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मरीज-तीमारदारों से वार्ता के समय सहानुभूतिपूर्वक सुनने की कला सीखनी आवश्यक

-एसजपीजीआई में कार्य नैतिकता विषय पर कार्यक्रम में हॉस्पिटल कार्मिकों को दी गयी सलाह

सेहत टाइम्स

लखनऊ। संजय गांधी पीजीआई, लखनऊ में 29 नवंबर को एक महत्वपूर्ण विषय कार्य नैतिकता पर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें संस्थान के रिसेप्शनिस्ट, जूनियर रिसेप्शन ऑफिसर, जनसंपर्क अधिकारी, मेडिकल सोशल वर्कर और नर्सिंग स्टाफ ने भाग लिया।

इस अवसर पर बोलते हुए, एसजीपीजीआईएमएस के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक प्रोफेसर देवेंद्र गुप्ता ने मरीजों के दृष्टिकोण और उनकी भावनाओं को समझने और इस प्रकार उन्हें हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए किसी भी अस्पताल में संचार कौशल के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “इन कार्यक्रमों का उद्देश्य अच्छे संचार कौशल विकसित करना है और इन्हें नियमित अंतराल पर आयोजित किया जाना चाहिए।”

चिकित्सा अधीक्षक प्रोफेसर आर. हर्षवर्धन ने अस्पताल व्यवस्था में गैर-मौखिक संचार की भूमिका पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा, “शब्द केवल अपनी अभिव्यक्ति का एक माध्यम हैं, लेकिन हम कैसे संवाद करते हैं, यह अधिक महत्वपूर्ण है।” हमें मरीजों और उनके परिचारकों के साथ संवाद करते समय शांत, संयमित और भावनात्मक रूप से संतुलित रहना चाहिए। उन्होंने सुनने की कला सीखने की आवश्यकता पर बल दिया।

लखनऊ विश्वविद्यालय के जनसंचार एवं पत्रकारिता विभाग के प्रोफेसर डॉ. मुकुल श्रीवास्तव ने अतिथि व्याख्यान दिया और अस्पताल में कार्य नैतिकता पर बात की। उन्होंने बेहतर परिणामों और किसी भी संगठन की प्रतिष्ठा में वृद्धि के लिए अनुशासन, समय प्रबंधन व व्यवहार कौशल विकसित करने की आवश्यकता पर बहुत प्रभावी ढंग से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “एक संतुष्ट मरीज हज़ार विज्ञापनों के बराबर होता है।”

उन्होंने बताया कि मरीज का सम्मान सर्वोच्च है और हमें हर संभव तरीके से इसकी रक्षा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मरीज और उनके तीमारदारों के साथ पहली बार संपर्क में आने वाला हर व्यक्ति एक शॉक ऑब्जर्वर की तरह काम करता है और उन्हें सहानुभूतिपूर्वक सुनने की कला सीखनी चाहिए। कार्यक्रम में जन सम्पर्क अधिकारी कुसुम यादव ने भी सम्बोधित किया। कार्यक्रम का समापन ओपन हाउस के साथ हुआ। कार्यक्रम में 100 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया।

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