ज्ञान यज्ञ ही पूर्वजों को सच्ची श्रद्धांजलि : उमानन्द शर्मा

गायत्री ज्ञान मंदिर ने स्थापित किया 265वां युगऋषि वांग्मय साहित्य

लखनऊ। गायत्री ज्ञान मंदिर इंदिरा नगर, लखनऊ के विचार क्रान्ति ज्ञान यज्ञ अभियान के अन्तर्गत रजत गल्र्स कॉलेज शक्तिनगर लखनऊ के केन्द्रीय पुस्तकालय में गायत्री परिवार के संस्थापक युगऋषि पं0 श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा रचित सम्पूर्ण 70 खण्डों का 265वां युगऋषि वांग्मय साहित्य स्थापित किया गया। इस साहित्य को श्रीमती कविता महेन्द्रा ने अपने स्व. पूज्य पिता बृज भूषण अरोड़ा की स्मृति में भेंट किया। इस मौके पर उन्होंने संस्थान के पुस्तकालय को वांग्मय एवं सभी छात्र-छात्राओं को ने व्यक्तिगत रूप से ‘अखण्ड ज्योति’ पत्रिका भेंट की।
इस अवसर पर वाङ्मय स्थापना अभियान के मुख्य संयोजक उमानंद शर्मा ने वांग्मय साहित्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ‘‘पूर्वजों की स्मृति में ज्ञान यज्ञ ही उनके लिए सच्ची श्रद्धांजलि है। ज्ञान यज्ञ एक श्रेष्ठ कर्म है प्रत्येक प्रतिभावान व्यक्ति को करना चाहिए।’’ ज्ञान यज्ञ युग धर्म है श्री शर्मा ने बताया कि इस वर्ष के अन्त तक 301 विभिन्न संस्थानों के पुस्तकालयों में ऋषि वांग्मय स्थापना का लक्ष्य निर्धारित है।

इस अवसर पर उमानंद शर्मा, उदयभान सिंह भदौरिया, डॉ. नरेन्द्र देव, डॉ. अनिल भटनागर, आरके0 चौहान, पूरन चन्द्र बेलवाल सहित संस्थान के चेयरमैन डॉ. आरजे सिंह रजत सहित सभी संकाय सदस्य एवं छात्राएं सभागार में उपस्थित थे।