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केजीएमयू में पहली बार छह वर्ष के बच्चे की हुई गुर्दे की रोबोटिक सर्जरी पायलोप्लास्टी

-सर्जरी करने वाले पीडियाट्रिक सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो जेडी रावत व टीम को कुलपति ने दी बधाई

 

सेहत टाइम्स

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बाल चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक तकनीकी प्रगति दर्ज करते हुए, किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU), लखनऊ के पीडियाट्रिक सर्जरी (बाल रोग शल्य चिकित्सा) विभाग ने पहली बार रोबोटिक असिस्टेड लेफ्ट पायलोप्लास्टी (बाएं गुर्दे की रोबोटिक सर्जरी) को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। यह जटिल सर्जरी एक छह साल के बच्चे पर की गई, जो बच्चों के इलाज में अत्याधुनिक और न्यूनतम चीरे वाली (minimally invasive) चिकित्सा तकनीक लाने की दिशा में KGMU की एक बड़ी उपलब्धि है।

-कई अस्पतालों में दिखाया, पकड़ में नहीं आयी बीमारी

विभागाध्यक्ष प्रो जेडी रावत के अनुसार ग्राम रावतपार क्रिशगंज के रहने वाले जावेद अहमद ने अपने 6 वर्षीय पुत्र के इलाज के लिए कई अस्पतालों में दिखाया किन्तु उन्हें बीमारी के सम्बन्ध में सटीक जानकारी एवं इलाज की राय प्राप्त नहीं हो सकी जिसके कारण वे केजीएमयू के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग की ओपीडी में आये। यहां आवश्यकतानुसार उसकी जांचे करायी गयीं जिससे ज्ञात हुआ कि बच्चे के बाएं गुर्दे में सूजन थी (गुर्दे और मूत्रनली के जोड़ पर रुकावट) की गंभीर समस्या से पीड़ित था। उन्होंने बताया कि बच्चे को को 8 जून, 2026 को विभाग में भर्ती कराया गया था। बच्चे की स्थिति के अनुसार उनके माता-पिता को रोबोटिक विधि से सर्जरी की सुविधा के बारे में बताया गया।

यह आधुनिक रोबोटिक सर्जरी 10 जून, 2026 को मुख्य सर्जन प्रोफेसर जे०डी० रावत के नेतृत्व में एक बेहद अनुभवी मल्टी-डिसिप्लिनरी टीम द्वारा संपन्न की गई। इस सर्जिकल टीम में प्रो. सुधीर सिंह, डॉ. गुरमीत सिंह, डॉ. शोभा सिंह और डॉ. मनीष राजपूत शामिल रहे। सर्जरी के दौरान मरीज को एनेस्थीसिया देने और उसकी सघन देखभाल की जिम्मेदारी डॉ. शशांक और उनकी समर्पित टीम ने पूरी की, जबकि नर्सिंग टीम में रीता, अन्जू, संजय शामिल थे। मरीज की स्थिति में तेजी से सुधार हुआ, जिसके बाद उसे डिस्चार्ज कर दिया गया।

इस ऐतिहासिक सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए KGMU की कुलपति प्रोफेसर सोनिया नित्यानंद ने पूरी सर्जिकल और एनेस्थीसिया टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा, “पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग द्वारा की गई इस बीमारी की पहली रोबोटिक सर्जरी संस्थान के लिए एक गौरवपूर्ण क्षण है।