Thursday , May 14 2026

बलरामपुर, सिविल सहित सभी अस्‍पतालों में कर्मचारियों ने बांधा काला फीता

-कर्मचारियों के अनियमित स्‍थानांतरण के विरोध में दूसरे दिन भी काला फीता अभियान जारी

सेहत टाइम्‍स

लखनऊ। राज्‍य कर्मचारी संयुक्‍त परिषद उत्‍तर प्रदेश के आाह्वान पर अनियमित स्‍थानांतरण रद करवाने की मांग को लेकर कल 20 जुलाई से शुरू हुआ काला फीता बांधकर विरोध जताने का क्रम आज दूसरे दिन भी जारी रहा। स्वास्थ्य महानिदेशालय द्वारा किए गए अनियमित स्थानांतरण को निरस्त करने की मांग को लेकर  आज दूसरे दिन भी सभी स्वास्थ्य कर्मियों ने काला फीता बांधकर अपना विरोध जताया। 

लखनऊ जनपद शाखा के अध्यक्ष सुभाष श्रीवास्तव ने बताया कि लखनऊ के सभी बड़े चिकित्सालय बलरामपुर ,सिविल ,लोहिया ,रानी लक्ष्मी बाई ,वीरांगना देवी ,सहित सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के सभी कर्मचारियों ने नीति विरुद्ध स्थानांतरण का विरोध किया और उसे निरस्त करने की मांग की । 

बलरामपुर चिकित्सालय में आज जनपद शाखा की समीक्षा बैठक जिला अध्यक्ष सुभाष श्रीवास्तव की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग के अनेक संवर्गों के पदाधिकारी उपस्थित थे। 

पदाधिकारियों ने कहा कि पिछली गलतियों से सबक न लेते हुए एक बार पुनः स्वास्थ्य महानिदेशालय द्वारा स्थानांतरण को कमाई का साधन बनाते हुए अनैतिक रूप से जल्दबाजी में स्थानांतरण सूची जारी की गई है, जो निरस्त होने योग्य है। 

बैठक में परिषद के महामंत्री अतुल मिश्रा ने कहा कि स्वास्थ्य महानिदेशालय द्वारा स्थानांतरण की अंतिम तारीख के बाद विभिन्न संवर्गों के स्थानांतरण की सूची जारी की गई। समायोजन के नाम पर भी स्थानांतरण किया गया है।  श्री मिश्र ने यह भी बताया कि कल लखनऊ जनपद के समस्त चिकित्सालयों में प्रांतीय पदाधिकारी शिरकत करते हुए कर्मचारियों को सम्बोधित करेंगे व सोमवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय पर धरने को सफल बनाने की रणनीति बनाते हुए अपील करेंगे।

बैठक का संचालन करते हुए ज़िला मंत्री संजय पाण्डेय ने कहा कि कुछ  पदाधिकारियों के भी स्थानांतरण किए गए, कई पदाधिकारियों का समायोजन अन्यत्र जनपद कर दिया गया। दांपत्य नीति से आच्छादित कार्मिकों को नीति विरुद्ध तरीके से दूरस्थ जनपदों में अलग-अलग भेजा गया । ऐसा लगता ही नहीं कि यह स्थानांतरण है बल्कि ऐसा प्रतीत होता है कि धन कमाने की लालसा से किया गया कृत्य है । परिषद ने सूची निरस्त न होने पर बड़े आंदोलन की चेतावनी  दी है।