Thursday , September 29 2022

पोषणयुक्‍त खानपान की कैंसर के इलाज में अहम् भूमिका : शिवशंकर

-मुंबई कैंसर इंस्‍टीट्यूट के क्‍लीनिकल न्‍यूट्रीशनिस्‍ट और डायटीशियन ने न्‍यूट्रीकॉन 2022 में दी सलाह

सेहत टाइम्‍स

लखनऊ। अच्‍छा न्‍यूट्रीशन देने से कैंसर के पेशेंट का आगे का ट्रीटमेंट कितना अच्‍छा हो सकता है। उनके उपचार में न्‍यूट्रीशन जब अपना योगदान देंगे तो उनका ट्रीटमेंट कम्‍पलीट होगा, समय पर होगा, और मरीज की आगे की हेल्‍थ भी अच्‍छी रहेगी।

यह सलाह मुंबई के टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल से आये क्‍लीनिकल न्‍यूट्रीशनिस्‍ट और डायटीशियन शिवशंकर तिम्‍मनप्‍याती ने यहां केजीएमयू स्थित कलाम सेंटर में आयोजित न्‍यूट्रीकॉन 2022 में अपने प्रेजेन्‍टेशन में दी। उन्‍होंने कहा कि मरीज का कैंसर का ट्रीटमेंट तो हो जाता है लेकिन बाद की हेल्‍थ उनकी अच्‍छी नहीं रहती है।

इस बारे में सेहत टाइम्‍स से बातचीत में उन्‍होंने कहा कि ट्रीटमेंट के बाद की लाइफ भी अच्‍छी हो, इसके लिए न्‍यूट्रीशन भी अच्‍छा होना चाहिये। उन्‍होंने कहा कि होना यह चाहिये कि जिस दिन भी मरीज इलाज के लिए अस्‍पताल पहुंचे उसकी फाइल बनने के बाद ही एक-दो दिन के अंदर अस्‍पताल में डायटीशियन से मिलकर मरीज के लिए डाइट चार्ट बनवा लेना चाहिये, डायटीशियन मरीज की खुराक और क्‍या खायेंगे, क्‍या नहीं खायेंगे, यह तय कर देती हैं, इससे यह होता है कि एक तरफ इलाज चलता रहता है, दूसरी ओर पौष्टिक आहार भी मिलता रहता है, इससे रिकवरी अच्‍छी होती है।

उन्‍होंने बताया कि अक्‍सर ऐसा होता है कि कैंसर के मरीज को कैंसर के चिकित्‍सक तक पहुंचने में काफी समय लग जाता है, उन्‍हें देर से रेफर किया जाता है, ऐसे में कैंसर बीमारी से उसके शरीर में अनेक प्रकार की कमियां पहले ही हो चुकी होती हैं, ऐसे में उन खामियों को पूरी करने में  पौष्टिक खानपान की एक महत्‍वपूर्ण भूमिका होती है।  

उन्‍होंने कहा कि आपने देखा होगा कि अनेक बार मरीज के 8-10 दिन तक आईसीयू में रहने के बाद उसके स्‍वास्‍थ्‍य में पहले वाली बात नहीं आ पाती है, लेकिन अगर आईसीयू ट्रीटमेंट के दौरान खानपान डायटीशियन की सलाह पर किया जाता है तो मरीज की जनरल कंडीशन अच्‍छी रहती है। उन्‍होंने बताया कि अनेक बार ऐसा होता है कि इलाज के दौरान किसी दवा के असर से मरीज को पेट सम्‍बन्‍धी दिक्‍कतें हो जाती हैं जैसे मोशन क्‍लीयर न होना, या फि‍र दूसरी परेशानियां हो जाती हैं, लेकिन दवा के साथ किस प्रकार का खाना मरीज को दिया जाये, इसकी सलाह जब डायटीशियन से मिलती है, तो इन परेशानियों से बचने में मदद मिलती है।

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