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असीम स्नेह, असीम लगाव, असीम सम्मान और असीम भावुकता के साथ दी असीम को विदाई

-केजीएमयू के कंजर्वेटिव डेंटिस्ट्री और एंडोडॉन्टिक्स विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो असीम प्रकाश टिक्कू हुए सेवानिवृत्त

सेहत टाइम्स

लखनऊ। असीम स्नेह, असीम लगाव, असीम सम्मान और असीम भावुकता के सा​थ किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के कंजर्वेटिव डेंटिस्ट्री और एंडोडॉन्टिक्स विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो असीम प्रकाश टिक्कू (एपी टिक्कू) को विभाग के लोगों ने उनके सेवानिवृत्त होने पर विदाई दी। विदाई समारोह का आयोजन आज 2 दिसम्बर को धूमधाम के साथ केजीएमयू के दंत संकाय की नयी बिल्डिंग में आयोजित किया गया। इस मौके पर कुलपति प्रो सोनिया नित्यानंद मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं।

आमतौर पर गंभीर रहने वाली प्रो सोनिया नित्यानंद ने आज जब प्रो टिक्कू के बारे में बोलना शुरू किया तो वह अपने बचपन की यादों में खो गयीं, और खूब प्रफुल्लित हुईं। ज्ञात हो बचपन में प्रो सोनिया रिवर बैंक कॉलोनी में प्रो टिक्कू के पड़ोस में रहती थीं, तथा केजीएमसी से एमबीबीएस करने के समय तक उसी कॉलोनी में रहीं। दोनों परिवारों के बीच काफी आना-जाना था। अपने भाषण में प्रो सोनिया ने कहा कि हमारे परिवारों में बहुत अच्छे सम्बन्ध थे, उन्होंने बताया कि प्रो टिक्कू शुरू से बहुत शरारती थे। प्रो सोनिया ने आज प्रो टिक्कू से बात करते समय उनको उनके निक नेम (सनी) से ही सम्बोधित किया।

भौकाली रहे हैं प्रो टिक्कू

इस मौके पर प्रो टिक्कू को मेडिकल शिक्षा देने वाले डॉ आरएन माथुर सहित अनेक टीचर उपस्थित रहे और सम्बोधित किया। डॉ माथुर ने कहा कि प्रो टिक्कू को मैंने उनके बचपन से देखा है, इनके पिता मेरे दोस्त थे, मैंने इन्हें पढ़ते, बढ़ते, चिकित्सक बनते, स्पोर्ट्समैन बनते देखा है। डेंटल संकाय के डॉ प्रदीप टंडन जो उनके सहपाठी रहे हें, ने पुरानी यादों को ताजा करते हुए कहा कि प्रो टिक्कू शुरू से बहुत दंबंग थे, इनका बहुत भौकाल रहता था। इस मौके पर उपस्थित आईआईटीआर के निदेशक रह चुके प्रो आलोक धावन ने कहा कि पढ़ाई के दिनों में कॉल्विन कॉलेज में प्रो टिक्कू उनके सीनियर थे, उन्होंने हमेशा मुझे हर क्षेत्र में गाइड किया। उन्होंने कहा कि मैं पूरे कॉल्विन परिवार की ओर से उन्हें बहुत बधाई और शुभकामनाएं देता हूंं। एक अन्य फैकल्टी डॉ विजय शाक्य ने कहा कि प्रो टिक्कू ने मुझे पढ़ाया है, कभी एंडोडोंटिक्स का अच्छा केस देखें तो समझ लीजियेगा कि सर का ही सिखाया हुआ है। विभाग के कर्मचारी बनवारी बजाज ने अपने सम्बोधन में प्रो टिक्कू की तारीफों के पुल बांधते हुए कहा कि हम सबकी दिली इच्छा है कि सर अब लखनऊ शहर की सेवा करें, यानी हम लोग भगवान से प्रार्थना करते हैं कि टिक्कू सर लखनऊ के महापौर बनें।

पांच लोगों की आत्मा है प्रो टिक्कू में

प्रो टिक्कू के सेवानिवृत्त होने के बाद उनके स्थान पर विभागाध्यक्ष की कमान सम्भालने वाली डॉ प्रमिला वर्मा ने कहा कि प्रो टिक्कू ने उन्हें पढ़ाया भी है, इसके साथ ही मुझे उनके साथ कार्य करने का भी मौका मिला है, सर ने मुझे पढ़ाई के समय से लेकर नौकरी करने तक मुझे हमेशा गाइड किया है। आज मेरे लिए यह बहुत भावुक पल है। वे मेरे रोल मॉडल हैं। उन्होंने कहा कि प्रो टिक्कू हमेशा कहते हैं कि नजरें कमजोर हो जायें लेकिन निगाहें कमजोर नहीं होनी चाहिये। उन्होंने कहा कि प्रो टिक्कू की कार्यप्रणाली बहुत जबरदस्त है, मैं अपने साथियों के बीच हमेशा कहती हूं कि सर (प्रो टिक्कू) के अंदर पांच लोगों चाणक्य, कर्ण, शकुनि, नारद और बीरबल की आत्माएं हैं। यानी उनकी कार्यशैली में चाणक्य की नीति, कर्ण जैसा दानी पुरुष (खड़े-खड़े महंगी से महंगी वस्तु किसी को बिना हिचक दे देते हैं), शकुनि की तरह पहले लोगों को आपस में उलझाये रखना बाद में बीच में पड़कर सुलझाना, नारद की तरह हर प्रकार की सूचना से अपडेट रहना और बीरबल जैसी होशियारी के साथ अपने कार्य को अंजाम देते हैं। उन्होंने कहा सर विभाग आपकी कमी बहुत महसूस करेगा। विभाग के फैकल्टी डॉ रमेश भारती ने अपने सम्बोधन में कहा कि जिनके नाम में ही असीम हो उसे शब्दों में बांधना संभव नहीं है। प्रो टिक्कू के अंदर लीडरशिप की जबरदस्त क्वालिटी है। उन्होंने कहा कि प्रो टिक्कू के जीवन में शनिवार का दिन बहुत महत्वपूर्ण रहा है, पहला लेक्चर, विभागाध्यक्ष बनना, विवाह का दिन सभी शनिवार को हुआ है।

परिवार को है प्रो टिक्कू पर गर्व

इस मौके पर प्रो टिक्कू की पत्नी डॉ तृप्ति टिक्कू के साथ ही बेटा अर्णव टिक्कू, पुत्रवधू ऐश्वर्या टिक्कू, बेटी परी टिक्कू भी उपस्थित रहीं तथा सभी ने प्रो टिक्कू के प्रति गौरवान्वित महसूस करते हुए अपनी भावनाओं को शब्दों में पिरोया। पत्नी डॉ तृप्ति ने अपनी पुरानी यादें साझा करते हुए प्रो टिक्कू की तारीफ की और कहा कि इनसे (डॉ टिक्कू) मेरी पहली मुलाकात यहीं केजीएमसी में ही हुई थी। बेटा अर्णव, जो कि हाईकोर्ट में वकील है, ने कहा कि आज मुझे सम्बोधित करते हुए ऐसी ही नर्वसनेस हो रही है जैसे कि मैं किसी बड़े जज के सामने अपनी बात कह रहा हूं। उन्होंने कहा कि आज जब मैं किसी के सामने भी अपनी पहचान बताते हुए अपने पिता का नाम बताता हूं तो वे सभी पापा की तारीफ करते हैं, इससे मैं अपने को बहुत सौभाग्यशाली मानता हूं। मेरे पापा मेरे साथ मेरे दोस्त की तरह व्यवहार करते हैं। बहु ऐश्वर्या ने प्रो टिक्कू के सम्मान में अपनी लिखी कविता सुनायी। बेटी परी ने भी अपने प्यारे पापा की शान में अपनी लिखी कविता सुनायी। परी ने कहा कि पापा हमेशा मुस्कराते हुए घर लौटते हैं और प्यार से मुझे गले लगा लेते हैं। मेरे पापा ऐसे हैं कि कोई उनसे एक बार मिल लेता है तो उन्हें भूल नहीं पाता है। परी ने कहा कि मुझे मेरे पापा के अच्छे छात्र, अच्छे शिक्षक, अच्छे स्पोर्ट्समैन होने पर गर्व है।

केजीएमयू ने जीवन में मुझे बहुत कुछ दिया है, इसका कर्जदार हूं : प्रो टिक्कू

प्रो टिक्कू ने अपने सम्बोधन में कहा कि मैं अपने दिल से आप सभी को आभार प्रकट करता हूं। आप सबने बहुत मेहनत, लगन और प्यार से इस कार्यक्रम का आयोजन किया। उन्होंने कहा कि दो दिन व्यक्ति के जीवन में बहुत महत्वपूर्ण होते हैं जब वह नौकरी ज्वॉइन करता है और जब वह सेवानिवृत्त होता है। उन्होंने कहा कि इस संस्थान (केजीएमयू) का मुझ पर बहुत कर्ज है क्योंकि इस संस्था ने मुझे तालीम दी, यहीं से मुझे नौकरी मिली, रोेजगार मिला, इस संस्था से मुझे इज्जत मिली, नाम मिला और यहीं से मुझे मेरी जीवनसाथी मिलीं। मैंने अपनी सारी उम्र संस्थान का कर्ज उतारने में लगा दी लेकिन कर्ज उतार नहीं पाया। मैंने 45 साल की अपनी यात्रा बहुत एन्ज्वॉय की, संस्थान मुझे हमेशा अपना दूसरा घर लगा। उन्होंने कहा कि मैं तो आप लोगों से कहूंगा कि जीवन में हमेशा अपनी मंजिल पर निगाह तो रखना कि कहां जाना है लेकिन साथ ही मंजिल की राहों का सफर तय करते समय लाइफ को ऐन्ज्वॉय जरूर करना, लक्ष्य तक पहुंचने की जल्दी में लाइफ का ऐन्ज्वॉय मत छोडि़येगा। साथ ही यह भी ध्यान रखियेगा कि अपने लक्ष्य तक पहुंचने के लिए किसी को कुचलते हुए आगे मत बढि़येगा। उन्होंने कहा कि किस्मत से ज्यादा और वक्त से पहले किसी को कुछ नहीं मिलता है और न मिलेगा, इसलिए अपना काम पूरी लगन से कीजिये।
प्रो टिक्कू ने कहा कि मेरे खुश रहने का एक राज यह भी है कि मैं किसी भी खराब बात को जल्दी ही भूल जाता हूं, चूंकि जब मेरे मन में खराब बात ही नहीं रहती है तो मैं खुश रहता हूं। इसे मैं अपने ऊपर भगवान की कृपा मानता हूं कि मैं खराब बातों को जल्दी भूल जाता हूं, इससे मेरे अंदर कोई नकारात्मकता नहीं रहती है।

किंग की तरह बग्घी पर सवार करके बैंड बाजों के साथ दी गयी अभूतपूर्व विदाई

समारोह के पश्चात प्रो टिक्कू को अभूतपूर्व तरीके से विदाई दी गयी। दंत संकाय की नयी बिल्डिंग के बाहर सजी-धजी बग्घी प्रो टिक्कू का इंतजार कर रही थी, गाजे-बाजों के साथ प्रो टिक्कू और उनका परिवार बग्घी पर सवार हुआ और काफिले ने दंत संकाय के बगल के रास्ते से होते हुए पीछे गैराज तक आगे-आगे बग्घी और बारात की तरह पीछे-पीछे बड़ी संख्या में बारातियों की तरह प्रो टिक्कू के चाहने वाले, सहकर्मी चल रहे थे। इस दौरान का दृश्य बहुत भावुक था, शब्द आंखों में तैर रहे थे, अनेक सहकर्मियों की आंखें नम थीं, कुछ लोग इस नमी को छिपाने का प्रयत्न कर रहे थे। गैराज तक पहुंचने के बाद प्रो टिक्कू ने परिवार के साथ अपने वाहन पर सवार होकर सभी का अभिवादन करते हुए विदा ली, और उन्हें विदा करने वाले साथियों का कारवां वापस विभाग की ओर चल दिया।

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