Wednesday , November 30 2022

डॉ सूर्यकांत को हिन्‍दी के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार

-पुरस्‍कार के अंतर्गत मिलेंगे पांच लाख रुपये, शॉल व प्रशस्ति पत्र
 -केंद्रीय हिन्‍दी संस्‍थान ने की विभिन्‍न श्रेणियों के लिए पुरस्‍कारों की घोषणा
डॉ सूर्यकांत

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ। केजीएमयू के रेस्पिरेट्री मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ सूर्यकांत को चिकित्सा क्षेत्र में हिंदी के योगदान के लिए एक राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा यह सम्मान केंद्रीय हिंदी सेवा संस्थान आगरा द्वारा प्रदान किया जाएगा। भारत सरकार के उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत कार्यरत संस्था केंद्रीय हिंदी संस्थान आगरा ने वर्ष 2017 के हिंदी सेवी सम्मान के तहत विभिन्‍न श्रेणियों के पुरस्कारों के लिए 26 लोगों के नाम की घोषणा शुक्रवार 10 अप्रैल को कर दी है। इनमें डॉ सूर्यकांत को आत्माराम पुरस्कार देने की घोषणा की गई है।

यह जानकारी संस्थान के निदेशक प्रो नंद किशोर पांडे द्वारा जारी की गई विज्ञप्ति में दी गयी है। विज्ञप्ति में कहा गया है कि राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हिंदी के विकास, प्रचार, प्रसार और प्रोत्साहन में केंद्रीय हिन्‍दी संस्थान की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। हिंदी राष्ट्रीय एकता और संबंधों की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। राजभाषा, राष्ट्रभाषा और संपर्क भाषा के रूप में इस पर विभिन्न भारतीय भाषाओं में आपकी संवाद को बढ़ाते हुए भारत की समावेशी संस्कृति के विकास की भी जिम्मेदारी है। यही तथ्‍य केंद्रीय हिंदी संस्थान की स्थापना और इसके हर कार्यक्रम के मूल में विद्यमान रहा है।

ज्ञात रहे कि डॉ सूर्यकांत केजीएमयू के ऐसे चिकित्सक हैं जिन्होंने चिकित्सा के क्षेत्र में हिंदी को बढ़ावा देने के लिए पिछले 30 वर्षों में उल्लेखनीय योगदान दिया है। वर्ष 1991 में डॉ सूर्यकांत ने अपने एमडी पाठ्यक्रम की थीसिस हिंदी में जमा की थी जोकि उत्तर प्रदेश विधानसभा के एक विशेष प्रस्ताव के पश्चात ही स्वीकृत हो पाई थी जिसके लिए डॉ सूर्यकांत को एक वर्ष संघर्ष करना पड़ा था वर्ष 1992 में डॉ सूर्यकांत द्वारा चिकित्सा जगत में पहला शोध पत्र हिंदी भाषा में प्रस्तुत किया गया डॉ सूर्यकांत में हिंदी भाषा में चिकित्सा संबंधी 500 से अधिक लेख विभिन्न समाचार पत्रों एवं पत्रिकाओं में प्रकाशित किए हैं। इसके साथ ही हिंदी भाषा में चिकित्सा संबंधी उनकी 7 पुस्तकें भी हैं अपने रोगियों को उपचार के लिए दिये जाने वाले निर्देश भी हिंदी में दिये जाते हैं हिंदी भाषा में रोगियों एवं परिजनों के चिकित्सीय ज्ञान के लिए रेस्पिरेट्री मेडिसिन विभाग में एक चिकित्सा ज्ञान वाटिका का भी निर्माण डॉ सूर्यकांत द्वारा 2012 में किया गया डॉ सूर्यकांत को चिकित्सा के क्षेत्र में हिंदी भाषा को उन्नत बनाने के लिए अनेकों सम्मान एवं पुरस्कार इससे पूर्व में भी प्राप्त हो चुके हैं। डॉ सूर्यकांत को उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान का विश्वविद्यालय स्तरीय पुरस्कार 2013 में तथा अन्य हिंदी सेवी संस्थानों द्वारा भी सम्मानित किया जा चुका है। डॉ सूर्यकांत देश के पहले चिकित्सक हैं जिन्हें 2018 के विश्व हिंदी सम्मेलन में मॉरीशस में सरकारी प्रतिनिधि के रूप में आमंत्रित किया गया था।