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खर्राटे के इलाज में मददगार डिवाइस के लिए केजीएमयू के डॉ पूरन चंद को मिला पेटेंट

-डॉ पूरन चंद पहले भारतीय चिकित्‍सक, जिन्‍हें ऐसा पेटेंट हासिल हुआ

डॉ पूरन चंद

सेहत टाइम्‍स

लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के दंत संकाय के प्रॉस्थोडोन्टिक्‍स विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ पूरनचंद को खर्राटे की समस्‍या से निजात दिलाने में उपयोग की जाने वाली डिवाइस के निर्माण में मददगार उपकरण के निर्माण के लिए पेटेंट हासिल हुआ है। डॉ पूरन चंद पहले भारतीय चिकित्‍सक हैं जिन्‍हें इस तरह के उपकरण के लिए पेटेंट हासिल हुआ है। PCPD डिवाइस नाम के इस डिवाइस के लिए एक ट्रेड मार्क भी दिया गया है।

यह उपकरण ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया यानि सोते समय खर्राटे से पीड़ित मरीजों के इलाज में सहायक होगा। इस बारे में डॉ पूरन चंद ने बताया कि उपकरण ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया से पीड़ित मरीजों के इलाज के लिए एक उपकरण बनाने में मददगार होगा। उन्‍होंने बताया कि इस डिवाइस की मदद से उपकरण मरीज के निचले जबड़े को कहां पर सेट करना है चिकित्‍सक इसका सही-सही मेजरमेंट कर सकेंगे।

डिवाइस

डा. पूरनचंद ने अनुसंधान और नवाचार विज्ञान और प्रौद्योगिकी की नींव है। मेरे इस नवाचार और डिजाइन को जो पेटेंट देकर सम्‍मानित किया गया है यह सिर्फ मेरी नहीं हमारे संस्‍थान के भी एक महत्‍वपूर्ण उपलब्धि है। ज्ञात हो खर्राटा एक गंभीर बीमारी है और कई बार खर्राटे के चलते सांस रुक जाती है और व्‍यक्ति की मृत्‍यु तक हो जाती है। ऐसे में इसके उपचार के लिए चिकित्‍सक कुछ समय के लिए व्‍यक्ति के जबड़े में डिवाइस इस तरह फि‍ट करते हैं जिससे निचला जबड़ा थोड़ा पीछे रहे जिससे सांस की नली बंद न हो सके। कुछ समय तक इस उपकरण के प्रयोग के बाद व्‍यक्ति की सांस की नली का अवरोध ठीक हो जाता है तब इसे हटा लिया जाता है।

डॉ पूरनचंद ने बताया कि प्रत्‍येक सोमवार को प्रॉस्‍थोडोन्टिक्‍स विभाग में  खर्राटे की समस्या के लिए क्लीनिक शुरू की जायेगी।

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