-एसजीपीजीआई के शिक्षक फोरम के सचिव ने रिटायरमेंट की उम्र 70 वर्ष किये जाने पर जताया विरोध
-सरकार के इस निर्णय पर विरोध जताने के लिए बुलायी जा रही है जनरल बॉडी की बैठक

सेहत टाइम्स ब्यूरो
लखनऊ। संजय गांधी पीजीआईएमएस लखनऊ के फैकल्टी फोरम ने हाल ही में यूपी सरकार ने सेवानिवृत्ति की आयु 70 वर्ष तक बढ़ाने की घोषणा की कड़ी निंदा करते हुए इससे असहमति जतायी है।
एसजीपीजीआईएमएस के फैकल्टी फोरम के सचिव प्रो संदीप साहू ने यहां एक बयान जारी कर फैसले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि यह निर्णय बहुत ही अपमानजनक है और रोगी की देखभाल के लिए लाभप्रद नहीं है, क्योंकि बढ़ती उम्र के चलते होने वाली विभिन्न शारीरिक और मानसिक परेशानियों के कारण उम्रदराज फैकल्टी मरीज की उचित देखभाल करने में सक्षम नहीं होगी।


प्रो साहू ने कहा है कि ऐसे वयोवृद्ध फैकल्टी के पास संस्थान और अस्पताल की गुणवत्ता और सेवाओं में सुधार के लिए न तो नई ऊर्जा होती है और न ही आधुनिक दृष्टि। उन्होंने कहा है कि बढ़ती उम्र के साथ पुराने फैकल्टी में शिक्षण पाठ्यक्रमों में सुधार के लिए शिक्षण और प्रशिक्षण के नए तरीकों का अभाव है।
उन्होंने कहा बढ़ती उम्र के चिकित्सक नये संकाय को प्रशासनिक कौशल प्राप्त करने से रोक देगी क्योंकि वह नहीं चाहेगी कि अस्पताल में देखरेख के लिए दूसरी पंक्ति तैयार हो। उनका कहना है कि इस निर्णय के बाद नए फैकल्टी मेंबर्स का पद सृजित नहीं किया जाएगा, जिससे नए छात्रों को फैकल्टी जॉब का मौका नहीं मिलेगा।
प्रो साहू ने कहा है कि देश के बाकी राज्यों में कहीं भी यह अविश्वसनीय तरीका लागू नहीं है। उन्होंने कहा कि फैकल्टी की बढ़ती उम्र में केवल बूढ़े हाथ और बूढ़ा दिमाग बचता है जो रोगियों की देखभाल, शिक्षण कार्य, शोध कार्य को प्रभावी ढंग से करने के लिए चिकित्सकीय और शारीरिक रूप से फिट नहीं है।
उन्होंने फोरम की ओर से कहा कि हम सरकार के इस फैसले की कड़ी निंदा करते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को जनता और युवा डॉक्टरों के भविष्य और कैरियर के व्यापक हित के लिए सेवानिवृत्ति की आयु में वृद्धि नहीं करनी चाहिए और प्रत्येक विभाग में रोटेशन से हेडशिप देने को भी लागू करना चाहिये ताकि सभी संकाय सदस्यों को प्रशासनिक अनुभव प्राप्त हो सके। उन्होंने कहा कि हमारा फोरम इस पर कड़ा विरोध जताने के लिए तत्काल जनरल बॉडी मीटिंग बुला रहा है।
