समग्र स्वास्थ्य की परिभाषा में आध्यात्मिक स्वास्थ्य भी जोड़ें : आईएमए

लखनऊ। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की लखनऊ शाखा ने विश्व स्वास्थ्य संगठन डब्ल्यूएचओ के डायरेक्टर जनरल को पत्र लिखकर समग्र स्वास्थ्य की आधिकारिक परिभाषा की समीक्षा करने का आग्रह किया है। यह जानकारी देते हुए अध्यक्ष डॉ पीके गुप्ता ने बताया कि पत्र में लिखा गया है कि अपने स्थापना वर्ष 1948 से विश्व स्वास्थ्य संगठन ने स्वास्थ्य की परिभाषा में कहा था कि स्वास्थ्य केवल बीमारियों की अनुपस्थिति नहीं है बल्कि एक पूर्ण शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक खुशहाली की अवस्था है। भारतीय भाषा में स्वास्थ्य का वास्तविक अर्थ है अपने आप पर ध्यान केंद्रित करते हुए खुशहाल जीवन को आगे बढ़ाना जो कि जीवन में आध्यात्मिक दृष्टिकोण  को अपनाने से आता है और व्यक्ति संतुलित जीवन जीने लगता है। 1948 से अब तक 69 साल बीत चुके है लेकिन स्वास्थ्य की  आधिकारिक परिभाषा में बदलाव नहीं किया गया है।

आईएमए लखनऊ ने डब्ल्यूएचओ को लिखा पत्र

सचिव डॉ जेडी रावत ने बताया कि पत्र में लिखा है कि समय एवं परिस्थितियों के अनुसार चीजें बदलती हैं, वर्तमान परिवेश में लोगों में आंतरिक खुशहाली प्राप्त करने के लिए एक और आयाम जोडऩे की जरूरत है, जिसे हम आंतरिक वेलनेस अर्थात आध्यात्मिक स्वास्थ्य कहते हैं। डॉ गुप्ता ने लिखा है कि इस वर्ष विश्व स्वास्थ्य दिवस 7 अप्रैल की थीम है अवसाद आओ बात करें (डिप्रेशन), जो कि विश्व की सबसे बड़ी समस्या के रूप में उभर रहा है। लगभग तीन सौ मिलियन लोग इससे प्रभावित हैं। अवसाद की समस्या बहुत कुछ जीवन में आध्यात्मिक दृष्टिकोण को अपनाने से कम हो सकता है। हम विश्व स्वास्थ्य संगठन से आग्रह करते हैं कि वे बीसवीं सदी के स्वास्थ्य की आधिकारिक परिभाषा की समीक्षा कर इक्कीसवी सदी में समग्र स्वास्थ्य की परिभाषा में आध्यात्मिक खुशहाली अर्थात स्प्रिच्युअल वेल बीइंग को जोड़ दे, जिसे नये रूप में हम कह  सकते हैं कि समग्र स्वास्थ्य केवल बीमारियों की अनुपस्थिति नहीं है, बल्कि एक शारीरिक, मानसिक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक खुशहाली की अवस्था है।
डॉ गुप्ता ने बताया कि इस आग्रह को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं भारत के प्रधानमंत्री को भी भेजा गया है जिससे सरकार अपने प्रभाव का उपयोग कर विश्व स्वास्थ्य संगठन को इस मंशा से अवगत करा सकती है जो कि सम्पूर्ण मानवता के हित में होगा तथा लोगों में आंतरिक वेलनेस अर्थात आध्यात्मिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए योग, प्राणायाम, ध्यान, पूजा, धूप का सेवन तथा सुबह की सैर आदि उपायों के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।