-RESOLVE के परिणाम प्रतिष्ठित चिकित्सा पत्रिका द लैंसेट में प्रकाशित
-एसजीपीजीआई, केजीएमयू, बीएचयूआईएमएस, एम्स और जीबी पंत हॉस्पिटल के 880 मरीजों पर स्टडी

सेहत टाइम्स
लखनऊ। भारत में किए गए एक महत्वपूर्ण बहुकेंद्रित नैदानिक परीक्षण में पाया गया है कि हेपेटाइटिस-C वायरस (HCV) संक्रमण का प्रभावी उपचार सोफोसबुविर – वेलपाटासविर के 8 सप्ताह के उपचार से किया जा सकता है, जबकि मानक उपचार अवधि 12 सप्ताह है। इस महत्वपूर्ण बहुकेंद्रित नैदानिक परीक्षण RESOLVE के परिणाम प्रतिष्ठित चिकित्सा पत्रिका द लैंसेट (The Lancet) में प्रकाशित हुए हैं। वर्तमान में विश्व स्तर पर हेपेटाइटिस-C वायरस (HCV) संक्रमण के उपचार के लिए सोफोसबुविर-वेलपाटासविर (Sofosbuvir-Velpatasvir) के संयोजन का उपयोग किया जाता है, जिसे सामान्यतः 12 सप्ताह तक लेने की सिफारिश की जाती है। यह एक महँगी दवा है।
एसजीपीजीआई के मीडिया सेल से प्राप्त विज्ञप्ति में यह जानकारी देेते हुए बताया गया है कि इस उपलब्धि जिस पत्रिका द लैंसेट में छापा गया है, वह चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र की विश्व की सर्वाधिक प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में से एक है। इस पत्रिका का इम्पैक्ट फैक्टर 109 है और यह विश्व के शीर्ष तीन वैज्ञानिक जर्नलों में तीसरे स्थान पर है।

एसजीपीजीआई, केजीएमयू सहित पांच अस्पतालों के 880 मरीजों पर शोध
विज्ञप्ति के अनुसार इस अध्ययन में भारत के पाँच सरकारी वित्तपोषित अस्पतालों के कुल 880 मरीजों को शामिल किया गया। इनमें SGPGI के हेपेटोलॉजी विभाग, KGMU के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग, BHUIMS के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग, AIIMS (नई दिल्ली) के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग तथा जी.बी. पंत अस्पताल (नई दिल्ली) के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग शामिल थे। अध्ययन के परिणामों से पता चला कि 8 सप्ताह के उपचार से 98.8 प्रतिशत मरीजों में HCV संक्रमण पूरी तरह ठीक हो गया, जबकि 12 सप्ताह का उपचार प्राप्त करने वाले मरीजों में यह दर 99.0 प्रतिशत रही। इस प्रकार, अध्ययन के निष्कर्ष विश्वभर में HCV संक्रमण के उपचार के लिए प्रासंगिक हैं।
इस अध्ययन का नेतृत्व एसजीपीजीआई के हेपेटोलॉजी विभाग तथा देश के चार अन्य प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभागों के शोधकर्ताओं ने किया। इन संस्थानों में केजीएमयू, लखनऊ, बीएचयूआईएमएस, वाराणसी; एम्स, नई दिल्ली तथा जी.बी. पंत अस्पताल, नई दिल्ली शामिल हैं। अध्ययन के सांख्यिकीय विश्लेषण का कार्य लखनऊ स्थित सीएसआईआर-केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान में कार्यरत डॉ. आशीष अवस्थी ने संभाला।
यह संपूर्ण शोध कार्य नई दिल्ली स्थित भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) मुख्यालय में कार्यरत प्रो राकेश अग्रवाल तथा एसजीपीजीआई के निदेशक डॉ. आर. के. धीमन के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। शोध कार्य के प्रमुख पर्यवेक्षण एवं समन्वय की जिम्मेदारी एसजीपीजीआई के हेपेटोलॉजी विभाग के प्रमुख प्रो अमित गोयल तथा केजीएमयू, लखनऊ के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के डॉ. सुमित रुंगटा ने निभाई। इस अध्ययन के लिए भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR), स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग, भारत सरकार द्वारा 1.65 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई।

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