कहीं आपका मोबाइल आपको मानसिक परेशानियां तो नहीं दे रहा ?

सभी चिकित्‍सा पद्धतियों के प्रतिनिधित्‍व वाले आरोग्‍य भारती के अध्‍यक्ष ने दीं महत्‍वपूर्ण जानकारियां

 

 

लखनऊ. मोबाइल फ़ोन का अविष्कार अच्छे उद्देश्य के लिए किया गया था. वह अच्छा है भी लेकिन तभी तक जब तक कि हम इसका प्रयोग सीमा में रह कर करें, रोजाना डेढ़ घंटे से ज्यादा इसका प्रयोग स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है.

 

यह बात आज किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के कलाम सेंटर में, आरोग्य भारती अवध प्रांत एवं केजीएमयू के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित एक स्वास्थ्य प्रबोधन कार्यक्रम में मुख्य वक्ता डॉ. अशोक कुमार वार्ष्णेय ने कही. आरोग्य भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार वार्ष्णेय ने कहा कि अविष्कार एक अच्छे उद्देश्य के लिए किया जाता है लेकिन अगर हम किसी भी अविष्कार के प्रयोग की अति कर देते है तो उसके बुरे परिणाम भी सामने आते है।

 

उन्होंने बताया कि एक सर्वे के मुताबिक मोबाइल फोन की वजह से चार गुना मार्ग दुर्घटनाओं में इजाफा हुआ है। आज का 30 वर्ष तक की उम्र का युवा अपने आपको ज्यादा से ज्यादा मोबाइल फोन इत्यादि अविष्कारों से ऑनलाइन रखता है, इससे वो अनचाहे रूप से तमाम मानसिक परेशानियों से ग्रसित हो रहे है। सर्वे बताता है कि 93 प्रतिशत भारतीयों का मोबाइल फोन उसके सोते समय उनके बिस्तर के आस-पास या बिस्तर पर रहता है। इसके अलावा 83 प्रतिशत भारतीय अपने मोबाइल को अपने शरीर के पास रखते हैं, 53 प्रतिशत लोग मोबाइल फोन के वशीभूत हो गए है। उन्होंने कहा कि अगर हम किसी भी मोबाइल फोन का इस्तेमाल 1.30 घण्टे से ज्यादा करते है तो वो स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाता है।

उन्होंने यह भी कहा कि स्वास्थ्य की दृष्टि से वर्तमान में हमारा भोजन भी अस्वास्थ्यकर है। हम भोजन गरम खाते है किन्तु पानी ठंडा पीते है। गरम भोजन जल्द सुपाच्य होता है किन्तु हम खाते समय ठंडा पानी पीकर उसे अपाच्य कर देते है। हमे जाड़े में गुनगुना पानी पीना चाहिए जो कि शरीर के तापमान से 5 डिग्री सेल्सियस ज्यादा होना चाहिए। ल्यूकोडर्मा जैसी बीमरियां भी विरूद्ध आहार की वजह से होती है। विरूद्ध आहार हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को कम कर देता है जिससे हम जीवाणुओं एवं विषाणुओं के सम्पर्क जल्दी आ जाते हैं. दूध और दही वाली वस्तुओं को एक साथ नहीं खाना चाहिए।

 

प्रकृति द्वारा भौगोलिक दृष्टि एवं जलवायु के अनुसर सारी प्राकृतिक वस्तुओं साग-सब्जियों एवं फलों की व्यवस्था की गयी है किन्तु हम उन खाद्य पदार्थो को सीजन के अनुसर न ग्रहण कर उसे ऋतु विरूद्ध लेते है जो कि हमे किसी प्रकार का स्वास्थ्य लाभ नहीं पहुंचाती है। पनीर की सब्जी बनाकर उसमे नमक डालकर खाना विरुद्ध आहार की श्रेणी में आता है।पनीर का सेवन फीका या मीठा करना चाहिए नमकीन नहीं।सामान्यतः एक स्वस्थ व्यक्ति को 10,000 कदम रोजाना चलना चाहिए। किन्तु एक पुरूष औसतन 6400 कदम और महिला औसतन 4500 कदम ही रोजाना चलती है।सभी चिकित्सा पद्धतियों की कुछ विशेषताएं है तो उनकी सीमाएं भी हैं। शरीर के सारे क्रियाकलाप एक दूसरे के पूरक हैं उसी प्रकार सभी चिकित्सा पद्धतियां भी एक दूसरे की  पूरक हैं। आज लोग एमबीबीएस, एमडी करने के पश्चात आयुर्वेद में भी पढ़ाई कर रहे हैं इसी वजह से आज होलिस्टिक अस्पताल चलने लगे है। हम अपने मन में सकारात्मकता के भाव से रोग मुक्त रह सकते हैं।

 

कार्यक्रम में कुलपति प्रो मदन लाल ब्रह्म भट्ट ने कहा कि इस संगठन का गठन 16 वर्ष पूर्व स्वस्थ व्यक्ति, स्वस्थ परिवार, स्वस्थ ग्राम एवं स्वस्थ राष्ट्र के आधार पर हुआ है। इस संस्था मे सभी पैथी के लोग सम्मिलित हैं। संगठन द्वारा आरोग्य मित्र कार्यक्रम के तहत स्वैच्छिक कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित कर उनको औषधीय पौधों आदि का ज्ञान प्रदान कर स्वास्थ्य के प्रति लोगों सजग और सुरक्षित रखने का प्रयास किया जाता है। प्रकृति में लगभग एक लाख एैसे पौधे है जिसमे औषधि गुण पाये जाते हैं किन्तु हमें 500 से ज्यादा के बारे में ज्ञान नहीं है। संस्था द्वारा विभिन्न संस्कार कार्यक्रमों का संचालन किया जा रहा है जिसमें गर्भावस्था के दौरान कें संस्कार भी शामिल हैं। हम सब लोग स्वेच्छा से चिकित्सा के क्षेत्र में आए हैं इसलिए हमें पूरा जीवन इसके प्रति ईमानदार रहकर अपना श्रेष्ठ देना है।सारे पुरुषार्थो का अर्जन स्वस्थ शरीर के माध्यम से ही किया जा सकता है। हमे खुद स्वस्थ रहकर दूसरों को स्वस्थ रखना है।

 

कार्यक्रम के संयोजक प्रो विनोद जैन, अधिष्ठाता, पैरामेडिकल संकाय, केजीएमयू ने कहा कि किसी भी सुविधा का अतिउपयोग नहीं करना चाहिए। हमें नियमित व्यायाम के साथ के स्वस्थ जीवन चर्या और व्यवहार का पालन करना चाहिए। प्रकृति के अनुसार फलों और सब्जियों का सेवन करें। स्वस्थ जीवन शैली का अंतिम लक्ष्य है कि चिकित्सकों एवं चिकित्साकर्मियों की आवश्यकता ही ना पड़े और इसे हम अपने जीवन चर्या, खान-पान एवं व्यवहार में सुधार कर प्राप्त कर सकते हैं।

 

कार्यक्रम में प्रो मधुमती गोयल, अधिष्ठाता नर्सिंग संकाय, प्रो जीपी सिंह, अधिष्ठाता, छात्र कल्याण, प्रो नर सिंह वर्मा सहित विभिन्न संकायों के संकाय सदस्य एवं पैरामेडिकल, नर्सिंग तथा एमबीबीएस व़ बीडीएस के विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का आयोजन किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के कलाम सेन्टर में किया गया था। इस कार्यक्रम लगभग 600 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।  आयुर्वेद, होम्योपैथिक के चिकित्सकों एन एम ओ एवं सेवा भारती के कार्यकर्ताओं ने भी प्रतिभागिता की।