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राउंड टेबल बैठक में हुई चर्चा, यूपी में कैसी है स्वास्थ्य प्रणाली, क्या सुधारना है और कैसे सुधारेंगे

-राज्य स्वास्थ्य प्रणाली संसाधन केन्द्र-उत्तर प्रदेश की दो दिवसीय बैठक प्रारम्भ

सेहत टाइम्स

लखनऊ। विकसित यूपी 2047 के मद्देनजर राज्य परिवर्तन आयोग – उत्तर प्रदेश की तकनीकी सहायता इकाई के रूप में स्थापित राज्य स्वास्थ्य प्रणाली संसाधन केन्द्र-उत्तर प्रदेश (SHSRC-UP) की रणनीतिक रोडमैप विकास विषयक दो दिवसीय राउंड टेबल बैठक का शुभारम्भ आज 23 जुलाई को लखनऊ स्थित द सेंटरम में हुआ। इस कार्यक्रम का आयोजन एसएचएसआरसी-यूपी, अस्पताल प्रशासन विभाग, संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGIMS), लखनऊ द्वारा राज्य परिवर्तन आयोग, उत्तर प्रदेश के सहयोग से किया जा रहा है।

विमर्श के प्रथम दिवस की थीम “आरोग्य मंथन” तथा उप-थीम “स्वास्थ्य का मानकीकरण एवं प्रगति का मानचित्रणः उत्तर प्रदेश” रही, जिसमें नीति-निर्माताओं, वरिष्ठ प्रशासकों, जनस्वास्थ्य विशेषज्ञों, स्वास्थ्य क्षेत्र के अग्रणी अधिकारियों, शिक्षाविदों, विकास सहयोगी संस्थाओं तथा देश-विदेश के विभिन्न विषय विशेषज्ञों ने सहभागिता की। इस राउंड टेबल बैठक में प्राप्त अनुशंसाएँ एवं निष्कर्ष साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को प्रोत्साहित करने, स्वास्थ्य प्रणाली के सुशासन को सुदृढ़ करने तथा उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता एवं स्वास्थ्य परिणामों में सुधार लाने में सहायक होंगे।

अध्यक्ष, एसएचएसआरसी-यूपी एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी, राज्य परिवर्तन आयोग मनोज कुमार सिंह ने मुख्य वक्तव्य देते हुए राज्य के प्रमुख तकनीकी थिंक टैंक के रूप में विकसित करने की परिकल्पना प्रस्तुत की, जो नीति, अनुसंधान एवं क्रियान्वयन के मध्य प्रभावी सेतु का कार्य करेगा। एसएचएसआरसी-यूपी के सह-अध्यक्ष व एसजीपीजीआई के निदेशक प्रो आरके धीमन ने सभी प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए कहा कि स्वास्थ्य प्रणाली का सुदृढ़ीकरण शासन, शैक्षणिक संस्थानों एवं तकनीकी सहयोगी संगठनों के सतत समन्वय से ही संभव है। अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग अमित कुमार घोष ने स्वास्थ्य क्षेत्र में परिवर्तन के लिए सुशासन, जवाबदेही एवं गुणवत्ता सुधार को प्रमुख आधार बताया।

एसएचएसआरसी-यूपी के कार्यकारी निदेशक एवं एसजीपीजीआईएमएस के चिकित्सा अधीक्षक प्रो. (डॉ.) आर. हर्षवर्धन ने उद्घाटन संबोधन में ऐसी संस्था की आवश्यकता पर बल दिया जो स्वास्थ्य प्रणाली के प्रदर्शन का सतत विश्लेषण कर सके, साक्ष्य उत्पन्न करे तथा नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन में सहयोग प्रदान करे। डॉ. एम. पी. गुप्ता, निदेशक, भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम), लखनऊ ने स्वास्थ्य प्रणाली को सुदृढ़ करने के लिए नेतृत्व, नवाचार एवं प्रबंधन के सिद्धांतों की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।

प्रथम दिवस के वैज्ञानिक सत्र “सेहत संवाद” की थीम “डेटा से दिशाः उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य स्थिति” तथा उप-थीम “हम कहाँ हैं, क्या सुधारना है और आगे की दिशा क्या होगी” रही। इस सत्र में एसडब्ल्यूओसी (SWOC) विश्लेषण, गैप विश्लेषण तथा संदर्भ-आधारित विमर्श के माध्यम से उत्तर प्रदेश की प्रमुख स्वास्थ्य प्राथमिकताओं की पहचान की गई। इन वैज्ञानिक चर्चाओं का उद्देश्य पाँच प्रमुख क्षेत्रों में साक्ष्यों को प्रभावी नीति-निर्देशन में परिवर्तित करना था।

चर्चा की पृष्ठभूमि उत्तर प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों डॉ. पिंकी जोवेल, (मिशन निदेशक, एनएचएम), ऋतु माहेश्वरी, (सचिव, चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण), नेहा शर्मा, (सचिव, चिकित्सा शिक्षा), डॉ. साइरस इंजीनियर (जॉन्स हॉपकिन्स विश्वविद्यालय, अमेरिका) तथा कृतिका शर्मा (विशेष सचिव, चिकित्सा शिक्षा) द्वारा प्रस्तुत की गई, जिसमें वर्तमान स्थिति, नियामकीय व्यवस्था तथा रणनीतिक हस्तक्षेप की आवश्यकता वाले प्रमुख अंतरालों को रेखांकित किया गया।

रोगी सुरक्षा एवं गुणवत्ता सुधार

एक अन्य महत्वपूर्ण सत्र में रोगी सुरक्षा एवं गुणवत्ता सुधार के लिए मानकों, प्रत्यायन (Accreditation), क्लीनिकल गवर्नेस तथा संस्थागत गुणवत्ता आश्वासन की व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई। मानव संसाधन संबंधी चर्चा में कार्यबल योजना, क्षमता विकास, प्रदर्शन निगरानी तथा उपलब्ध मानव संसाधनों के सर्वोत्तम उपयोग पर विशेष बल दिया गया।

वैज्ञानिक चर्चाओं को विभिन्न विषय विशेषज्ञों डॉ. ऋषि सेठी (केजीएमयू), डॉ. विश्वजीत कुमार (आईसीएमआर), डॉ. एम. पी. गुप्ता (आईआईएम लखनऊ), डॉ. अनंतरमन अय्यर (यूपी-टीएसयू), डॉ. अभय भगेल (राज्य परिवर्तन आयोग), डॉ. अर्चना कुमारी (स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय), डॉ. काशीपा हरित (एनएबीएच), डॉ. मन्नान अख्तर, प्रो. एस. वेंकटरमणैया (आईआईएम लखनऊ), डॉ. मधुप बाजपेयी (डब्ल्यूएचओ), जॉन एंथनी (यूपी-टीएसयू) तथा डॉ. दानिश खान (यूनिसेफ उत्तर प्रदेश) के साक्ष्य-आधारित सुझावों से समृद्ध किया गया।

अपराह्न सत्र में “अनुभव संवाद” की थीम “सीखें, संवाद करें, परिणाम देंः अनुभव से उत्कृष्टता तक” तथा उप-थीम “क्या प्रभावी है, क्या विस्तार योग्य हैः अनुभव-आधारित स्वास्थ्य प्रणाली सुदृढ़ीकरण” रही। इस सत्र में देश के विभिन्न राज्यों के सफल संस्थागत अनुभवों एवं सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा किया गया ताकि एसएचएसआरसी-यूपी के विकास हेतु उनसे सीख प्राप्त की जा सके। सत्र की अध्यक्षता विकास गोठलवाल (पूर्व आईएएस), जनस्वास्थ्य एवं नीति सलाहकार ने की। बैठक 24 जुलाई को सम्पन्न होगी।