संस्थान कर्मचारी महासंघ के राजेन्द्र यादव, नगर निगम आर0आर0 कर्मचारी संघ शैलेन्द्र तिवारी, जल संस्थान एवं नगर निगम चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी संघ के शैलेष धानुक, उ0प्र0 नगर निगम चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी संघ के राम कुमार रावत तथा लखनऊ जल संस्थान कर्मचारी परिषद के नितिन त्रिवेदी आदि बड़ी संख्या में पदाधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

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