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केजीएमयू का मान : EBSQ ट्रॉमा परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले प्रथम एशियाई-भारतीय ट्रॉमा सर्जन बने डॉ वैभव जायसवाल

-बर्लिन में हुई प्रतिष्ठित परीक्षा पास कर हासिल की ऐतिहासिक उपलब्धि, केजीएमयू का परचम लहराया

सेहत टाइम्स

लखनऊ। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू), लखनऊ के अतिरिक्त प्रोफेसर (सर्जरी) एवं ट्रॉमा सेंटर के डिप्टी मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. वैभव जायसवाल ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। वे पहले एशियाई-भारतीय ट्रॉमा सर्जन बने हैं जिन्होंने यूरोपियन बोर्ड ऑफ सर्जरी क्वालिफिकेशन (EBSQ) परीक्षा को सफलतापूर्वक उत्तीर्ण किया है। यह परीक्षा यूनियन यूरोपेएन देस मेडसिन स्पेशलिस्ट्स (यूरोपियन यूनियन ऑफ मेडिकल स्पेशलिस्ट्स) (UEMS) द्वारा 27 अक्टूबर 2025 को बर्लिन (जर्मनी) में आयोजित की गई थी।

यह प्रतिष्ठित योग्यता सर्जरी में उत्कृष्टता का अंतरराष्ट्रीय मान्यता-चिह्न है और डॉ. जायसवाल को उन चुनिंदा वैश्विक ट्रॉमा सर्जनों की श्रेणी में स्थान प्रदान करती है जिन्हें यूरोपियन बोर्ड द्वारा प्रमाणित किया गया है। परीक्षा के परिणामों की औपचारिक घोषणा प्रो. पॉल एम. रोम्मेंस, चेयरमैन, डिवीजन ऑफ ट्रॉमा सर्जरी, UEMS/EBS, ब्रसेल्स द्वारा की गई।

UEMS द्वारा प्रदान की जाने वाली यह योग्यता फेलोशिप ऑफ द यूरोपियन बोर्ड ऑफ सर्जरी (FEBS) कहलाती है, जो सर्जरी के क्षेत्र में नैतिकता, अकादमिक उत्कृष्टता और नैदानिक दक्षता का वैश्विक प्रतीक मानी जाती है। यह योग्यता अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शैक्षणिक सहयोग, शोध, एवं फैकल्टी एक्सचेंज के नए अवसर प्रदान करती है तथा ट्रॉमा सर्जरी में प्रशिक्षण को विश्वस्तरीय मानकों से जोड़ती है।

केजीएमयू की कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने डॉ. जायसवाल को इस असाधारण सफलता पर बधाई देते हुए कहा कि यह वैश्विक मान्यता भारत की ट्रॉमा सर्जरी और शल्य चिकित्सा के क्षेत्र में बढ़ती प्रतिष्ठा को दर्शाती है तथा केजीएमयू में उच्च स्तरीय प्रशिक्षण और उत्कृष्टता का प्रमाण है। यह ऐतिहासिक सफलता न केवल केजीएमयू के लिए गौरव का विषय है, बल्कि यह भारत की वैश्विक सर्जिकल नेतृत्व और शिक्षा में बढ़ती उपस्थिति का प्रतीक भी है।

इस उपलब्धि पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए केजीएमयू टीचर्स एसोसिएशन (KGMUTA) के अध्यक्ष प्रो. के.के. सिंह ने कहा कि “यह उल्लेखनीय उपलब्धि केजीएमयू और उसके ट्रॉमा सर्जरी विभाग के लिए अत्यंत गौरव का विषय है। इससे विश्वविद्यालय की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा और भी सशक्त होगी तथा भविष्य में अकादमिक और अनुसंधान विकास को नई दिशा मिलेगी।”