-न्यूरोसर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो विजेन्द्र कुमार और उनकी टीम ने की सर्जरी, विश्व के आधुनिकतम न्यूरोनेवीगेशन मशीन का किया गया इस्तेमाल

सेहत टाइम्स
लखनऊ। कल्याण सिंह सुपर स्पेशियलिटी कैंसर इंस्टीट्यूट (केएसएसएससीआई) के न्यूरोसर्जरी विभाग ने 16 वर्षीय किशोर की ब्रेनस्टेम ट्यूमर की सर्जरी कर उसे नयी जिन्दगी देने में बड़ी सफलता हासिल की है। ब्रेनस्टेम दिमाग का वह भाग होता है जो पूरे शरीर की गतिविधियों पर नियंत्रण रखता है। इस जटिल सर्जरी की सफलता पर निदेशक डॉ एमएलबी भट्ट ने पूरी टीम को बधाई दी है।
यह जानकारी देते हुए कल्याण सिंह कैंसर संस्थान के चीफ मेडिकल सुपरिंटेंडेंट व न्यूरोसर्जरी विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर विजेंद्र कुमार ने बताया कि ब्रेनस्टेम दिमाग का वो हिस्सा होता है जो कंप्यूटर की तरह सारेे अंगों को सही तरह से काम करते रहने को कमांड देता है। यहीं से हजारों पतली-पतली बालो से भी महीन नसें सारे शरीर में जाती हैं, जिसके माध्यम से यह सभी अंगों को संचालित करता है। जब ब्रेनस्टेम में ट्यूमर बन जाता है तो उसका असर शरीर के सभी अंगों पर पड़ता है।
ये हैं शुरुआती लक्षण
लक्षणों के बारे में प्रो विजेन्द्र ने बताया कि हाथ पैरों में कमजोरी आना, खाना निगलने में तकलीफ होना, आँखों का टेढ़ा होना व मुॅह का तिरछापन होना, ये लक्षण शुरुआती होते हैं। बाद में मरीज बेहोश होकर कोमा में चला जाता है और शरीर का कोई भी अंग काम नहीं करता। उन्होंने बताया कि चारों तरफ महीन नसों से घिरे रहने के कारण ब्रेनस्टेम ट्यूमर को सर्जरी से निकालना बहुत जोखिम भरा होता है, क्योंकि जरा सी चूक से मरीज की जान जा सकती है या वो हमेशा के लिए अपंग हो सकता है।
न्यूरोसर्जिकल ऑपरेटिंग माइक्रोस्कोप का भी इस्तेमाल
प्रो विजेंद्र कुमार ने बताया कि हाल ही में एक ऐसी ही जटिल सर्जरी में उनको कामियाबी मिली है। यह मरीज कुंडा जिले से आया था तथा बाहर कई डॉक्टर्स ने हाई-रिस्क ऑपरेशन होने की वजह से ऑपरेशन करने से मना कर दिया था। कैंसर संस्थान आने पर परिवार की सहमति मिलने के बाद ऑपरेशन की तैयारी की गयी। आठ घंटे चले इस ऑपरेशन में विश्व की सबसे आधुनिक तकनीक से युक्त न्यूरोनेविगेशन सिस्टम जिसकी कीमत 3 करोड़ है, का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने बताया कि यह मशीन स्वतः ही सर्जन को सही रास्ता दिखाती है, जिससे नाजुक नसों को नुकसान पहुचाये बिना ही ट्यूमर को निकालने में मदद मिलती है। इसके साथ ही पांच करोड की कीमत वाले लेटेस्ट नर्व मॉनिटरिंग सिस्टम व अत्याधुनिक न्यूरोसर्जिकल ऑपरेटिंग माइक्रोस्कोप का भी इस्तेमाल हुआ। इस माइक्रोस्कोप की मदद से बाल जैसे महीन नसों को आकार में बड़ा करके देखा जा सकता है और उन्हें बचाया जा सकता है। प्रो विजेंद्र कुमार के अलावा उनकी टीम के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ अमित कुमार उपाध्याय, डॉ रवि रंजन व डॉ संजीव ने मिल कर इस जटिल ऑपरेशन में सफलता हासिल की। ऐनेस्थिसिया टीम से डॉ रिचा राय व अन्य का सहयोग रहा।
निदेशक ने दी पूरी टीम को बधाई
ब्रेनस्टेम ट्यूमर जैसे खतरनाक कैंसर का सफल ऑपरेशन होने पर संस्थान के निदेशक, प्रोफेसर मदन लाल भट्ट ने पूरी टीम को बधाई दी है। निदेशक द्वारा यह भी अवगत कराया गया कि इस संस्थान के न्यूरोसर्जरी विभाग में अत्याधुनिक मशीने उपलब्ध हैं, जिससे दिमाग के कैंसर से ग्रसित मरीजों का सफल इलाज किया जा रहा है। मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ वरुण विजय ने बताया कि मरीज अब बिलकुल ठीक है और उसे डिस्चार्ज किया जा चुका है।

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