Friday , August 6 2021

सरकारें न बात करती हैं, न रास्‍ता निकालती हैं, अब संघर्ष ही रास्‍ता

-नियमित नियुक्ति के बजाय आउटसोर्सिंग व्‍यवस्‍था क्‍यों ?
-ठेका प्रथा के कर्मचारियों का भविष्‍य अंधकारमय
-इण्डियन पब्लिक सर्विस इम्पलाइज फेडरेशन की राष्ट्रीय कार्यकारणी की बैठक में कर्मचारियों से आंदोलन का आह्वान

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ। केन्द्र एवं राज्यों की सरकारों द्वारा कर्मचारियों का शोषण, उत्पीड़न चरम सीमा पर पहुंच गया है, सातवें वेतन आयोग का पूरा लाभ राज्यों के कर्मचारियों को नहीं दिया गया है। भत्ते केन्द्र सरकार की भांति नही दिये गये हैं, रिक्त पदों पर नियमित नियुक्ति के बजाय आउटसोर्सिंग/ठेका संविदा पर कर्मचारी रखे जा रहे है। ऐसे कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन नहीं मिल रहा है, जो मिलता भी है उसकी कटौती की जा रही है जिससे उनका भविष्‍य अन्धकारमय है। एजेंसी वाला जब चाहता है, उन्हे हटा देता है। सरकार कर्मचारियों की समस्‍याओं पर ध्‍यान दे, इसके लिए अब संघर्ष ही एक रास्‍ता बचा है।

यह बात शनिवार से शुरू हुई इण्डियन पब्लिक सर्विस इम्पलाइज फेडरेशन (इप्सेफ) की राष्ट्रीय कार्यकारणी की बैठक में इप्सेफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष वीपी मिश्र ने कही। इमामबाड़ा के निकट नेहरू युवा केन्द्र में आयोजित की गयी बैठक की अध्‍यक्षता करते हुए वीपी मिश्र ने कहा कि ऐसे कर्मचारियों की सेवा सुरक्षा न्यूनतम वेतन एवं नियमित करने की नीति बनायी जानी चाहिए। इप्सेफ ने राष्ट्रीय वेतन आयोग का गठन, आयकर छूट में वृद्धि आदि मांगों पर कैविनेट सचिव भारत सरकार, राजनाथ सिंह, रक्षामंत्री, प्रधान सचिव, प्रधानमंत्री एवं वित्त मत्री से कई बार वार्ता की तथा ज्ञापन दिया गया परन्तु आयकर में बढ़ोतरी, आउटसोर्सिंग संविदा ठेका कर्मचारियों के लिए नीति बनाने पर सहमति पर कोई निर्णय नहीं हुआ।

श्री मिश्र ने कहा कि सभी राज्यों के कर्मचारियों को संघर्ष करने के अलावा और कोई रास्ता दिखाई नही दे रहा है। सरकारें कर्मचारी संगठनों के साथ बात भी नहीं करतीं है, इसलिए आन्दोलन की रूपरेखा तैयार करने पर विचार करें।

विचार नहीं किया तो भविष्‍य में बहुत उत्‍पीड़न झेलना होगा

बैठक का संचालन राष्ट्रीय महासचिव प्रेम चन्द्र ने किया। उन्‍होंने सदन में मांगों का प्रस्ताव रखते हुए कहा कि इप्सेफ को शक्तिशाली बनाने के लिए सभी राज्यों के पदाधिकारी विचार कर निर्णय लें अन्यथा भविष्‍य में जबरदस्त उत्पीड़न झेलना पड़ेगा। उन्होंने नाराजगी व्यक्त की कि केन्द्र एवं राज्यों की सरकारों ने वर्षों से मिलने वाले 6 भत्ते समाप्त कर दिये है, जिससे आक्रोश बढ़ा है। आंगनबाड़ी, सहायिका, ठेका कर्मचारियों के साथ जबरदस्त अन्याय किया जा रहा है। केन्द्र एवं राज्य सरकारें निजीकरण की व्यवस्था लागू कर रही हैं। कई सार्वजनिक उपक्रम एवं सरकारी विभागों को एक में मर्ज करके कर्मचारियों की छंटनी की योजना बन रही है। उन्होंने सभी राज्यों के पदाधिकारियों से अनुरोध किया कि इप्सेफ की एकता को मजबूत कर आन्दोलन की रूपरेखा तैयार कर सुझाव दें। उन्होंने उत्तर प्रदेश के कर्मचारी शिक्षक संयुक्त मोर्चा एवं राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद द्वारा हर प्रकार की व्यवस्था एवं सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।

इस बैठक में दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखण्ड, उत्तर प्रदेश आदि राज्यों के पदाधिकारी शामिल हुए। प्रारम्भ में दीप प्रज्‍ज्वलन, माल्यार्पण, अलंकरण के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष वी॰पी॰ मिश्र ने सभी उपस्थित पदाधिकारियों व सदस्यों का स्वागत किया।

आज की बैठक में राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद उप्र के अध्यक्ष सुरेश रावत, महामंत्री एवं राष्ट्रीय सचिव अतुल मिश्र, कर्मचारी शिक्षक संयुक्त मोर्चा के महामंत्री शशि कुमार मिश्र, डा0 के॰के॰ सचान, राष्ट्रीय प्रवक्ता सुनील यादव, मोर्चा के महामंत्री शशि कुमार मिश्र, मनोज कुमार मिश्र, सतीश कुमार पांडे, गिरीश मिश्र आदि ने इप्सेफ के आन्दोलन के सभी कार्यक्रमों में पूरा सहयोग देना तय किया। इप्सेफ के वरिष्‍ठ उपाध्यक्ष (हरियाणा), शिव कुमार परासर, विष्‍णु भाई पटेल (गुजरात), सुभाष गांगुडे (महाराष्ट्र) एसबी सिंह (मध्य प्रदेश), ओपी शर्मा (छत्तीसगढ), अमरेन्द्र सिंह (बिहार) ने प्रस्ताव का समर्थन किया। 8 सितम्बर को अन्य प्रदेशों के पदाधिकारी सम्बोधित करेगें तथा भावी आन्दोलन की रूपरेखा तय की जायेगी।

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