अर्थराइटिस के इलाज में अंग्रेजी दवा की भूमिका सिर्फ 20 प्रतिशत

 

 

विश्व अर्थराइटिस दिवस पर निकलेगी साइकिलथान, योग व वाक रैली

 

लखनऊ. अर्थराइटिस के उपचार में अंग्रेजी दवाओं की भूमिका सिर्फ 20 प्रतिशत है जबकि 80 फीसदी भूमिका योग, साइकिल और पैदल चलने की है. इसी से अंदाज लगाया जा सकता है कि किसी भी प्रकार से व्यायाम कितना आवश्यक है. एक पत्रकार वार्ता में यह जानकारी अर्थराइटिस फाउंडेशन ऑफ़ लखनऊ के उपाध्यक्ष डॉ. संदीप गर्ग और सचिव डॉ. संदीप कपूर ने दी. पत्रकार वार्ता में अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केके सिंह भी उपस्थित रहे. उन्होंने  बताया कि कल यानी 12 अक्टूबर को विश्व अर्थराइटिस दिवस पर गोमती नगर स्थित हेल्थ सिटी हॉस्पिटल से साइकिलथान, योग व वाक फॉर अर्थराइटिस का आयोजन किया जा रहा है.

 

डॉ. संदीप गर्ग व डॉ. संदीप कपूर ने बताया कि प्रातः 7 बजे शुरू होने वाले इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि प्रदेश के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य राज्य मंत्री डॉ. महेंद्र कुमार सिंह होंगे. अर्थराइटिस रैली को जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा रवाना करेंगे. उन्होंने बताया कि वर्ल्ड अर्थराइटिस दिवस की इस वर्ष की थीम Don’t delay, connect today  रखी गयी है.

 

दोनों चिकित्सकों ने बताया कि अर्थराइटिस के इलाज के लिए फिलहाल घुटना बदलवाने की सलाह दी जाती है, लेकिन अब नए बदलाव के तहत इसका इलाज स्टेम सेल से करने पर कार्य चल रहा है. उम्मीद है जल्द ही इसमें सफलता हाथ लगेगी, इसके तहत अर्थराइटिस के ऐसे मरीज जिनके घुटने पूरी तरह ख़राब नहीं हुए हैं, उनका इलाज किया जा सकेगा. लेकिन यदि घुटने पूरी तरह ख़राब हो चुके हैं तो उन्हें बदलवाना ही विकल्प है. उन्होंने बताया कि आंकड़ों के अनुसार 10 में से 8 व्यक्ति अर्थराइटिस से परेशान होते हैं. इससे ग्रस्त व्यक्ति को दर्द, चलने-फिरने में परेशानी, जोड़ों में अकडन महसूस होना समेत दूसरी परेशानियां होती हैं.

 

डॉ. गर्ग ने बताया कि एक बड़ा बदलाव यह देखा गया है कि जहाँ पहले 65-70 वर्ष की आयु वाले लोग ओस्टियोपोरोसिस अर्थराइटिस के शिकार होते थे लेकिन अब तो 40-45 वर्ष के लोग भी अर्थराइटिस से ग्रस्त होने लगे हैं. उन्होंने बताया कि इसकी वजह वजन बढ़ना, लाइफ स्टाइल, शरीर में कैल्शियम, विटामिन की कमी होना है.