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विस्थापन के समय के संस्मरण सुनाकर आजादी को सहेजने का‍ दिया संदेश

-लोहिया आयुर्विज्ञान संस्‍थान में आजादी का अमृत महोत्‍सव के उपलक्ष्‍य में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस का आयोजन

सेहत टाइम्‍स

लखनऊ। डॉ० राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान द्वारा आज 14 अगस्त को स्वतंत्रता सप्ताह के चौथे दिन, आजादी का अमृत महोत्सव (AKAM) के उपलक्ष्य में देश प्रेम की भावना से ओतप्रोत होकर पूरे हर्षोल्लास व जोशो खरोश के साथ, विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस का विभाजन विस्थापितों के प्रति संवेदना के साथ का आयोजन हुआ। 

विभाजन विभीषिका पर एक संगोष्ठी  का आयोजन भी किया गया जिसमें स्वतंत्रता के 75 वर्षों के दौरान देश के सामाजिक, आर्थिक और समग्र विकास तथा अखंडता-एकता में विस्थापित आबादी के योगदान पर विचार-विमर्श करते हुए विभाजन किस समय के संस्मरण वह यादों को ताज़ा किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्य अतिथि 97 वर्षीय (सन् 1925 में लायलपुर फैसलाबाद, वर्तमान के पाकिस्तान में पैदा हुए) पद्मश्री डॉ नित्यानंद ने की तथा विभाजन के समय अपने परिवार के विस्थापन के समय के संस्मरण साझा किए।

उन्होंने अपने संदेश में संस्थान के युवा एम०बी०बी०एस० और नर्सिंग छात्र-छात्राओं एवं समस्त शैक्षणिक व गैर शैक्षणिक कार्मिकों को उत्साहित करने वाला संदेश दिया कि आप सभी स्वतंत्र भारत का हिस्सा हैं, भारतीय संस्कृति और समाज की सर्वोच्च परंपरा का पालन करें और उसे बनाए रखें। स्वतंत्र भारत के निर्माण खंड बनें। मैं आप सभी से दैनिक जीवन की छोटी-छोटी बातों से ऊपर उठकर सच्चाई और सत्यनिष्ठा के साथ जीवन जीने का आग्रह करता हूं।

डॉ नित्यानंद सी०डी०आर०आई० (सेंट्रल ड्रग रिसर्च इंस्टीट्यूट) लखनऊ के स्थापना निदेशकों में से एक रहे हैं। संस्‍थान के संकाय सदस्‍यों व चिकित्‍सकों ने डॉ नित्‍यानंद के आज के कार्यक्रम में आने को संस्थान के लिए एक ऐतिहासिक घटना बताते हुए उनके सहेली जैसी वैज्ञानिक शोध से उत्पन्न कीर्तिमान स्थापित करने वाली जन कल्याणक गर्भ निरोधक दवा के जनक के रूप में उनकी अतुलनीय उपलब्धियों के विषय में बताया।

अन्य विशिष्ट अतिथियों में लेखक, साहित्यकार, पत्रकार और वर्तमान में विश्व संवाद केंद्र के अध्यक्ष नरेंद्र भदोरिया तथा अशोक सिन्हा की उपस्थिति रही। श्री भदौरिया ने बंटवारे के समय के देश के हालात, आजादी की कीमत की महत्वता के विषय में बताते हुए आगामी पीढ़ी को देश की एकता अखंडता के विषय में प्रतिबंध रहने पर जोर दिया।

शरणार्थी विस्थापितों के परिवार का प्रतिनिधित्व करते हुए संस्थान के पी०एम०आर० विभाग के विभागाध्यक्ष, डॉ० वी०एस० गोगिया ने विस्थापितों के दर्द को बयान करते हुए व स्वयं अपने परिवार के विभाजन के समय संस्मरण सुनाते हुए, हर घर तिरंगा अभियान के पश्चात आजादी का अमृत महोत्सव समापन के उपरांत हर दिल तिरंगा स्लोगन पर जोर दिया।

कार्यक्रम स्थल अपनी पूर्ण क्षमता के साथ खचाखच भरा हुआ रहा तथा कार्यक्रम स्थल में उपस्थिति तथा ऑनलाइन माध्यम से लगभग 500 लोगों  की प्रतिभागिता रही। कार्यक्रम में संस्थान के समस्त शीर्षस्थ प्रशासन, अधिकारीगण शैक्षणिक व शैक्षणिक कार्मिक, नर्सिंग व अन्य पैरामेडिकल संवर्ग, एमबीबीएस एवं नर्सिंग छात्र छात्रा शामिल रहे।

कार्यक्रम प्रातः काल 9:30 बजे से पूर्वाह्न् 11:00 तक संस्थान के प्रशासनिक भवन में भूतल स्थित सभागार में पूरे हर्षोल्लास के साथ हुआ। विभाजन के समय हुई अविस्मरणीय आपदा व त्रासदी के प्रति समर्पित इस कार्यक्रम में प्रातः काल से ही राष्ट्रभक्ति के गीतों के साथ-साथ समस्त संस्थान कार्मिक,  थीम अनुसार, काली सफेद पोशाकों में देशभक्ति के भावों से भरे हुए नज़र आए। आयोजन अध्यक्ष, आजादी का अमृत महोत्सव (AKAM) संपूर्ण कार्यक्रम व छात्र कल्याण अध्यक्ष प्रो एपी जैन तथा आयोजन सचिव माइक्रोबायोलॉजी विभाग की आचार्य प्रो विनीता मित्तल रहीं।

कार्यक्रम का प्रारंभ राष्ट्रगीत वंदे मातरम, देशभक्ति गीतों, विभाजन पीड़ितों के प्रतीक चित्र पर पुष्पांजलि और गणमान्य अतिथियों के स्वागत अभिवादन के साथ हुआ। इस मौके पर विभाजन विभीषिका पर आधारित एक फिल्म वृत्तचित्र का प्रदर्शन एवं प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया जिसे भारत सरकार की औपचारिक वेबसाइट (सांस्कृतिक संस्कृति विभाग द्वारा संचालित) से लिया गया। प्रदर्शनी को कार्यक्रम स्थल में पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के अलावा संस्थान के मुख्य प्रशासनिक भवन के प्रवेश द्वार पर सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए भी रखा गया।

निदेशक प्रो सोनिया नित्यानंद ने इस बात पर जोर दिया कि युवा छात्र स्वतंत्र भारत के निर्माण खंड हैं। हमें इसे केवल स्वतंत्र भारत के बजाय एक प्रगतिशील भारत बनाना है। उन्होंने आयोजन को सफल बनाने के लिए कड़ी मेहनत के लिए आयोजन टीम को बधाई दी। उन्होंने इस वर्ष 2022 से 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में घोषित कर उसके स्मरण किए जाने का प्रधानमंत्री के प्रेरणा स्वरूप तथा उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री एवं संस्थान की कुलाध्यक्ष राज्यपाल के प्रति आभार व्यक्त किया।

संगोष्ठी की शुरुआत प्रोफेसर एपी जैन के जोशीले उद्बोधन के साथ हुई जिसने वहां पर उपस्थित सभी की रगों में जोश भर दिया। उन्होंने कार्यक्रम परिचय तो दिया ही साथ ही में विभाजन विभीषिका को स्मरण रखने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि देश के बंटवारे के समय आजादी से पूर्व टुकड़े करने के पश्चात भी देश की विविधता में एकता बरकरार है और आगे एकता और अखंडता के लिए यह आवश्यक है कि धर्म-जाति के भेदभाव से ऊपर उठकर एक साथ समग्र सामूहिक विकास की ओर कदम बढ़ाएं जाएं।

डॉ जैन ने भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की विभाजन पर आजादी अभी अधूरी है  कविता के माध्‍यम से छात्र-छात्राओं और युवा पीढ़ी को संदेश दिया कि वे देश का भविष्य हैं और जैसा कि भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था कि जब तक गिलगित, बलूचिस्तान और देश के कई हिस्से परतंत्र हैं तब तक आजादी अधूरी है, इसलिए देश की युवा पीढ़ी को अपनी अखंडता और एकता बनाए रखते हुए राष्ट्र निर्माण और अधूरी आजादी को पूर्ण करने का स्वप्न संकल्प लेना चाहिए तथा इसका भी विशेष ध्यान रखना चाहिए कि भविष्य मे ऐसी किसी विभीषिका की पुनरावृत्ति न हो।

कार्यक्रम का समापन आयोजन सचिव प्रो विनीता मित्तल के धन्यवाद प्रस्ताव,  प्रो एपी जैन द्वारा स्वतंत्रता सप्ताह के आगामी तीन दिवसीय कार्यक्रम सारणी की घोषणा व राष्ट्रगान के साथ हुआ।

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