Wednesday , February 1 2023

हेल्‍प यू एजुकेशनल ट्रस्‍ट ने आयोजित की सिलाई प्रशिक्षण कार्यशाला

अटल की जयंती पर मिष्‍ठान वितरण, कविता पाठ के साथ अर्पित की पुष्‍पांजलि

सेहत टाइम्‍स

लखनऊ।  हेल्प यू एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट ने पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी 98वीं जन्म जयंती के उपलक्ष्य में पुष्पांजलि, गरीबों, मजदूरों में मिष्ठान वितरण, त्रैमासिक नि:शुल्क सिलाई प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ व अटल गीतांजलि का आयोजन किया।

यह जानकारी हेल्प यू एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट के प्रबंध न्यासी हर्ष वर्धन अग्रवाल ने प्रेस विज्ञप्ति में देते हुए बताया हैं कि ट्रस्ट के इंदिरा नगर स्थित कार्यालय में “जन्म जयंती आयोजन” कार्यक्रम में ट्रस्‍ट के प्रबंध न्‍यासी तथा ट्रस्ट के स्वयंसेवकों द्वारा लेबर अड्डा, इंदिरा नगर में उपस्थित 250 से अधिक गरीब श्रमिकों को मिष्ठान वितरण किया गया।  इस मौके पर हर्ष वर्धन अग्रवाल, न्यासी डॉ रूपल अग्रवाल, ट्रस्ट के स्वयंसेवकों व सेक्टर 25 के क्षेत्रीय निवासियों द्वारा अटल बिहारी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें सादर नमन किया गया।  हर्ष वर्धन ने इस मौके पर अटल बिहारी के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि देश के समुचित विकास के लिए उनके द्वारा किए गए कार्यों के लिए हम सभी उनके ऋणी हैं व उनको शत-शत नमन करते हैं।

उन्‍होंने बताया कि “त्रैमासिक निशुल्क सिलाई प्रशिक्षण कार्यशाला” के अंतर्गत 22 महिलाओं/ छात्राओं ने पंजीकरण कराया तथा प्रशिक्षण प्राप्त कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने की शपथ ली।

उन्‍होंने बताया कि कविताओं पर आधारित अटल गीतांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के अंतर्गत गीतकार रामायण धर द्विवेदी ने एकल काव्य पाठ किया तथा सभी श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्‍होंने कार्यक्रम का शुभारंभ अटल द्वारा रचित कुछ प्रेरणादायी कविताओं के साथ किया। उन्होंने अटल की मशहूर कविता क्या खोया क्या पाया जग में, “गीत नया गाता हूं”, “बाधाएं आती हैं आए, घिरे प्रलय की घोर घटाएं” की प्रस्तुति दी व उसके बाद स्वरचित कविताएं “मुश्किलों का हल तुम्हें मिल जाएगा, मरुस्थल में जल तुम्हें मिल जाएगा”, “भीत खड़ी करनी छोड़ो, सागर पर सेतु बना डालो”, “अंधियारे में तीर चलाना, कठिन लगन से आंख चुराना”, “दोष सभी अपने सर रखना, श्रेय राम का कह देना”, “जीवन में कोमल रहना, कमजोर नहीं होना”, “जुगनू जैसी जलती बुझती, छोटी-छोटी आशाएं” सुना कर आशावादी विचारों को बल दिया तथा कार्यक्रम के समापन में अटल की एक बहुत ही ख्याति प्राप्त रचना “आओ फिर से दिया जलाएं” प्रस्तुत की।

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