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सावधान, दिनभर में दो घंटे से ज्‍यादा वीडियो गेम आपको दे रहा है मानसिक बीमारियां

WHO ने बीमारियों की नयी लिस्‍ट जारी की जिसमें Video Game Addiction को एक Mental disorder माना

पहले कम्‍प्‍यूटर पर, फि‍र लैपटॉप और अब तो स्‍मार्ट फोन पर भी वीडियो गेम खेलना कोई बड़़ी बात नहीं रही, लेकिन बड़ी बात बतायी है विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन ने अपनी रिपोर्ट में। इसके अनुसार रोजाना दो घंटे से ज्यादा वीडियो गेम  खेलना  किसी भी व्यक्ति को मानसिक बीमारी की ओर धकेल सकता है।  रिपोर्ट में कहा गया है कि  पूरे दिन में 2 घंटे से ज़्यादा वीडियो गेम खेलते हुए लगातार कई महीने बीत चुके हैं तो ये मान लीजिए कि व्यक्ति मानसिक रूप से बीमार होने वाला है….और उसे इलाज की ज़रूरत पड़ सकती है .

 

WHO ने बीमारियों की एक नई लिस्ट जारी की है जिसका नाम है ICD ( International Classification of Diseases) इस लिस्ट में  Video Game Addiction को एक Mental disorder माना गया है. आज के दौर में मेडिकल साइंस हर बीमारी का इलाज करने का दावा करती है लेकिन लोगों की आदतों से होने वाली मानसिक बीमारी का इलाज करना बहुत मुश्किल होता है. इस तरह की बीमारियों का इलाज काफी हद तक आपके हाथ में होता है.

 

WHO के मुताबिक Gaming disorder से मतलब है कि जब कोई इंसान लगातार और बार बार Video Game खेलता है और इस दौरान..उसका अपने दिमाग पर नियंत्रण नहीं रहता..यानी Game खेलना जीवन के दूसरे कार्यों और प्राथमिकताओं से भी ऊपर हो जाता है. अगर ऐसी हालत….कम से कम एक साल तक बनी रहती है तो इसे Gaming Disorder माना जाएगा

नींद और खाने-पीने में बदलाव

रिपोर्ट में कहा गया है कि इस बीमारी में नींद और खाने- पीने की आदतों में ज़बरदस्त बदलाव होते हैं . इसके बाद मानसिक लक्षणों की बारी आती है – जैसे बात- बात पर गुस्सा आना . वीडियो गेम में हुई हार को सहन न कर पाना और जीतने की ज़िंद में कई घंटों तक गेम खेलना . परिवार के लोगों से बातचीत कम कर देना . ये सारे लक्षण इस बात का संकेत हैं कि आप anxiety and depression जैसी मानसिक बीमारियों की तरफ बढ़ रहे हैं. वैसे भारत में ये समस्या बहुत तेज़ी से फैल रही है. वर्ष 2011 में Assocham ने देश के चार शहरों…दिल्ली, मुंबई, जयपुर और पटना में एक सर्वे किया जिसमें पाया गया कि इन शहरों में रहने वाले 82 प्रतिशत बच्चे.. हफ्ते में 16 से 18 घंटे Video Game खेलते हैं। इनमें से 76 प्रतिशत बच्चे लड़ाई और हिंसा वाले गेम…खेलना पसंद करते हैं. मनोवैज्ञानिकों के मुताबिक इस तरह के Games बच्चों में गुस्सा और हिंसक भावनाओं को बढ़ाते हैं।

 

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