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प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन में चल रहा गोरखधंधा उजागर

सीईओ ने सीट के नाम पर घूस के रूप में मांगे थे 15 लाख रुपये, स्टिंग ऑपरेशन से हुआ खुलासा

डॉक्टरी शिक्षा के लिए देश के मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन के नाम पर बड़ा गोरखधंधा चल रहा है. इस गोरखधंधे को लेकर एक बड़े न्यूज़ ग्रुप ने स्टिंग ऑपरेशन किया था जिसके बाद इसका बड़ा असर हुआ है. इस खुलासे के ठीक एक दिन बाद जहाँ स्टिंग ऑपरेशन किया गया था, उस निजी मेडिकल कॉलेज की CEO को हटा दिया गया है. यह मामला मेरठ स्थित मुलायम सिंह यादव मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल का है. सीट देने के नाम पर 15 लाख रुपये की मांग करने वाली कॉलेज की सीईओ डॉ. हिमानी अग्रवाल को उनके पद से हटा दिया गया है. यहां यह बताना जरूरी है कि इस इंस्टीट्यूट का समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव से कोई लेना देना नहीं है.

 

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कॉलेज की तरफ से जारी आदेश में कहा गया है कि कॉलेज में बच्चों का एडमिशन एमसीआई (मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया) के नियमों के तहत होता है. नियमों का उल्लंघन होने पर दोषी कर्मचारी या अधिकारी को सर्वसम्मति से तत्काल पदमुक्त किए जाने का विधान है. कॉलेज प्रसाशन का कहना है कि विद्यालय प्रबंध समिति ने डॉ. हिमानी अग्रवाल (CEO) को उनके पद से तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त किया जाता है.’

 

दरअसल, इस गोरखधंधे को उजागर करने के लिए न्यूज़ ग्रुप ने स्टिंग किया. इस न्यूज़ ग्रुप की स्पेशल इंवेस्टीगेशन टीम की जांच में सामने आया है कि NEET में नीचे रैंक हासिल करने वाले छात्रों से मोटा डोनेशन वसूलने के बाद उनके लिए सीटों को पहले से ही ब्लॉक कर दिया जाता है.

 

गौरतलब हो कि देश भर में नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एन्ट्रेंस टेस्ट (NEET) में प्रदर्शन के आधार पर छात्रों को मेडिकल कॉलेजों में दाखिला दिया जाता है. लेकिन मेरठ के मुलायम सिंह यादव कॉलेज की सीईओ डॉ. हिमानी अग्रवाल ने निम्न स्तर का प्रदर्शन करने वाले छात्र को अपने इंस्टीट्यूट में सीट देने के लिए 15 लाख रुपये की मांग की.

 

डॉ. अग्रवाल ने अंडर कवर रिपोर्टरों से कहा, हम NEET में 200 अंकों से नीचे हासिल करने वाले छात्रों से 15 लाख रुपये ले रहे हैं. फीस का खाका अलग से होगा. रिपोर्टरों ने खुद को नीट में लो रैंक हासिल करने वाले छात्र के रिश्तेदार के तौर पर बात की थी.

 

डॉ. हिमानी अग्रवाल ने बात को स्पष्ट करते हुए कहा, ’15 लाख रुपये सिर्फ डोनेशन के हैं, ठीक! इसके अलावा फीस और वार्षिक शुल्कों का भुगतान करना होगा. कुल मिलाकर पहले साल के लिए 16 लाख, दूसरे-तीसरे और चौथे साल के लिए 11 लाख और अंतिम साल के लिए 5.5 लाख रुपये.’

 

मुलायम सिंह यादव कॉलेज ने अपनी वेबसाइट पर दावा कर रखा है कि इसे अवार्ड विजेता डॉक्टरों और उद्यमियों की ओर से संचालित किया जाता है. लेकिन इसकी सीईओ कैमरे पर खुद ही पिछले दरवाजे से दाखिलों के लिए लेनदेन की बात करते कैद हो गयी.

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